Wednesday, July 22, 2026
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बारिश के साथ बढ़ा बीमारियों का खतरा, अस्पतालों की ओपीडी में 10 प्रतिशत मरीज बढ़े

  • नमी, दूषित पानी और मच्छरों के कारण वायरल से लेकर डेंगू तक का खतरा

कविता.रोहतक: जिले में लगातार हो रही बारिश ने जहां लोगों को गर्मी से राहत दी है, वहीं बदलते मौसम ने बीमारियों का खतरा भी बढ़ा दिया है। नमी, जलभराव, दूषित पेयजल और मच्छरों की बढ़ती संख्या के कारण सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगभग 10 प्रतिशत बढ़ रही है।

ओपीडी में सबसे ज्यादा मरीज वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में संक्रमण, डायरिया, उल्टी-दस्त, पेट दर्द, त्वचा रोग और आंखों के संक्रमण की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बारिश के मौसम में थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर संक्रमण का कारण बन सकती है।

बरसात के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। दूसरी ओर जगह-जगह जमा बारिश का पानी मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करता है। ऐसे में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा दूषित पानी और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से टायफाइड, पीलिया, हैजा और फूड प्वाइजनिंग जैसी बीमारियां भी लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में साफ पानी पीना, ताजा और गर्म भोजन करना, व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना तथा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखना बेहद जरूरी है। यदि लगातार बुखार, उल्टी-दस्त, तेज सिरदर्द, शरीर में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या आंखों में संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

वायरल संक्रमण बना सबसे बड़ा सिरदर्द

बारिश के मौसम में वायरल बुखार के मरीज सबसे अधिक सामने आ रहे हैं। तेज बुखार, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द, कमजोरी और खांसी इसके सामान्य लक्षण हैं। अधिकांश मरीज समय पर इलाज और आराम से ठीक हो जाते हैं, लेकिन संक्रमण को हल्के में लेना परेशानी बढ़ा सकता है।

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया पर बढ़ी नजर

बारिश के बाद घरों और खाली प्लॉटों में जमा पानी मच्छरों का सबसे बड़ा ठिकाना बन जाता है। डेंगू में तेज बुखार और प्लेटलेट्स कम होने का खतरा रहता है, मलेरिया में ठंड के साथ बुखार आता है, जबकि चिकनगुनिया लंबे समय तक जोड़ों के दर्द से परेशान करता है। स्वास्थ्य विभाग लोगों से आसपास पानी जमा नहीं होने देने की अपील कर रहा है।

पेट और लीवर से जुड़ी बीमारियां भी बढ़ीं

बरसात में दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन के कारण डायरिया, टायफाइड, हैजा, फूड प्वाइजनिंग और पीलिया के मरीज भी बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पीने और ताजा भोजन करने से इन बीमारियों का जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।

त्वचा, आंख और सांस संबंधी संक्रमण का खतरा

लगातार नमी रहने से दाद, खुजली, फंगल इंफेक्शन और एलर्जी जैसी त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। वहीं बारिश के गंदे पानी के संपर्क में आने से आंखों में संक्रमण और कंजंक्टिवाइटिस के मामले भी सामने आ रहे हैं। मौसम में बदलाव के कारण अस्थमा और एलर्जी के मरीजों की परेशानी भी बढ़ सकती है।

फ्लू और स्वाइन फ्लू से भी रहें सतर्क

बारिश के मौसम में सामान्य फ्लू के साथ इन्फ्लुएंजा (स्वाइन फ्लू) जैसे श्वसन संक्रमण फैलने की आशंका भी रहती है। लगातार तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत, सीने में जकड़न या लगातार खांसी होने पर तुरंत जांच करानी चाहिए, ताकि संक्रमण गंभीर रूप न ले।

बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती अधिक सावधानी बरतें

कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ऐसे लोगों को भीड़भाड़ वाली जगहों से बचने, पर्याप्त पानी पीने और हल्के लक्षण दिखने पर भी डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह दी जा रही है।

बरसात में ऐसे रखें अपनी सेहत का ध्यान

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पीना, बाहर का खुला भोजन खाने से बचना, हाथों की नियमित सफाई करना, बारिश में भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनना, मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी या रिपेलेंट का उपयोग करना और घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देना सबसे प्रभावी बचाव है। किसी भी बीमारी के लक्षण दिखने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सक की सलाह लेना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

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