- एक्सपायरी और पैकिंग डेट जांचे बिना न खरीदें आटा
- खराब कुट्टू के सेवन से हो सकती है फूड पॉइजनिंग
कविता.रोहतक : नवरात्र में व्रत रखने वाले हैं तो फलाहार की थाली में कुट्टू की पूड़ी और पकौड़े परोसने से पहले जरा सावधान हो जाइए। जिस कुट्टू के आटे को आप व्रत का सबसे भरोसेमंद भोजन मानकर खा रहे हैं, वही लापरवाही बरतने पर सेहत बिगाड़ सकता है। पुराना, नमी के संपर्क में आया या अनुचित तरीके से रखा गया आटा पेट दर्द, उल्टी-दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी परेशानियों की वजह बन सकता है। ऐसे में व्रत के दौरान सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि आटा कुट्टू का ही है, बल्कि उसकी ताजगी, पैकिंग, भंडारण और गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है। हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने भी संबंधित अधिकारियों को कुट्टू के आटे की निगरानी रखने और गड़बड़ी मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
ताजा आटा खरीदें, पैकिंग की तारीख जरूर जांचें
नवरात्र के दौरान कुट्टू के आटे की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में आटा खरीदते समय जल्दबाजी करने के बजाय उसकी पैकिंग और गुणवत्ता की जांच करें। पैक्ड आटा लेते समय निर्माण तिथि, उपयोग की अंतिम तिथि और पैकेट पर दिए गए भंडारण संबंधी निर्देश जरूर पढ़ें। खुला आटा खरीद रहे हैं तो दुकानदार से उसकी पिसाई की तारीख और स्रोत के बारे में पूछें। जरूरत के अनुसार कम मात्रा में आटा खरीदना बेहतर है, ताकि उसे लंबे समय तक रखकर इस्तेमाल न करना पड़े। ध्यान रखें कि एक महीने तक रखा आटा अपने आप खराब हो जाए, ऐसा जरूरी नहीं है। उसकी गुणवत्ता इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसे किस तरह रखा गया है।
रंग, गंध और बनावट से पहचानें गड़बड़ी
कुट्टू का आटा खरीदते समय उसके रंग, गंध और बनावट पर ध्यान देना जरूरी है। आटे में सीलन जैसी गंध, फफूंद, कीड़े, जाले, असामान्य गांठें या रंग में स्पष्ट बदलाव दिखाई दे तो उसका इस्तेमाल न करें। नमी के कारण आटे में गांठें पड़ सकती हैं और उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। हालांकि केवल रंग या गंध सामान्य होने से आटे के पूरी तरह सुरक्षित होने की गारंटी नहीं मिलती। इसलिए संदिग्ध आटे को चखकर जांचने के बजाय उसे इस्तेमाल करने से बचें।
नमी और गर्मी से बचाकर रखें आटा
कुट्टू के आटे की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उसका सही तरीके से भंडारण करना भी जरूरी है। आटे को साफ, सूखे और हवा व नमी से सुरक्षित, अच्छी तरह बंद डिब्बे में रखें। इसे चूल्हे, सिंक या ऐसी जगह के पास न रखें जहां भाप अथवा पानी के छींटे पड़ते हों। गीले चम्मच या हाथ से आटा निकालने से बचें। यदि आटे में नमी, फफूंद या खराब होने के संकेत दिखाई दें तो उसे फेंक दें। पुराने आटे में नया आटा मिलाकर इस्तेमाल करना भी उचित नहीं है, क्योंकि इससे खराब आटे की गड़बड़ी पहचानना मुश्किल हो सकता है।
विभाग की निगरानी, गड़बड़ी पर होगी कार्रवाई
नवरात्र के दौरान कुट्टू के आटे की बढ़ती मांग को देखते हुए इसकी गुणवत्ता पर निगरानी जरूरी है। हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने अधिकारियों को कुट्टू के आटे की जांच और निगरानी रखने तथा किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी है कि बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमानुसार जांच करे।
ये सावधानियां बरतें
- पैक्ड आटा खरीदते समय निर्माण तिथि, उपयोग की अंतिम तिथि और पैकेट की सील जांचें।
- खुला आटा लेते समय उसकी ताजगी, गुणवत्ता और पिसाई की तारीख के बारे में पूछें।
- सीलन, फफूंद, कीड़े, असामान्य गंध या रंग में बदलाव वाला आटा इस्तेमाल न करें।
- आटे को साफ, सूखे और बंद डिब्बे में नमी से दूर रखें।
- गीले हाथ या चम्मच से आटा निकालने से बचें।
- पुराना आटा नए आटे में मिलाकर इस्तेमाल न करें।
- संदिग्ध आटे को चखकर जांचने या पकाकर सुरक्षित मान लेने की गलती न करें।
- व्रत के लिए आटा और अन्य सामग्री साफ-सफाई के साथ तैयार करें।
- आटा खाने के बाद उल्टी, दस्त या तेज पेट दर्द हो तो चिकित्सक से संपर्क करें।

