- माता-पिता के बैंक खाते हो रहे खाली
कविता. रोहतक
स्मार्टफोन आज बच्चों के मनोरंजन और पढ़ाई का साधन होने के साथ-साथ साइबर ठगी का सबसे बड़ा माध्यम भी बनता जा रहा है। ऑनलाइन गेम की लत बच्चों की दिनचर्या बिगाड़ रही है तो दूसरी ओर गेम में कॉइन, डायमंड, स्किन, लेवल अप और रिवॉर्ड के लालच में बच्चे अनजाने में माता-पिता के मोबाइल से हजारों से लेकर लाखों रुपये तक ट्रांसफर कर रहे हैं।
साइबर अपराधी गेमिंग प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और फर्जी लिंक के जरिए बच्चों को निशाना बना रहे हैं। कई मामलों में बच्चों को मुफ्त रिचार्ज, गेमिंग आइटम या प्रतियोगिता जीतने का झांसा देकर बैंक खाते और यूपीआई से रकम निकलवा ली जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते अभिभावक सतर्क नहीं हुए तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
इन प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा सक्रिय हैं बच्चे
सबसे अधिक बच्चे मोबाइल गेमिंग प्लेटफॉर्म पर समय बिता रहे हैं। इनमें Free Fire MAX, BGMI (Battlegrounds Mobile India), Roblox, Minecraft, Stumble Guys, Ludo King, Subway Surfers, Clash of Clans, Call of Duty Mobile जैसे गेम प्रमुख हैं। इसके अलावा YouTube, Discord, Telegram, Instagram और WhatsApp के जरिए भी गेमिंग लिंक, फर्जी ऑफर और हैक टूल्स भेजकर बच्चों को ठगी का शिकार बनाया जाता है। कई गेम्स में इन-ऐप खरीदारी और थर्ड पार्टी वेबसाइटों के लिंक भी जोखिम बढ़ाते हैं।
ऐसे होती है ऑनलाइन गेम के नाम पर ठगी
साइबर ठग बच्चों को मुफ्त डायमंड, यूसी, गेम पास, रिवॉर्ड या टूर्नामेंट एंट्री का लालच देते हैं। इसके लिए लिंक भेजा जाता है या कोई ऐप डाउनलोड कराई जाती है। कई बार ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंक डिटेल मांगी जाती है। कुछ मामलों में माता-पिता के फोन में सेव बैंकिंग ऐप से भुगतान करा दिया जाता है। स्क्रीन शेयरिंग ऐप या रिमोट एक्सेस के जरिए भी खाते खाली करने के मामले सामने आ चुके हैं।
बच्चों को कैसे सुरक्षित रखें
विशेषज्ञों के अनुसार छोटे बच्चों को बिना निगरानी स्मार्टफोन नहीं देना चाहिए। मोबाइल में पैरेंटल कंट्रोल सक्रिय रखें और बैंकिंग ऐप तथा यूपीआई पर मजबूत पासवर्ड लगाएं। गूगल प्ले या ऐप स्टोर पर खरीदारी के लिए पासवर्ड अनिवार्य करें। बच्चों को समझाएं कि किसी भी लिंक पर क्लिक न करें और किसी अनजान व्यक्ति से गेमिंग चैट में बात न करें। स्क्रीन टाइम तय करें और आउटडोर खेलों के लिए प्रेरित करें ताकि गेम की लत कम हो।
अभिभावक रखें इन बातों का विशेष ध्यान
यदि बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव आए, पढ़ाई में रुचि कम हो जाए, देर रात तक मोबाइल चलाने लगे या बार-बार पैसे की मांग करे तो सतर्क हो जाएं। बैंक खाते और यूपीआई ट्रांजैक्शन नियमित जांचें। मोबाइल में आने वाले एसएमएस और बैंक अलर्ट नजरअंदाज न करें। बच्चों को यह जरूर बताएं कि कोई भी ओटीपी, पिन या बैंक संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी है।
ठगी होने पर क्या करें
यदि ऑनलाइन गेम के माध्यम से ठगी हो जाए तो तुरंत बैंक को सूचना देकर लेनदेन रोकने का प्रयास करें। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर भी शिकायत करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, रकम वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक रहती है। मोबाइल से संबंधित सभी स्क्रीनशॉट और ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
स्मार्टफोन बना साइबर अपराधियों का सबसे आसान हथियार
पहले साइबर ठगी मुख्य रूप से फर्जी कॉल और ईमेल तक सीमित थी, लेकिन अब स्मार्टफोन ही सबसे बड़ा निशाना बन गया है। बैंकिंग, यूपीआई, सोशल मीडिया, गेमिंग और ओटीटी जैसे कई ऐप एक ही मोबाइल में होने के कारण अपराधियों के लिए बच्चों के जरिए परिवार तक पहुंचना आसान हो गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि तकनीक पर रोक समाधान नहीं है, बल्कि डिजिटल साक्षरता, अभिभावकों की निगरानी और समय पर जागरूकता ही बच्चों और परिवारों को इस बढ़ते खतरे से बचा सकती है।


