कविता.रोहतक
रोहतक शहर में कानून व्यवस्था को लेकर लोगों की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं। पुलिस अपराध नियंत्रण के लिए लगातार अभियान चला रही है, लेकिन शहर के कई हिस्सों में रात के समय पुलिस की मौजूदगी और नियमित गश्त बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
खासकर कॉलोनियों, बाजारों और सुनसान सड़कों पर लोगों का कहना है कि पुलिस की सक्रिय उपस्थिति अपराध की संभावनाओं को काफी हद तक कम कर सकती है। पिछले दिनों गांधी कैंप क्षेत्र में देर रात खड़े कई वाहनों के शीशे और अन्य हिस्सों में तोड़फोड़ की घटना ने लोगों को चिंता में डाल दिया था। घटना के बाद पुलिस ने इलाके में पेट्रोलिंग बढ़ाई और लगातार गश्त भी शुरू की, जिससे स्थानीय लोगों में कुछ हद तक भरोसा लौटा।
हालांकि शहरवासियों का कहना है कि ऐसी व्यवस्था केवल घटना के बाद ही नहीं, बल्कि नियमित रूप से पूरे शहर में बनी रहनी चाहिए। व्यापारिक क्षेत्रों में दिनभर भीड़ रहती है, जबकि रात होते ही कई स्थान अपेक्षाकृत सुनसान हो जाते हैं। ऐसे इलाकों में असामाजिक तत्व सक्रिय होने की आशंका बनी रहती है। लोगों का मानना है कि यदि पुलिस की मोबाइल टीमें तय समय पर नियमित गश्त करें और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई जाए तो चोरी, वाहन तोड़फोड़ और लूट जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर में सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार, डायल-112 की त्वरित प्रतिक्रिया और बीट सिस्टम को और प्रभावी बनाया जाए। इसके अलावा बाजार बंद होने के बाद पुलिस की विशेष रात्रि गश्त शुरू करने से सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी।
पिछले दिनों गांधी कैंप क्षेत्र में रात के समय खड़े वाहनों में तोड़फोड़ की गई थी। घटना के बाद पुलिस ने इलाके में पेट्रोलिंग बढ़ाई और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे स्थिति में सुधार आया है, लेकिन ऐसी निगरानी अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी जरूरी है।
बाजार बंद होने के बाद बढ़ता है जोखिम
व्यापारियों का कहना है कि बाजार बंद होने के बाद कई जगह पुलिस की मौजूदगी कम दिखाई देती है। ऐसे समय में नियमित गश्त से चोरी और तोड़फोड़ जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
सीसीटीवी और बीट सिस्टम बने मजबूत हथियार
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमुख चौकों, कॉलोनियों और पार्किंग स्थलों पर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे तथा सक्रिय बीट पुलिसिंग अपराधियों पर निगरानी रखने में प्रभावी साबित हो सकती है।
स्थानीय लोगों की ये हैं प्रमुख मांगें
- हर संवेदनशील इलाके में नियमित रात्रि गश्त।
- पुलिस रिस्पांस टाइम और कम किया जाए।
- कॉलोनियों में बीट कांस्टेबल की नियमित विजिट।
- सार्वजनिक स्थानों पर खराब स्ट्रीट लाइट तुरंत ठीक हों।
- पुलिस और आरडब्ल्यूए के बीच समन्वय बढ़ाया जाए।
अपराध रोकथाम पर हो अधिक फोकस
शहरवासियों का कहना है कि पुलिस अपराध होने के बाद कार्रवाई करती है, लेकिन यदि रोकथाम पर और अधिक ध्यान दिया जाए तो घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। नियमित गश्त, संदिग्ध व्यक्तियों की जांच, तकनीकी निगरानी और नागरिकों की भागीदारी से शहर में सुरक्षा का माहौल और बेहतर बनाया जा सकता है।


