Thursday, October 15, 2026
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Rain in Rohtak : बारिश ने बढ़ाई किसानों की परेशानी, खेतों से मंडियों तक धान की फसल पर मंडराया खतरा

कविता.रोहतक : अक्टूबर के मध्य में बदले मौसम ने रोहतक के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बुधवार सुबह तक जिले में 5.7 एमएम बारिश दर्ज की गई। बेमौसम बरसात के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल और मंडियों में खुले में रखे धान पर नुकसान का खतरा मंडराने लगा है। मंडी में धान भीगने से किसान परेशान हैं।

किसानों को चिंता है कि यदि बारिश का सिलसिला आगे भी जारी रहा तो फसल की कटाई, धान को सुखाने और उसकी खरीद की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। वहीं, खेतों में नमी बढ़ने से अगली फसल की बुवाई में भी देरी होने की आशंका है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस बारिश का कारण पश्चिमी विक्षोभ है। मानसून सीजन समाप्त होने के बाद हो रही इस बरसात को बेमौसम बारिश माना जा रहा है।

बारिश से धान की फसल पर संकट

रोहतक में हुई बारिश ने उन किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जिनकी धान की कटाई अभी बाकी है। खेतों में खड़ी फसल को बारिश और तेज हवाओं से नुकसान पहुंचने की आशंका है। वहीं, कटाई के बाद मंडियों में पहुंचा धान भी बारिश की चपेट में आ रहा है। खुले में रखी उपज के भीगने से उसकी नमी बढ़ सकती है, जिससे गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा है। किसानों को अब मौसम साफ होने का इंतजार है, ताकि वे अपनी फसल की कटाई और सुखाने का काम समय पर पूरा कर सकें।

मंडी में भीगा धान, खरीद और भंडारण की चिंता

बेमौसम बारिश के बीच मंडियों में खुले में रखे धान की सुरक्षा किसानों और संबंधित एजेंसियों के लिए चुनौती बन गई है। बारिश से धान की ढेरियों और बोरियों के भीगने पर उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। यदि अनाज में नमी बढ़ती है तो खरीद के दौरान भी परेशानी आ सकती है। किसानों की मांग है कि मंडियों में धान को बारिश से बचाने के लिए पर्याप्त ढकाव और सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था होनी चाहिए। बारिश का दौर जारी रहने पर खरीद और उठान की प्रक्रिया में भी देरी होने की आशंका है।

पश्चिमी विक्षोभ से बदला मौसम, कई जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, हरियाणा में मानसून का सीजन समाप्त हो चुका है और अब पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बारिश हो रही है। मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के 1 से 14 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। कुरुक्षेत्र में 37.1 एमएम बारिश हुई, जो सामान्य से 489 प्रतिशत अधिक है। सोनीपत में 31.7 एमएम बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 306 प्रतिशत अधिक रही। कैथल में 20.1 एमएम बारिश के साथ 368 प्रतिशत और अंबाला में 32.5 एमएम बारिश के साथ 210 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अक्टूबर के पहले पखवाड़े में प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का असर सामान्य से काफी ज्यादा रहा है।

कहीं सामान्य से अधिक बारिश

हरियाणा में बारिश का वितरण एक समान नहीं रहा है। रोहतक में 5.7 एमएम और फरीदाबाद में 11.4 एमएम बारिश दर्ज की गई, जबकि आंकड़ों के अनुसार दोनों जिलों में बारिश सामान्य श्रेणी में रही। पंचकूला में 19.8 एमएम, यमुनानगर में 15.9 एमएम, सिरसा में 4.9 एमएम और गुरुग्राम में 10.1 एमएम बारिश हुई। दूसरी ओर, पानीपत में सामान्य से 22 प्रतिशत और झज्जर में 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। हिसार, फतेहाबाद, जींद, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और नूंह में भी बारिश कम रही। भिवानी और चरखी दादरी में 1 से 14 अक्टूबर के दौरान बारिश दर्ज नहीं की गई। इन जिलों में बारिश की कमी 100 प्रतिशत रही।

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