Friday, April 4, 2025
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Rajasthan News: कृषि, उद्यानिकी व मसाला फसलों को जी.आई. टैग दिलाने से जुड़ी कार्यशाला का आयोजन

Rajasthan News: राज्य में कृषि, उद्यानिकी व मसाला फसलों को जी.आई. टैग (भौगोलिक संकेतक) दिलवाये जाने के सम्बन्ध में शुक्रवार को पंत कृषि भवन के सभा कक्ष में शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी राजन विशाल की अध्यक्षता में जी.आई. टैग विशेषज्ञों, कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों एवं विभागीय अधिकारियों के साथ एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में शासन सचिव ने बताया कि राजस्थान में कुल 16 उत्पाद और 5 कलाओं को जी.आई. टैग प्राप्त है, जिनमें कृषि क्षेत्र से सोजत की मेहन्दी और कृषि इण्डस्ट्रियल उत्पाद में बीकानेरी भुजिया शामिल है। उन्होंने बताया कि ‘पंच गौरव‘ में शामिल कृषि उत्पादों, ‘एक जिला एक उत्पाद‘ और किसी इलाके विशेष के कृषि उत्पादों को जी.आई. टैग दिलाने के पूरे प्रयास किये जायेंगे। इसके लिए कृषि, उद्यानिकी, कृषि विपणन, राजस्थान राज्य बीज निगम, राजस्थान राज्य जैविक प्रमाणीकरण संस्था और कृषि विश्वविद्यालयों के साथ एक उच्च स्तरीय अन्तर विभागीय कमेटी का गठन किया जा रहा है, जो कृषि के विशिष्ट उत्पादों की लिस्ट तैयार कर उन्हें जी.आई. टैग दिलाने के लिए प्रोसेस करेगी।

उन्होंने बताया कि जिन उत्पादों को जी.आई. टैग मिलता है, उन्हें विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान मिलती है, जिससे उनकी डिमाण्ड बढ़ जाती है और डिमाण्ड बढ़ने से उस फसल का किसानों को भी उचित मूल्य मिलता है, जिससे कृषकों की आर्थिक स्थिति मजबूत बनती है।

जी.आई. टैग किसी भी रीजन का क्षेत्रीय उत्पाद होता है, जिससे उस क्षेत्र की पहचान होती है। किसी उत्पाद की ख्याति देश-दुनिया में फैलती है तो उसे प्रमाणित करने के लिए एक प्रक्रिया होती है, जिसे जी.आई. टैग यानि भौगोलिक संकेतक कहते हैं। जी.आई. टैग हस्तशिल्प, खाद्य पदार्थो, औद्योगिक वस्तुऐं और एग्रीकल्चर प्रोडक्ट के लिए दिया जाता है।

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किसी प्रोडक्ट के लिए जी.आई. टैग हासिल करने के लिए उसे बनाने वाली एसोसिएशन या कलेक्टिव बॉडी या सरकारी स्तर पर आवेदन किया जा सकता है। जी.आई. टैग 10 साल के लिए मिलता है। इसके बाद इसे रिन्यू करवाया जा सकता है। जी.आई. टैग मिलने से प्रोडक्ट के मूल्य और उससे जुड़े लोगो की अहमियत बढ़ जाती है और नकली उत्पादों को रोकने में मदद मिलती है। इससे जुड़े हुए सम्बन्धित लोगो को आर्थिक फायदा होता है।

कार्यशाला में आयुक्त कृषि सुश्री चिन्मयी गोपाल, निदेशक कृषि विपणन विभाग श्री राजेश कुमार चौहान, महाप्रबंधक कृषि विपणन बोर्ड श्री रविन्द्र कुमार, जी.आई. टैग विशेषज्ञ डॉ0 सुजीत कुमार यादव, सहायक प्रोफेसर कृषि अर्थशास्त्र डॉ0 विकास पावड़िया सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे एवं संभागों से अतिरिक्त निदेशक व सभी जिलों सेे संयुक्त निदेशक वीडियो कॉन्फ्रेन्सिग के माध्यम से जुडे़।

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