कविता.रोहतक : महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) परिसर में इन दिनों स्कॉर्पियो, थार और फॉर्च्यूनर जैसी बड़ी गाड़ियों की बढ़ती संख्या छात्र-छात्राओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
छात्राओं का आरोप है कि कुछ युवकों की ओर से छेड़छाड़ और फब्तियां कसने की घटनाओं से उन्हें असहजता महसूस हो रही है। स्थिति ऐसी बनी कि अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर छात्राओं को विश्वविद्यालय परिसर की सड़क पर बैठकर विरोध करना पड़ा। छात्राओं का कहना है कि विश्वविद्यालय में पढ़ाई के लिए आने के बजाय अब उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता करनी पड़ रही है।
बड़ी गाड़ियों की भीड़
विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी गाड़ियों की बढ़ती आवाजाही ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्राओं का कहना है कि कई बार तेज रफ्तार और बेवजह घूमती गाड़ियों से उन्हें परेशानी होती है। सवाल यह है कि जब विश्वविद्यालय का परिसर विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक माहौल देने की जगह है, तो वहां आने-जाने वाले वाहनों की निगरानी कितनी प्रभावी है। कौन सी गाड़ी परिसर में प्रवेश कर रही है, उसमें कौन सवार है और वह किस उद्देश्य से परिसर में घूम रही है, इसकी निगरानी व्यवस्था कितनी मजबूत है, यह जांच का विषय है।
सीसीटीवी और गेट पर सख्ती जरूरी
विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा बढ़ाने के लिए सबसे पहले सभी प्रवेश द्वारों पर वाहनों की प्रभावी निगरानी जरूरी है। संदिग्ध या अनावश्यक वाहनों की एंट्री पर रोक, नियमित वाहन जांच और सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। कैमरों की सिर्फ संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनकी लगातार निगरानी और रिकॉर्डिंग के आधार पर शिकायतों पर कार्रवाई भी सुनिश्चित करनी होगी। संवेदनशील स्थानों पर महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी छात्राओं का भरोसा बढ़ा सकती है।
शिकायत से कार्रवाई तक तय हो व्यवस्था
छात्राओं की सुरक्षा के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिसमें शिकायत करने वाली छात्रा को बार-बार अपनी समस्या बताने के लिए मजबूर न होना पड़े। विश्वविद्यालय में महिला हेल्प डेस्क, तत्काल शिकायत की सुविधा और एक स्पष्ट रिस्पांस सिस्टम बनाया जा सकता है। छेड़छाड़ या फब्तियों की शिकायत मिलने पर समयबद्ध जांच और दोषी पाए जाने वालों पर विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही छात्र संगठनों, शिक्षकों और सुरक्षा अधिकारियों के साथ नियमित बैठक कर सुरक्षा संबंधी समस्याओं की पहचान की जा सकती है। उद्देश्य सिर्फ विरोध के बाद व्यवस्था सुधारना नहीं, बल्कि ऐसा माहौल बनाना होना चाहिए जिसमें छात्राओं को विरोध करने की नौबत ही न आए।

