कविता.रोहतक: सरकार ने राजस्व विभाग की सेवाओं को ऑनलाइन कर पारदर्शिता और तेजी लाने का दावा किया था, लेकिन यही व्यवस्था अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है।
पोर्टल में लगातार आ रही तकनीकी खामियों के चलते रजिस्ट्री के बाद इंतकाल समय पर नहीं हो पा रहे हैं। इससे न केवल जमीन की खरीद-फरोख्त प्रभावित हो रही है, बल्कि विरासत, तकसीम और जमाबंदी से जुड़े कई मामलों की प्रक्रिया भी लंबी खिंच रही है। रोहतक में भी लोग रोजाना तहसील और उप तहसील कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं मिल पा रहा।
पोर्टल अपडेट नहीं होने से थम रही प्रक्रिया
राजस्व विभाग के कर्मचारियों के अनुसार सबसे बड़ी दिक्कत ऑनलाइन पोर्टल पर रिकॉर्ड समय पर अपडेट नहीं होने की है। कई मामलों में रजिस्ट्री होने के बाद भी संबंधित विवरण पोर्टल पर दिखाई नहीं देता। ऐसे में इंतकाल की फाइल आगे नहीं बढ़ पाती और आवेदकों को इंतजार करना पड़ता है। तकनीकी समस्या के कारण कर्मचारियों को भी एक ही फाइल पर कई बार काम करना पड़ रहा है।
रजिस्ट्री के बाद भी नहीं मिल पा रहा मालिकाना रिकॉर्ड
अनेक ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें रजिस्ट्री पूरी होने के बावजूद इंतकाल दर्ज नहीं हो पा रहा। इसके कारण खरीदार के नाम रिकॉर्ड अपडेट नहीं हो रहे हैं। जब तक इंतकाल पूरा नहीं होता, तब तक संबंधित व्यक्ति को भूमि का अद्यतन रिकॉर्ड नहीं मिल पाता और कई सरकारी प्रक्रियाएं भी प्रभावित रहती हैं।
विरासत, तकसीम और जमाबंदी के मामले भी प्रभावित
तकनीकी खामी का असर केवल खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं है। विरासत, पारिवारिक बंटवारे, तकसीम और जमाबंदी अपडेट जैसे मामलों में भी देरी हो रही है। कई परिवार महीनों से रिकॉर्ड दुरुस्त होने का इंतजार कर रहे हैं। इससे बैंक ऋण, फसल बीमा, सरकारी योजनाओं और भूमि सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं पर भी असर पड़ रहा है।
अधिकारियों का दावा, तकनीकी सुधार पर चल रहा काम
राजस्व विभाग का कहना है कि ऑनलाइन पोर्टल में आने वाली तकनीकी दिक्कतों की जानकारी उच्च स्तर पर भेजी गई है। पोर्टल में आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं। जैसे ही तकनीकी खामियां दूर होंगी, लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जाएगा ताकि लोगों को राहत मिल सके।
किन समस्याओं का करना पड़ रहा सामना
- रजिस्ट्री के बाद भी इंतकाल पूरा नहीं हो रहा।
- जमाबंदी में रिकॉर्ड अपडेट नहीं हो रहा
- विरासत और तकसीम के मामले लंबित हैं
- जमीन की खरीद-फरोख्त प्रभावित हो रही है।
- बैंक ऋण और अन्य राजस्व कार्यों में देरी हो रही है
- तहसील कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं
ऑनलाइन व्यवस्था से बढ़ी लोगों की उम्मीद, लेकिन सिस्टम बना चुनौती
ऑनलाइन राजस्व व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को घर बैठे सुविधाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण आम नागरिकों को पहले से अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पोर्टल की तकनीकी कमियों को जल्द दूर नहीं किया गया तो लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ेगा और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी असर पड़ेगा। ऐसे में लोगों की नजर अब इस बात पर है कि विभाग कब तक सिस्टम को पूरी तरह सुचारु कर पाता है।


