रोहतक : पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा है कि मौसम में बदलाव के साथ वायरल फ्लू के मामले आते हैं, लेकिन घबराने की कोई जरूरत नहीं है। पीजीआईएमएस रोहतक स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और आम जनता में जागरूकता फैलाना ही हमारा मुख्य लक्ष्य है।
कुलपति डॉ. अग्रवाल ने बताया कि पीजीआईएमएस के निदेशक डॉ. सुरेश कुमार सिंघल की अध्यक्षता में गत दिवस एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें अस्पताल की तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल, मेडिसिन, माइक्रोबायोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसिन, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन, एनाटॉमी विभाग के विभागाध्यक्ष और नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट मौजूद रहे।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि पैनिक करने की जरूरत नहीं है। मास्क पहनें और कोविड वाला प्रोटोकॉल फॉलो करें, स्वाइन फ्लू से बचा जा सकता है।
पीजीआईएमएस में क्या तैयारी है
कुलपति डॉ. अग्रवाल ने बताया कि बैठक में कई सकारात्मक निर्णय लिए गए हैं – मरीजों की सुरक्षा के लिए वार्ड नंबर 24 में तीन कमरों को आइसोलेशन बेड के लिए विशेष तौर पर आरक्षित किया गया है। ईएनटी विभाग द्वारा अलग से *फ्लू क्लीनिक* शुरू किया जा रहा है ताकि सर्दी-जुकाम, बुखार वाले मरीजों को तुरंत परामर्श मिल सके। जांच के लिए ILI यानी इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षण वाले 5 प्रतिशत मामलों और SARI यानी गंभीर श्वसन संक्रमण के 100 प्रतिशत मामलों की टेस्टिंग की जाएगी। अस्पताल में टेमीफ्लू दवा का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और एन-95 मास्क की अर्जेंट लोकल परचेज शुरू कर दी गई है। साथ ही हेल्थ केयर वर्कर्स के लिए मास्क व बचाव को लेकर एडवाइजरी और जन-जागरूकता के लिए IEC गतिविधियां चलाई जाएंगी।
स्वाइन फ्लू क्या है :
कुलपति डॉ. अग्रवाल ने जनरल मेडिसिन विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मोहिनी के हवाले से बताया कि स्वाइन फ्लू कोई नई बीमारी नहीं है। यह H1N1 इन्फ्लूएंजा ए वायरस से होने वाला एक मौसमी फ्लू है, जो हर साल सर्दी और बरसात के मौसम में सक्रिय होता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में खांसने, छींकने से फैलता है। यह सामान्य वायरल फ्लू की तरह ही है और इसका पूरा इलाज पीजीआईएमएस में संभव है।
लक्षण कैसे पहचानें
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि डॉ. मोहिनी के अनुसार इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं
- अचानक तेज बुखार आना, जो 100 डिग्री से अधिक हो
- गले में खराश और लगातार खांसी
- नाक बहना, नाक बंद होना और छींके आना
- पूरे शरीर में दर्द और अत्यधिक थकान
- सिरदर्द, भूख न लगना
- कुछ मामलों में उल्टी, जी मिचलाना और दस्त भी।
यदि बुखार 2-3 दिन से अधिक रहे और सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
किन लोगों को अधिक सावधानी की जरूरत है
कुलपति जी ने कहा कि बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, अस्थमा, हृदय रोग और कम इम्युनिटी वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। ऐसे लोगों के लिए जनरल मेडिसिन विभाग में प्राथमिकता के साथ भर्ती की व्यवस्था की गई है।
बचाव के आसान उपाय – यही सबसे बड़ा इलाज है
डॉ. अग्रवाल ने अपील की कि बचाव बेहद आसान है –
- मास्क है सबसे बड़ा हथियार: भीड़भाड़ वाली जगह पर मास्क जरूर लगाएं।
- हाथों की सफाई: दिन में कई बार हाथों को साबुन से धोएं, सैनिटाइजर का उपयोग करें।
- सोशल डिस्टेंसिंग: खांसते या छींकते समय मुंह पर रूमाल रखें, 1 मीटर की दूरी बनाए रखें।
- इम्युनिटी बढ़ाएं: पौष्टिक भोजन, ताजे फल, सब्जियां और पर्याप्त पानी लें।
- स्वयं दवा न लें: बुखार होने पर खुद से एंटीबायोटिक न लें।
इलाज क्या है
कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने बताया कि लोग अफवाहों पर ध्यान न दें। शुरुआती 48 घंटों में डॉक्टर की सलाह पर दी जाने वाली टेमीफ्लू दवा बहुत कारगर है। पीजीआईएमएस रोहतक में जांच और इलाज दोनों की पूरी सुविधा उपलब्ध है। माइक्रोबायोलॉजी लैब में जांच और गंभीर मरीजों के लिए पीसीसीएम विभाग के आईसीयू में विशेष व्यवस्था की गई है।
अंत में कुलपति डॉ. अग्रवाल ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी भ्रामक खबर पर ध्यान न दें। जागरूक बनें, मास्क पहनें, हाथ धोते रहें और लक्षण दिखने पर तुरंत फ्लू क्लीनिक में आकर जांच करवाएं। पीजीआईएमएस प्रशासन आपकी सेवा और सुरक्षा के लिए 24 घंटे तैयार है।


