रोहतक : पंडित भगवत दयाल शर्मा पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज रोहतक (PGIMS Rohtak) के एनाटॉमी विभाग ने शैक्षणिक एवं शोध उत्कृष्टता का परिचय देते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर संस्थान का नाम रोशन किया है।
जयपुर में 2 से 4 अप्रैल 2026 तक आयोजित सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल एनाटॉमिस्ट्स के 14वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विभाग ने दो बेस्ट पेपर प्रेजेंटेशन पुरस्कार जीतकर अपनी शोध-निष्ठ प्रतिबद्धता सिद्ध की। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में 900 से अधिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों ने सहभागिता की, जो इसकी व्यापक शैक्षणिक महत्ता को दर्शाता है।
डॉ एच के अग्रवाल ने बताया कि सम्मेलन के दौरान “एनाटॉमी में करियर का भविष्य” विषय पर आयोजित विशेष पैनल डिस्कशन में डॉ. आरती को विशिष्ट पैनलिस्ट के रूप में आमंत्रित किया गया। डॉ. आरती को यह सम्मान एनाटॉमी शिक्षण में नवाचार, वर्चुअल डिसेक्शन तकनीक और यूजी-पीजी पाठ्यक्रम में क्लिनिकल कोरिलेशन को एकीकृत करने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया। उन्होंने पैनल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एनाटॉमी टीचिंग मॉड्यूल, आधुनिक चिकित्सा शिक्षा में एनाटॉमी के बदलते स्वरूप, उभरते करियर अवसरों और एनएएमसी के नए सीबीएमई करिकुलम पर सारगर्भित विचार रखे, जिसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने सराहा।
शोध क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए, डॉ. कमल सिंह एवं डॉ. सुमन यादव को बेस्ट ओरल/पोस्टर प्रेजेंटेशन के प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया। डॉ. कमल सिंह का शोध “इमेज-आधारित MCQ एवं पारंपरिक MCQ के माध्यम से एनाटॉमी में फॉर्मेटिव असेसमेंट की प्रभावशीलता एवं छात्र दृष्टिकोण” पर केंद्रित रहा, जिसमें आधुनिक मूल्यांकन पद्धतियों की उपयोगिता को रेखांकित किया गया। वहीं, डॉ. सुमन यादव का शोध “मेडिकल शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति ज्ञान, धारणा एवं नैतिक जागरूकता” पर आधारित था, जो वर्तमान समय में उभरती तकनीकी चुनौतियों एवं नैतिक पहलुओं को सामने लाता है। दोनों शोधों को उनके नवाचार, समसामयिक प्रासंगिकता एवं उच्च शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए व्यापक सराहना प्राप्त हुई।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एच के अग्रवाल ने एनाटॉमी विभाग की इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पर विभागाध्यक्ष डॉ एस के राठी सहित सभी संकाय सदस्यों को हार्दिक बधाई दी। डॉ अग्रवाल ने कहा कि एनाटॉमी विभाग ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर उच्च स्तरीय शोध और अकादमिक विमर्श के माध्यम से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक साख को नई ऊंचाई दी है। यह उपलब्धि हमारे संस्थान की अनुसंधान-उन्मुख संस्कृति और शिक्षण उत्कृष्टता का प्रमाण है। जब हमारे शिक्षक वैश्विक मंचों पर विशेषज्ञ पैनलिस्ट के रूप में आमंत्रित होते हैं और बेस्ट पेपर अवार्ड जीतते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि पीजीआईएमएस में विश्वस्तरीय अकादमिक कार्य हो रहा है।
डॉ एच के अग्रवाल ने आगे कहा कि मजबूत एनाटॉमी ज्ञान ही एक कुशल चिकित्सक की नींव है। इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हमारे संकाय को नवीनतम शिक्षण पद्धतियों और शोध प्रवृत्तियों से जोड़ते हैं, जिसका सीधा लाभ एमबीबीएस और पीजी छात्रों को मिलता है। एनाटॉमी विभाग की यह सफलता पूरे संस्थान के लिए प्रेरणादायी है।
निदेशक डॉ एस के सिंघल ने विभागाध्यक्ष डॉ एस के राठी को बधाई देते हुए कहा कि क्लिनिकल एनाटॉमी आज के समय में पर्सनलाइज्ड मेडिसिन और मिनिमल इनवेसिव सर्जरी का आधार बन चुकी है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिला यह सम्मान बताता है कि हमारा एनाटॉमी विभाग केवल कैडेवरिक टीचिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्रांसलेशनल रिसर्च में भी अग्रणी है।
कुलसचिव डॉ रूप सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन का निरंतर प्रयास है कि सभी विभाग शोध और अकादमिक नवाचार को प्राथमिकता दें। एनाटॉमी विभाग ने यह सिद्ध किया है कि समर्पित टीम वर्क और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की जा सकती है। बेस्ट पेपर अवार्ड केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि हमारे शोध की गुणवत्ता पर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मुहर है। इससे पीजीआईएमएस से प्रकाशित होने वाले शोध पत्रों की स्वीकार्यता और बढ़ेगी।
डॉ रूप सिंह ने डॉ आरती द्वारा पैनल डिस्कशन में दिए गए योगदान को भी रेखांकित किया और कहा कि एनाटॉमी में करियर की संभावनाओं पर राष्ट्रीय नीति-निर्माण में ऐसे विमर्श की अहम भूमिका होती है।
विभागाध्यक्ष डॉ एस के राठी ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि विभाग का लक्ष्य एनाटॉमी को केवल बेसिक साइंस नहीं, बल्कि क्लिनिकल प्रैक्टिस से जोड़कर पढ़ाना है। तीन दिवसीय सम्मेलन में वर्चुअल एनाटॉमी, 3डी प्रिंटिंग, रेडियोलॉजिकल एनाटॉमी और सर्जिकल एनाटॉमी पर केंद्रित कार्यशालाएं भी आयोजित हुईं, जिनमें पीजीआईएमएस के प्रतिनिधिमंडल ने सक्रिय सहभागिता की।

