हरियाणा के पलवल जिला के गांव लोहागढ़ निवासी तुलसी, पुत्र जीतराम, के लिए सरकार की पशुपालन योजना आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह लेकर आई है। तुलसी ने पशुपालन विभाग की योजना के तहत दो पशुओं के लिए ऋण लिया, जिस पर उन्हें सरकार की ओर से सब्सिडी का लाभ मिला। इस सहायता से उन्होंने पशुपालन को अपने स्वरोजगार का माध्यम बनाया।
तुलसी बताते हैं कि पशुपालन से प्राप्त दूध को बेचकर उन्हें नियमित आमदनी हो रही है। इस आय से वे अपने परिवार का खर्च चलाने के साथ-साथ बच्चों का बेहतर पालन-पोषण कर पा रहे हैं। उनके लिए पशुपालन अब केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन गया है।
सरकारी सहायता बनी आर्थिक संबल
- तुलसी का कहना है कि सरकार की ओर से मिली सब्सिडी और योजना के माध्यम से उन्हें अपना स्वयं का रोजगार स्थापित करने में काफी मदद मिली। उन्होंने बताया कि यदि उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलता तो उनके लिए पशुपालन के माध्यम से स्वरोजगार शुरू करना कठिन होता। सरकारी सहायता ने उनके परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- तुलसी आज पशुपालन के माध्यम से मेहनत कर अपने परिवार को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि सरकार की ऐसी योजनाएं ग्रामीण परिवारों को अपने पैरों पर खड़ा होने और सम्मानजनक ढंग से जीवनयापन करने का अवसर प्रदान करती हैं।तुलसी ने सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पशुपालन योजना का लाभ मिलने से उन्हें बहुत सहारा मिला है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक ऐसी योजनाओं का लाभ पहुंचे, ताकि वे भी अपना स्वरोजगार शुरू कर आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने इस योजना के लिए सरकार का बहुत-बहुत धन्यवाद किया।

