Saturday, August 29, 2026
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हरियाणा के 17 जिलों में बारिश सामान्य से कम, 2 सितंबर तक संभावना नहीं, फसलों पर वैज्ञानिकों ने किया मंथन

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के हिसार जोन की क्षेत्रीय अनुसंधान एवं विस्तार एडवाइजरी कमेटी की बैठक सायना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण एवं शिक्षा संस्थान में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने की।

छात्र कल्याण निदेशक एवं मौसम विभाग के अध्यक्ष डॉ. मदन लाल खीचड़ ने बताया कि हरियाणा के 23 जिलों में से लगभग 16-17 जिलों में वर्षा सामान्य से कम रही है तथा 2 सितंबर तक वर्षा की संभावना नहीं है।

डॉ. राजबीर गर्ग ने कहा कि बैठक का उद्देश्य किसानों की कृषि संबंधी समस्याओं को कृषि अधिकारियों के माध्यम से वैज्ञानिकों के समक्ष रखना तथा उनका समाधान सुनिश्चित करना है। बैठक में रबी की फसल गेहूं, चना, सरसों, जौ, जई, बरसीम सहित खरीफ की कपास, धान, बाजरा एवं मूंग की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने धान में बौना रोग की स्थिति नियंत्रण में रहने पर संतोष व्यक्त करते हुए डॉ. राकेश चुघ के नेतृत्व में पौध रोग विभाग द्वारा की गई निरंतर निगरानी की सराहना की।

गेहूं विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं फार्म निदेशक डॉ. ओ.पी. बिश्नोई ने डब्ल्यूएच 1270, डीबीडब्ल्यू 303, डीबीडब्ल्यू 327 एवं पीबीडब्ल्यू 872 जैसी अगेती तथा डब्ल्यूएच 1142 एवं डब्ल्यूएच 1402 जैसी कम पानी वाली गेहूं किस्मों की जानकारी दी। डॉ. राम अवतार ने सरसों की बिजाई, सिंचाई एवं रोग-कीट प्रबंधन संबंधी सुझाव दिए।

कृषि अधिकारियों ने बताया कि इसके बावजूद खरीफ फसलों की स्थिति पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर है। इस वर्ष धान में विषाणु जनित बौना रोग तथा कपास में गुलाबी सुंडी का प्रकोप कम रहा, जबकि धान में पत्ता लपेट सुंडी तथा कपास में सफेद मक्खी, तेले एवं चुरड़े का प्रकोप कुछ क्षेत्रों में देखा गया।

उपरोक्त संस्थान के सह-निदेशक (प्रशिक्षण) डॉ. अशोक कुमार गोदारा ने भिवानी, हिसार, जींद, फतेहाबाद एवं सिरसा जिलों से आए कृषि अधिकारियों तथा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. भूपेंद्र सिंह ने पिछले वर्ष के किसान खेत परीक्षणों के परिणाम प्रस्तुत किए तथा आगामी वर्ष के परीक्षण सुनिश्चित किए। बैठक में विश्वविद्यालय के मीडिया सलाहकार डॉ. संदीप आर्य एवं परियोजना निदेशक डॉ. एस.के. धनखड़ सहित अन्य वैज्ञानिक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

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