Monday, March 30, 2026
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रोहतक पीजीआई की रिसर्च टीबी इलाज में निभाएगी महत्वपूर्ण भूमिका, डाॅ. साक्षी बिष्ट को मिला प्रथम अवार्ड

रोहतक : पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के श्वास रोग विभाग के प्रो. डाॅ. राजेश गुप्ता के दिशा निर्देशन में की गई रिसर्च के लिए पीजी छात्रा डाॅ. साक्षी बिष्ट को 7 से 8 फरवरी को एयरोसिटी दिल्ली में आयोजित यूरोपियन रेस्पिरेटरी सोसायटी  इंडिया समिट 2026 की दूसरी अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में पेपर प्रस्तुतिकरण की श्रेणी में प्रथम अवार्ड से नवाजा गया है। डाॅ. साक्षी बिष्ट की इस उपलब्धि पर कुलपति डाॅ.एच.के. अग्रवाल, श्वास रोग विभाग के प्रो. डाॅ. राजेश गुप्ता ने बधाई देते हुए कहा कि डाॅ. साक्षी ने यह अवार्ड प्राप्त करके संस्थान का नाम रोशन किया है।

कुलपति डाॅ.एच.के. अग्रवाल ने कहा कि हम स्वास्थ्य विभाग से जुडे हुए हैं तो ऐसे में हमें मरीजों के हित में अधिक से अधिक रिसर्च करके उन्हें प्रकाशित करवाना चाहिए ताकि लोगों को उस रिसर्च का फायदा मिल सके और वें जल्दी ठीक हो सकें। उन्होंने कहा कि हमें डाॅ. डाॅ. साक्षी से प्रेरणा लेते हुए रिसर्च करने पर जोर देना चाहिए।

अपने इस अवार्ड के बारे में जानकारी देते हुए डाॅ. साक्षी ने बताया कि 7 से 8 फरवरी को एयरोसिटी दिल्ली में आयोजित ईआरएस इंडिया समिट 2026 की दूसरी अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। जिसमें संस्थान की तरफ से उन्होंने अकेले इस कांफ्रेंस में अपना पेपर प्रस्तुत किया था। इस पेपर का विषय रिसर्च स्पेक्ट्रम ऑफ बैक्टीरिया एंड फंगल इंफेक्शन इन स्पुटम स्मियर पॉजिटिव पलमोनरी ट्यूबरक्लोसिस पेशेंट था।

डाॅ. साक्षी ने बताया कि उन्होंने यह रिसर्च अपने प्रोफेसर डाॅ. राजेश गुप्ता के मार्गदर्शन में की थी, जिसे कांफ्रेंस में काफी सराहा गया और प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया।

डाॅ. राजेश गुप्ता ने बताया कि डाॅ. साक्षी ने अपने रिसर्च में करीब 100 लोगों को शामिल किया था, जिसमें उन्होंने पाया कि टीबी का इलाज मरीजों को छह माह के लिए दिया जाता है, लेकिन फिर भी कई लोग ठीक नहीं हो पा रहे थे। ऐसे में रिसर्च में शामिल 100 मरीजों को शामिल किया गया । इनकी जांच की गई तो पता चला कि करीब 50 प्रतिशत मरीजों को टीबी के बैक्टीरिया के साथ अन्य बैक्टीरिया भी पाया गया जिसकी वजह से वों मरीज ठीक नहीं हो पा रहे थे, उन्हें उस बैक्टीरिया की पहचान कर उसकी दवाई भी साथ दी गई तो वें ठीक होने शुरू हो गए।

डाॅ. राजेश गुप्ता ने बताया कि करीब 100 टीबी के मरीजों की जांच की गई तो पाया गया कि करीब 20 प्रतिशत मरीजों में टीबी के बैक्टीरिया के साथ फंगल इंफेक्शन भी पाया गया, जिसकी वजह से उनको ठीक होने में देर लग रही थी और उन्हें फंगल की दवाई दी गई तो वें ठीक होने शुरू हो गए।

डाॅ. राजेश गुप्ता ने बताया कि रिसर्च में पाया कि मरीजों की टीबी के साथ अन्य बैक्टीरिया और फंगल की भी जांच होनी चाहिए ताकि यदि इनमें से कोई दिक्कत मिलती है तो उसका भी इलाज साथ देकर मरीज को निर्धारित छह माह में ठीक किया जा सके। उन्होंने बताया कि अब वें यह देखेंगे कि यह रिसर्च एमडीआर टीबी में कितनी फायदेमंद साबित होगी और यदि यह उसमें भी फायदेमंद साबित हुई तो यह अपने आप में स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक मिल का पत्थर साबित होगी।

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