Monday, October 26, 2026
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रोहतक में ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ पर लगाम नहीं, पैग के बाद स्टेयरिंग थाम रहे चालक

कविता. रोहतक : शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों पर रोक लगाने के पुलिस के दावे के बीच सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शाम ढलते ही शराब के पैग के साथ स्टेयरिंग थामने का सिलसिला जारी है। कुछ लोग गाड़ी चलाते हुए शराब पीते हैं तो कुछ के लिए कार ही चलता-फिरता मयखाना बन जाती है। नशे में लड़खड़ाती ड्राइविंग का नतीजा कई बार सड़क हादसों के रूप में सामने आता है। रविवार देर रात जाट भवन के पास ऐसा ही एक हादसा सामने आया, जहां नशे में धुत कार चालक ने मां-बेटी को टक्कर मार दी। हादसे में महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है। इस घटना ने सवाल खड़ा कर दिया है कि जब पुलिस ड्रिंक एंड ड्राइव के खिलाफ विशेष अभियान चलाने का दावा कर रही है, तो फिर सड़कों पर नशे में वाहन दौड़ाने वालों पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग पा रही।

पैग खत्म होते ही स्टेयरिंग पर हाथ, खतरे में दूसरों की जान

शराब पीने के बाद वाहन चलाना सिर्फ चालक की जान के लिए खतरा नहीं है, बल्कि सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों की जिंदगी भी दांव पर लगा देता है। नशे में प्रतिक्रिया देने की क्षमता प्रभावित होती है। अचानक सामने आए वाहन, सड़क पार करते पैदल यात्री या मोड़ पर सामने आने वाली बाधा को देखकर चालक समय पर फैसला नहीं ले पाता। ऐसे में एक छोटी-सी चूक भी गंभीर हादसे में बदल सकती है। इसके बावजूद शराब पीकर वाहन चलाने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह अंकुश लगता नजर नहीं आ रहा।

कार के अंदर जाम, सड़क पर दौड़ती गाड़ी

ड्रिंक एंड ड्राइव का खतरा केवल शराब पीकर गाड़ी चलाने तक सीमित नहीं है। कई बार कार के भीतर ही शराब पीने का सिलसिला चलता रहता है और वाहन सड़क पर दौड़ता रहता है। चलती गाड़ी में जाम छलकाने वाले चालक अपने साथ सड़क पर मौजूद दूसरे लोगों को भी जोखिम में डालते हैं। ऐसी लापरवाही में वाहन पर नियंत्रण खोने, गलत दिशा में जाने या दूसरे वाहन से टकराने का खतरा बढ़ जाता है। सवाल यह है कि सड़कों पर इस तरह की गतिविधियों की निगरानी कितनी प्रभावी है और नियम तोड़ने वालों तक पुलिस की कार्रवाई कितनी जल्दी पहुंचती है।

जाट भवन के पास हादसे ने खड़े किए सवाल

रविवार अल सुबह जाट भवन के पास नशे में धुत कार चालक ने मां-बेटी को टक्कर मार दी। हादसे में महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है। यह घटना शराब पीकर वाहन चलाने के खतरे को एक बार फिर सामने लाती है। सड़क पर निकलने वाला हर व्यक्ति यह उम्मीद करता है कि दूसरे वाहन चालक भी नियमों का पालन करेंगे, लेकिन नशे में वाहन चलाने वाला चालक दूसरों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल देता है। हादसे के मामले में चालक की स्थिति, पुलिस की कार्रवाई और अन्य तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि के आधार पर ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

विशेष अभियान का दावा, फिर भी कैसे नहीं थम रही लापरवाही

पुलिस का दावा है कि ड्रिंक एंड ड्राइव पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे अभियानों के तहत शराब पीकर वाहन चलाने वालों की जांच और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। इसके बावजूद हादसे सामने आना अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। क्या जांच प्रमुख चौराहों और नाकों तक सीमित है, क्या देर रात भी नियमित निगरानी हो रही है और क्या नियम तोड़ने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है? इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच, चालान और कार्रवाई के आंकड़ों से सामने आ सकते हैं।

हादसों के बाद कार्रवाई या पहले ही रोकथाम

ड्रिंक एंड ड्राइव के मामलों में केवल चालान काटना ही पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि उन समय और स्थानों पर भी निगरानी रखी जाए, जहां शराब पीकर वाहन चलाने का खतरा अधिक हो सकता है। देर शाम और रात के समय नियमित जांच, संदिग्ध चालकों की ब्रीथ एनालाइजर से जांच और नियम तोड़ने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई इस समस्या पर अंकुश लगाने में मदद कर सकती है। साथ ही, पुलिस को अपने अभियान के परिणामों को भी सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि कितने वाहन चालकों की जांच हुई और कितने लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई। जाट भवन के पास मां-बेटी के साथ हुआ हादसा यही सवाल छोड़ता है कि कार्रवाई का असर सड़कों पर कब दिखाई देगा और नशे में वाहन चलाने वालों की लापरवाही पर रोक कब लगेगी।

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