Saturday, August 29, 2026
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रोहतक में पुलिस के अभियान को ठेंगा : ‘शाम ढली, जाम चढ़ा और सड़क पर खतरों का सफर शुरू’

कविता. रोहतक : दिनभर ट्रैफिक नियमों की बातें और शाम होते ही सड़क पर शुरू हो जाता है ‘नशे में ड्राइविंग’ का खेल। पुलिस ड्रिंक एंड ड्राइव के खिलाफ अभियान चला रही है, चालकों की जांच हो रही है, लेकिन कुछ लोग हैं कि मानने को तैयार ही नहीं। शराब का नशा चढ़ा और गाड़ी की रफ्तार सड़क पर उतर गई। फिर न आगे का होश, न पीछे का। एक छोटी सी लापरवाही कब बड़े हादसे में बदल जाए, इसका डर हर रात शहर की सड़कों पर बना रहता है।

कुछ दिन पहले पुरानी आईटीआई के पास पुल पर शराब के नशे में पिकअप चालक ने एक गाड़ी को टक्कर मार दी। हादसे में कई लोग घायल हुए। यह घटना बताती है कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद नशे में वाहन चलाने वालों पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रही। शाम से शुरू होने वाला यह सिलसिला रात गहराने के साथ और बेखौफ नजर आता है।

शहर में शाम के बाद सड़कों पर वाहनों की आवाजाही कम नहीं होती, लेकिन इसी समय शराब पीकर वाहन चलाने वालों का खतरा बढ़ जाता है। पार्टी, ठेके या अन्य जगहों से निकलने के बाद कुछ चालक नशे की हालत में सीधे स्टेयरिंग संभाल लेते हैं। नशे में नजर धुंधली हो सकती है, लेकिन सड़क पर खतरा बिल्कुल साफ होता है। ऐसे चालक अचानक ब्रेक लगाने, गलत दिशा में जाने या दूसरे वाहन से टकराने जैसी स्थिति पैदा कर सकते हैं।

पुरानी आईटीआई पुल पर एक झटके में मचा हड़कंप

कुछ दिन पहले पुरानी आईटीआई के पास पुल पर पिकअप चालक ने एक गाड़ी को टक्कर मार दी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कई लोग घायल हो गए। बताया गया कि पिकअप चालक शराब के नशे में था। एक चालक का नशा कई परिवारों पर भारी पड़ सकता है, यह घटना इसका ताजा उदाहरण है। सवाल यही है कि जब शराब के नशे में चालक सड़क पर उतरता है तो उसके सामने आने वाला अगला वाहन खुद को कितना सुरक्षित समझे।

पुलिस की चेकिंग इधर, नशे की सवारी उधर

रोहतक पुलिस ने ड्रिंक एंड ड्राइव के खिलाफ अभियान चला रखा है। जगह-जगह जांच और कार्रवाई का मकसद यही है कि शराब पीकर कोई वाहन लेकर सड़क पर न निकले। बावजूद इसके कुछ चालक पुलिस की इस मुहिम को जैसे ‘ठेंगा’ दिखाकर निकलने की कोशिश करते हैं। कार्रवाई का डर खत्म होते ही कई लोग फिर वही गलती दोहराने लगते हैं। यही वजह है कि अभियान के साथ-साथ लगातार निगरानी और सख्ती की जरूरत महसूस हो रही है।

रात गहराई तो सड़क पर बढ़ने लगता है रिस्क

शाम के समय शुरू होने वाला खतरा रात बढ़ने के साथ और गंभीर हो सकता है। सड़क पर रोशनी कम, सामने से आती तेज हेडलाइट और ऊपर से नशे में वाहन—तीनों मिल जाएं तो हादसे की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे चालक अपनी ही नहीं, सड़क पर चल रहे हर दूसरे व्यक्ति की जान जोखिम में डाल देते हैं। दोपहिया वाहन सवार और पैदल चलने वाले ऐसे वाहनों के सामने खास तौर पर असुरक्षित रहते हैं।

एक पैग का नशा, किसी की जिंदगी पर भारी न पड़ जाए

ड्रिंक एंड ड्राइव महज ट्रैफिक नियम तोड़ना नहीं, बल्कि सड़क पर दूसरों की जिंदगी को खतरे में डालना है। पुरानी आईटीआई के पास हुआ हादसा शहरवासियों के लिए फिर चेतावनी है कि नशे में स्टेयरिंग थामने का अंजाम कितना खतरनाक हो सकता है। पुलिस अभियान चला रही है, लेकिन असली जीत तब होगी जब शराब पीने के बाद चालक खुद चाबी उठाने से इनकार करेगा। क्योंकि सड़क पर नशे में निकली एक गाड़ी सिर्फ एक वाहन नहीं होती, वह कई जिंदगियों के लिए चलता-फिरता खतरा बन जाती है।

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