Monday, June 15, 2026
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एक क्लिक की चूक और खाली हो रहे अकाउंट

साइबर ठगों के रडार पर बुजुर्ग, ग्रामीण और पूर्व सैनिक
एक साल में 700 से ज्यादा मामले सामने आए

रोहतक: साइबर अपराधियों का जाल अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। गांवों की चौपाल से लेकर शहरों की कॉलोनियों तक ठग ऐसे लोगों को निशाना बना रहे हैं, जिन्हें तकनीक की कम जानकारी है। सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों, पूर्व सैनिकों और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों पर मंडरा रहा है। रोहतक में एक साल के दौरान 700 से ज्यादा ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। बैंक अधिकारी, रिश्तेदार या सरकारी कर्मचारी बनकर आने वाली एक कॉल कई बार वर्षों की जमा-पूंजी पर भारी पड़ रही है। जिले में लगातार बढ़ रही शिकायतों ने पुलिस और साइबर विशेषज्ञों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।

भरोसे की डोर पकड़कर खाते तक पहुंच रहे अपराधी

साइबर ठग अब डराने या लालच देने की बजाय लोगों का भरोसा जीतने की रणनीति अपना रहे हैं। कभी बैंक खाते को बंद होने का डर दिखाया जाता है तो कभी पेंशन, सब्सिडी या केवाईसी अपडेट का बहाना बनाया जाता है। बातचीत इतनी सहज और पेशेवर होती है कि सामने वाला व्यक्ति खुद ही अपनी गोपनीय जानकारी साझा कर देता है। कुछ ही मिनटों में खाते से रकम गायब हो जाती है और पीड़ित को ठगी का एहसास तब होता है जब मोबाइल पर निकासी का संदेश आता है।

पूर्व सैनिक बन रहे आसान निशाना

सेना से सेवानिवृत्त हुए कई लोग डिजिटल बैंकिंग की जटिलताओं से पूरी तरह परिचित नहीं होते। ठग इसी कमजोरी का फायदा उठाते हैं। पेंशन, मेडिकल सुविधा या रक्षा मंत्रालय से जुड़ी किसी योजना का हवाला देकर उन्हें फोन किया जाता है। कई मामलों में खुद को सरकारी अधिकारी बताकर दस्तावेज अपडेट कराने की बात कही जाती है और फिर बैंकिंग जानकारी हासिल कर ली जाती है। सम्मान और विश्वास की भावना का गलत इस्तेमाल करके अपराधी उन्हें जाल में फंसा लेते हैं।

गांवों में बढ़ा खतरा, जागरूकता की कमी बन रही वजह

ग्रामीण इलाकों में ऑनलाइन लेन-देन तेजी से बढ़ा है, लेकिन उसके अनुरूप जागरूकता नहीं बढ़ पाई। कई लोग आज भी एटीएम, यूपीआई और मोबाइल बैंकिंग के सुरक्षा नियमों से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। साइबर अपराधी खुद को बैंक कर्मचारी बताकर फोन करते हैं और खाते की जानकारी मांग लेते हैं। कई बार ग्रामीण लोग मदद समझकर ओटीपी या पिन साझा कर देते हैं, जिसका परिणाम सीधे बैंक खाते से रकम उड़ने के रूप में सामने आता है।

एप डाउनलोड करवाकर मोबाइल पर कर लेते हैं कब्जा

साइबर अपराधियों का नया हथियार फर्जी मोबाइल एप बन चुके हैं। किसी समस्या के समाधान या बैंकिंग सहायता के नाम पर लोगों को एक लिंक भेजा जाता है। जैसे ही व्यक्ति एप डाउनलोड करता है, ठग मोबाइल की महत्वपूर्ण जानकारियों तक पहुंच बना लेते हैं। कई मामलों में स्क्रीन शेयरिंग एप के जरिए पूरा मोबाइल उनके नियंत्रण में पहुंच जाता है। इसके बाद बैंक खाते, यूपीआई और अन्य वित्तीय जानकारियां सुरक्षित नहीं रह जातीं।

पुलिस की चेतावनी: एक ओटीपी आपकी मेहनत पर फेर सकता है पानी

साइबर थाना पुलिस लगातार लोगों को जागरूक कर रही है कि कोई भी बैंक, सरकारी विभाग या वित्तीय संस्था फोन पर ओटीपी, एटीएम पिन, सीवीवी नंबर या पासवर्ड नहीं मांगती। यदि कोई व्यक्ति ऐसी जानकारी मांग रहा है तो उसे तुरंत संदिग्ध मानना चाहिए। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने और अज्ञात एप डाउनलोड करने से बचना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

समय रहते सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराध से बचने का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता है। जितनी तेजी से डिजिटल सुविधाएं बढ़ रही हैं, उतनी ही तेजी से अपराधी नए-नए तरीके भी खोज रहे हैं। ऐसे में परिवारों को अपने बुजुर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले रिश्तेदारों को समय-समय पर साइबर सुरक्षा के बारे में जानकारी देनी चाहिए। एक छोटी सी सावधानी न सिर्फ बैंक खाते को सुरक्षित रख सकती है, बल्कि जीवनभर की कमाई को भी बचा सकती है।

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