- रोहतक में कई नर्सरियां बिना लाइसेंस के चला रहीं पौधों की बिक्री
- फलीय पौधों की नर्सरी के लिए एक एकड़ और अन्य के लिए 1000 वर्ग मीटर जमीन जरूरी
कविता.रोहतक: अब बागवानी पौधों की नर्सरी चलाना इतना आसान नहीं होगा। बिना लाइसेंस पौधे बेचने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार के नए नियमों के तहत नर्सरी संचालकों को पांच साल का लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए जमीन से लेकर प्रशिक्षण और पौधों की गुणवत्ता तक के मानक तय कर दिए गए हैं। रोहतक में स्थिति यह है कि 27 नर्सरियों में से केवल दो के पास लाइसेंस है, जबकि 25 नर्सरियां बिना लाइसेंस के पौधे बेच रही हैं। नए नियम लागू होने के बाद नर्सरी संचालकों को निर्धारित शर्तें पूरी करनी होंगी। वहीं, किसानों को भी अब पौधे खरीदते समय नर्सरी का लाइसेंस और पौधों की किस्म की जांच करनी होगी।
रोहतक में बागवानी पौधों की बिक्री करने वाली नर्सरियों के सामने अब लाइसेंस लेने की चुनौती है। जिले में 27 नर्सरियों में से केवल दो के पास लाइसेंस होने की जानकारी सामने आई है। बाकी 25 नर्सरियां बिना लाइसेंस के पौधे बेच रही हैं। राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित हरियाणा बागवानी पौधशाला अधिनियम-2025 और इसके तहत बनाए गए नियम-2026 को लागू करने के लिए बागवानी विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। नए प्रावधानों के तहत निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले नर्सरी संचालकों को पांच साल के लिए लाइसेंस जारी किया जाएगा। लाइसेंस नर्सरी में बिक्री या प्रवर्धन के लिए प्रस्तावित पौधों और पौध सामग्री की श्रेणी के आधार पर मिलेगा।
नर्सरी के लिए जमीन का हिसाब तय
नए नियमों में नर्सरी के लिए जमीन की न्यूनतम सीमा निर्धारित की गई है। फलीय पौधों की नर्सरी चलाने के लिए कम से कम एक एकड़ जमीन जरूरी होगी, जबकि अन्य बागवानी पौधों की नर्सरी के लिए न्यूनतम 1000 वर्ग मीटर भूमि होनी चाहिए। फलीय पौधों की नर्सरी के लिए जमीन संचालक के स्वामित्व में होनी चाहिए या कम से कम 10 साल की अवधि का पंजीकृत पट्टा होना जरूरी है। अन्य बागवानी पौधों की नर्सरी के लिए जमीन अपने नाम होने या कम से कम पांच साल के पंजीकृत पट्टे पर होना अनिवार्य किया गया है। फलीय पौधों की नर्सरी में संबंधित पौधों की ज्ञात वंशावली वाले कम से कम 25 मातृ पौधे भी होने चाहिए।
सिर्फ जमीन नहीं, ट्रेनिंग भी जरूरी
नर्सरी संचालकों को अब पौधों की गुणवत्ता और उत्पादन संबंधी जानकारी का प्रमाण भी देना होगा। लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले संचालक को कम से कम एक सप्ताह का प्रशिक्षण प्राप्त करने का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा। यह प्रशिक्षण विभाग के एकीकृत बागवानी विकास केंद्र, बागवानी प्रशिक्षण संस्थान, उत्कृष्टता केंद्र, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के किसी संस्थान या राज्य कृषि-बागवानी विश्वविद्यालय से लिया जा सकता है। फलीय पौधों की नर्सरी के मामले में संबंधित किस्म और उपकिस्म का स्पष्ट उल्लेख करना भी अनिवार्य होगा। लाइसेंस जारी करने या नवीनीकरण से पहले नर्सरी का निरीक्षण किया जाएगा। सक्षम प्राधिकारी स्वयं या अधिकृत अधिकारी के माध्यम से निरीक्षण करवाएगा और अधिकारी ऑनलाइन निर्धारित प्रपत्र में रिपोर्ट दर्ज करेगा।
पौधे की खरीद-बिक्री का पूरा हिसाब, हर खरीदार को देनी होगी रसीद
नए नियमों के तहत नर्सरी संचालकों को पौधों और पौध सामग्री की खरीद-बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। निरीक्षण के समय यह रिकॉर्ड सक्षम प्राधिकारी या निरीक्षण अधिकारी के सामने प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। फलीय पौधों की नर्सरी में मूलवृंत और सांकुर शाखा के स्रोत का विस्तृत ब्योरा भी रखना होगा। इसके साथ ही पौध रजिस्टरों का रखरखाव करना और प्रत्येक खरीदार को निर्धारित प्रपत्र में बिक्री रसीद देना जरूरी होगा। किसानों के लिए भी पौधे खरीदते समय सावधानी बरतना जरूरी होगा। जिला उद्यान अधिकारी ने किसानों से अपील की है कि वे केवल लाइसेंस प्राप्त नर्सरियों से ही पौधे खरीदें। पौधे लेते समय किस्म, उपकिस्म, आयु, स्रोत, मूलवृंत और लेबल पर दिए गए क्यूआर कोड की जानकारी जांचें और खरीद की रसीद सुरक्षित रखें।
ऑनलाइन होगा लाइसेंस का आवेदन
नए नियमों का उल्लंघन करने या अधिकृत अधिकारी को कार्य करने से रोकने पर एक साल तक कारावास, एक लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है। लाइसेंस देने या नवीनीकरण से इनकार करने अथवा लाइसेंस निलंबित या रद्द किए जाने के आदेश से प्रभावित व्यक्ति 45 दिनों के भीतर निर्धारित वेबसाइट पर ऑनलाइन अपील कर सकता है। इसके लिए 1000 रुपये फीस तय की गई है। नर्सरी लाइसेंस के लिए बागवानी विभाग की वेबसाइट fruitlicense.hortharyana.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। फलीय पौधों की नर्सरी के लाइसेंस के लिए 10 हजार रुपये और अन्य बागवानी पौधों के लिए 20 हजार रुपये फीस निर्धारित की गई है। नवीनीकरण के लिए फलीय पौधों की नर्सरी पर 10 हजार और अन्य पौधों की नर्सरी पर 5 हजार रुपये फीस लगेगी। लाइसेंस समाप्त होने के बाद आवेदन करने पर 2 हजार रुपये लेट फीस देनी होगी।

