कविता .रोहतक। रात का सन्नाटा, गली में खड़े वाहन और अचानक शुरू हुआ हंगामा। कुछ युवकों ने ऐसा उत्पात मचाया कि ऑटो और बाइक तोड़ दिए गए, एक महिला के घर का दरवाजा तक नहीं बचा। कृष्णा कॉलोनी के कुआं मोहल्ले में यह तस्वीर तीन महीने बाद फिर सामने आई है। फर्क सिर्फ इतना है कि पिछली घटना के बाद पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग उठी थी, लेकिन अब दोबारा हुई वारदात ने उसी सवाल को और बड़ा कर दिया है कि आखिर रात में मोहल्ले की गलियों की सुरक्षा किसके भरोसे है। इस मोहल्ले में यह पहली घटना नहीं है। करीब तीन महीने पहले भी रात के समय शरारती तत्वों ने इसी तरह उत्पात मचाया था। उस समय स्थानीय लोगों ने पुलिस से रात में गश्त बढ़ाने की मांग की थी। उम्मीद थी कि संवेदनशील गलियों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ेगी और ऐसी घटनाओं पर रोक लगेगी। इस बार भी उत्पात की शुरुआत गली से हुई और देखते ही देखते ऑटो व बाइक को नुकसान पहुंचा दिया गया। जब ज्यादातर लोग घरों में थे, उस वक्त सड़क पर हुए हंगामे ने पूरे इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।
*घर की चौखट तक पहुंचा उत्पात*
मामला सिर्फ वाहनों की तोड़फोड़ तक सीमित नहीं रहा। एक महिला के घर का दरवाजा भी तोड़ दिया गया। घर की चौखट तक पहुंची इस वारदात ने मोहल्ले के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सवाल यह भी है कि अगर रात में कोई बेखौफ होकर घरों तक पहुंच सकता है तो आम लोगों की सुरक्षा कितनी पुख्ता है।
*फिर सामने आई गश्त बढ़ाने की मांग*
पिछली घटना के बाद पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की गई थी। अब दोबारा वारदात के बाद स्थानीय लोग फिर रात में पुलिस की नियमित आवाजाही की उम्मीद कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि संवेदनशील इलाकों में समय-समय पर गश्त होने से शरारती तत्वों में कानून का डर पैदा हो सकता है।
*रात की गलियों में पुलिस की आहट कितनी*
कृष्णा कॉलोनी की घटना ने एक बार फिर रात के समय पुलिस गश्त को चर्चा में ला दिया है। शहर के रिहायशी इलाकों में रात के समय पुलिस की मौजूदगी सिर्फ अपराध रोकने के लिए नहीं, बल्कि लोगों में सुरक्षा का भरोसा बनाए रखने के लिए भी जरूरी है। स्थानीय लोगों की चिंता यही है कि संवेदनशील इलाकों में गश्त नियमित हो और पुलिस की मौजूदगी केवल किसी घटना के बाद दिखाई न दे।
*गलियां कौन संभालता है*
रात में जब बाजार और सड़कें शांत होने लगती हैं, तब रिहायशी गलियों की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी और महत्वपूर्ण हो जाती है। कृष्णा कॉलोनी की घटना के बाद रोहतक के दूसरे मोहल्लों के लोग भी यही सवाल उठा रहे हैं कि देर रात संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। लोगों की मांग है कि रात के समय प्रमुख संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त और निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि शरारती तत्वों को मौका न मिले और परिवार बेफिक्र होकर सो सकें।

