रोहतक : उपायुक्त सचिन गुप्ता ने स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण (एसएसजी)-2025 में रोहतक को उत्तर क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला जिला घोषित होने पर अतिरिक्त उपायुक्त, संबंधित विभाग, स्वयं सहायता समूह, ग्रामीणों के योगदान की सराहना की है। उन्होंने विकास एवं पंचायत विभाग के साथ-साथ जिला की सभी ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों का भी आभार व्यक्त किया है।
सचिन गुप्ता ने इस उपलब्धि को जिला एवं प्रदेश दोनों के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा है कि यह सम्मान प्रत्येक ग्राम पंचायत, स्वच्छता कर्मी, अग्रिम पंक्ति के अधिकारी, स्वयं सहायता समूह, स्वयंसेवक एवं ग्रामीण परिवार का है, जिन्होंने स्वच्छता को केवल अभियान नहीं बल्कि अपनी दैनिक जीवनशैली बनाया। यह उपलब्धि सामूहिक प्रयास, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन तथा सतत फील्ड मॉनिटरिंग की सफलता का प्रमाण है। रोहतक का अनुभव ग्रामीण स्वच्छता को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए पूरे क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में कार्य करेगा।
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा है कि हरियाणा प्रदेश ने स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण (एसएसजी)-2025 में उत्तर भारत में प्रथम स्थान प्राप्त कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। रोहतक जिला को उत्तर क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला जिला घोषित किया गया है, जो सभी जिला वासियों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने नागरिकों का आह्वान किया है कि वे इस प्रदर्शन को भविष्य में भी बनाये रखें। यह रैंकिंग जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा स्वतंत्र एजेंसी एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (एएमएस) के माध्यम से कराए गए मूल्यांकन के आधार पर जारी की गई है।
सचिन गुप्ता ने कहा है कि उत्तर क्षेत्र में हरियाणा ने पंजाब, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया। वहीं देश के अन्य क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश केंद्रीय क्षेत्र, बिहार पूर्वी क्षेत्र, सिक्किम उत्तर-पूर्वी क्षेत्र, तेलंगाना दक्षिणी क्षेत्र तथा महाराष्ट्र पश्चिमी क्षेत्र में प्रथम स्थान पर रहे। केंद्र शासित प्रदेशों में दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव प्रथम स्थान पर रहे।
सर्वेक्षण का दायरा एवं मूल्यांकन प्रक्रिया
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा है कि स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2025 के अंतर्गत मणिपुर को छोडक़र 27 राज्यों एवं 6 केंद्र शासित प्रदेशों के 744 जिलों, 20,659 गांवों, 3,22,033 ग्रामीण परिवारों, 1,03,607 सार्वजनिक संस्थानों एवं सामुदायिक स्वच्छता परिसरों तथा देशभर के 3,701 ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्रों का मूल्यांकन किया गया।
जिलों की रैंकिंग निम्नलिखित मानकों के आधार पर निर्धारित की गई
सचिन गुप्ता ने कहा है कि जिला की रैंकिंग को प्रत्यक्ष निरीक्षण – 40 प्रतिशत, सेवा स्तर की प्रगति – 30 प्रतिशत, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्रों का प्रत्यक्ष निरीक्षण – 20 प्रतिशत तथा नागरिक फीडबैक – 10 प्रतिशत के मानकों के आधार पर निर्धारित की गई है। मूल्यांकन के दौरान स्वच्छता अवसंरचना, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, सेवा वितरण, फील्ड सत्यापन तथा जनभागीदारी जैसे पहलुओं का विस्तृत आकलन किया गया।
रोहतक का स्वच्छता मॉडल बना मिसाल
अतिरिक्त उपायुक्त एवं जिला परिषद तथा जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेंद्र कुमार ने कहा है कि यह उपलब्धि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत वर्षों की सुनियोजित कार्ययोजना, प्रभावी क्रियान्वयन तथा जनभागीदारी का परिणाम है। जिला में ग्राम पंचायतों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन शेड स्थापित किए गए, नियमित श्रमदान अभियान चलाए गए, कम्पोस्ट गड्ढे विकसित किए गए, सोख्ता गड्ढों एवं सामुदायिक सोख्ता प्रणालियों का निर्माण कराया गया तथा नालों पर स्क्रीनिंग व्यवस्था सुनिश्चित की गई। ग्रे-वॉटर के पुन: उपयोग को बढ़ावा देने के लिए किचन गार्डन विकसित किए गए।
नरेंद्र कुमार ने कहा है कि ग्राम पंचायतों के सहयोग से घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था लागू की गई तथा वैज्ञानिक फीकल स्लज प्रबंधन के लिए पंजीकृत निजी डिस्लजिंग ऑपरेटरों की सेवाएं ली गईं। बालिका विद्यालयों में सैनिटरी अपशिष्ट के सुरक्षित निस्तारण हेतु इंसीनरेटर स्थापित किए गए। इसके साथ ही व्यापक जन-जागरूकता अभियान, दीवार लेखन तथा प्लास्टिक कचरा पृथक्करण अभियान भी चलाए गए।
अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार ने कहा है कि यह सम्मान जिला प्रशासन, ग्राम पंचायतों, स्वच्छता कर्मियों तथा ग्रामीण समुदाय के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। हमारा ध्यान मजबूत स्वच्छता अवसंरचना विकसित करने, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ करने तथा जनसहभागिता को बढ़ावा देने पर रहा है। यह उपलब्धि हमें गांवों को और अधिक स्वच्छ, स्वस्थ एवं टिकाऊ बनाने के लिए प्रेरित करेगी। अधिकारियों के अनुसार इन प्रयासों से गांवों में स्वच्छता का स्तर उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है, खुले में कचरा फेंकने की घटनाओं में कमी आई है तथा स्वयं सहायता समूहों, विद्यार्थियों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख निष्कर्ष
स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2025 के अनुसार देशभर में 93 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास शौचालय की सुविधा उपलब्ध है, 95 प्रतिशत परिवारों ने बताया कि उनके यहां सभी सदस्य नियमित रूप से शौचालय का उपयोग करते हैं, 98 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने सुरक्षित हाथ धोने की आदत अपनाने की पुष्टि की, 58 प्रतिशत परिवार जैविक एवं अजैविक कचरे का स्रोत स्तर पर पृथक्करण करते हैं, 76 प्रतिशत लोगों ने पिछले पांच वर्षों में गांवों की स्वच्छता में उल्लेखनीय सुधार महसूस किया, 74 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की गतिविधियों पर संतोष व्यक्त किया है।
राष्ट्रीय मानकों की तुलना में रोहतक का प्रदर्शन रहा और भी बेहतर
इन राष्ट्रीय मानकों की तुलना में रोहतक का प्रदर्शन और भी बेहतर रहा। राष्ट्रीय स्तर पर केवल 43 प्रतिशत गांवों में कचरा पृथक्करण शेड उपलब्ध हैं, 50 प्रतिशत गांवों में सामुदायिक सोख्ता अथवा लीच पिट हैं तथा मूल्यांकन किए गए केवल 52 प्रतिशत प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयां ही संचालित पाई गईं। इसके विपरीत रोहतक में ग्राम पंचायत स्तर पर विकसित व्यापक कचरा पृथक्करण व्यवस्था, व्यवस्थित तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा वैज्ञानिक डिस्लजिंग प्रणाली जिले को राष्ट्रीय औसत से काफी आगे स्थापित करती है।
आगे की दिशा
उत्तर क्षेत्र में रोहतक के शीर्ष स्थान तथा हरियाणा के प्रथम स्थान प्राप्त करने के साथ प्रदेश का ग्रामीण स्वच्छता मॉडल अब पूरे उत्तर भारत के लिए एक आदर्श के रूप में उभरकर सामने आया है। वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन, मजबूत आधारभूत ढांचे, सतत निगरानी एवं जनभागीदारी पर आधारित यह मॉडल दर्शाता है कि समन्वित प्रशासनिक प्रयास और नागरिक सहभागिता से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं जीवन गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है। यह उपलब्धि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत प्राप्त सफलताओं को निरंतर बनाए रखने तथा स्वच्छता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के उच्च मानक स्थापित करने की हरियाणा सरकार की प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करती है।

