Saturday, July 25, 2026
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Punjab News: PSEB का ऐतिहासिक फैसला; अब उम्र नहीं, बल्कि मार्क्स तय करेंगे रैंक

Punjab News: पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) की पेपर मूल्यांकन प्रणाली को बदलने का फैसला किया है। अब बोर्ड परीक्षाओं में समान अंक पाने वाले छात्रों को समान रैंक दी जाएगी। इस फैसले से जन्मतिथि के आधार पर ‘टाई-ब्रेकर’ (समान अंक होने पर वरीयता तय करने) की पुरानी प्रथा खत्म हो जाएगी।

यह अहम फैसला आज PSEB की बोर्ड बैठक में लिया गया। यह फैसला 31 मई, 2026 को आयोजित राज्य-स्तरीय सम्मान समारोह “सितारे ज़मीन पर” के दौरान कुछ छात्रों के साथ हुई बातचीत के आधार पर लिया गया है। इस समारोह में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कक्षा 8, 10 और 12 के ज़िला टॉपर्स को सम्मानित किया था। बातचीत के दौरान कुछ छात्रों ने बताया कि टॉप रैंक वाले छात्र के बराबर अंक पाने वाले छात्रों को केवल उम्र के आधार पर मेरिट लिस्ट में नीचे रखा जाता है, जिससे उनकी रैंक पर असर पड़ता है। इस मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड को निर्देश दिया कि वे इस प्रथा को खत्म करें और समान अंक पाने वाले सभी छात्रों के लिए एक समान रैंक प्रणाली लागू करें।

बैंस ने कहा कि यह छात्र-केंद्रित शिक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। टॉपर छात्र के बराबर अंक पाने वाले छात्र को उम्र के आधार पर निचली रैंक नहीं दी जा सकती। मुख्यमंत्री मान के दूरदर्शी नेतृत्व में, अब समान अंक का मतलब समान रैंक होगा।

हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि रैंकिंग में सुधार के अलावा, शिक्षा बोर्ड ने प्रश्न पत्र के डिज़ाइन में भी बड़े बदलाव करने का फैसला किया है। इसका मकसद नकल रोकना और रटकर सीखने की आदत को खत्म करना है। ‘सितारे ज़मीन पर’ कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने मुख्यमंत्री को बताया कि मौजूदा प्रश्न पत्रों में ज्ञान के बजाय रटकर सीखने पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाता है। हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “हम विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए योग्यता-आधारित (competency-based) प्रश्न पत्र अपना रहे हैं। हमारा ध्यान छात्र की समझ, विश्लेषणात्मक क्षमता और तर्कशक्ति को परखने पर है, न कि इस बात पर कि वे कितनी अच्छी तरह रट सकते हैं। बेहतर प्रश्न पत्रों का मकसद नकल की गुंजाइश को खत्म करना है।

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जब प्रश्न रटकर सीखने के बजाय सोचने की क्षमता को परखते हैं, तो पेपर लीक होने और नकल की कोई गुंजाइश नहीं रहती।” शिक्षा मंत्री ने कहा, “छात्र हमारा भविष्य हैं। हमारे हर फ़ैसले से उन्हें निष्पक्षता, आत्मविश्वास और विश्व-स्तरीय मानक मिलने चाहिए। मुख्यमंत्री मान के नेतृत्व वाली सरकार ने अपनी नीतियों में छात्रों को प्राथमिकता दी है। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड अब लॉटरी या रैंडम तरीके से परीक्षा लेने की लंबे समय से चली आ रही परंपरा को चरणबद्ध तरीके से खत्म करेगा और हर परीक्षा को पारदर्शी, निष्पक्ष और छात्र-अनुकूल बनाएगा।”

बोर्ड के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह ने भरोसा दिलाया कि छात्रों से मिले सभी रचनात्मक सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी और अगली बोर्ड परीक्षा से पहले कॉमन रैंकिंग सिस्टम और नए प्रश्न-पत्र पैटर्न के बारे में गाइडलाइंस जारी की जाएंगी।

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