Wednesday, August 26, 2026
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हरियाणा में इन्फ्लुएंजा : स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी, खुद से एंटीबायोटिक दवाएं न लें…

हरियाणा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्य में मौसमी इन्फ्लुएंजा (फ्लू) की स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में बताते हुए नागरिकों से इससे न घबराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग राज्य भर में कड़ी निगरानी रख रहा है और सभी सरकारी व निजी अस्पतालों को समय पर जांच और इलाज के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

डॉ. मिश्रा ने लोगों को आम मौसमी फ्लू और ‘स्वाइन फ्लू’ (H1N1) के बीच का अंतर समझाते हुए स्पष्ट किया कि H1N1 अब मौसमी इन्फ्लुएंजा का ही एक हिस्सा है, जिसे नियमित स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली के तहत ट्रैक और इलाज किया जाता है। वर्ष 2009 के दौरान इस वायरस के मूल स्रोत के कारण इसे ‘स्वाइन फ्लू’ कहा गया था, लेकिन अब यह इंसानों के बीच फैलने वाले सामान्य वायरस का ही रूप ले चुका है, इसलिए इस नाम से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।

ये होते हैं लक्षण

डॉ. सुमिता मिश्रा ने इन्फ्लुएंजा के लक्षणों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह सांस से जुड़ा एक तीव्र संक्रमण है, जिसमें बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, शरीर और सिर में दर्द, ठंड लगना तथा थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कुछ मामलों में, विशेषकर बच्चों में, उल्टी और दस्त जैसी पेट की समस्याएं भी हो सकती हैं। यद्यपि अधिकांश मामलों में यह संक्रमण अपने आप ठीक हो जाता है, फिर भी उच्च जोखिम वाले समूहों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।

उन्होंने 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों, 5 वर्ष से छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और मधुमेह, उच्च रक्तचाप, सांस या दिल की बीमारियों से पीड़ित मरीजों को अधिक सावधान रहने की सलाह दी है। सांस लेने में तकलीफ, छाती में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या हालत बिगड़ने पर बिना किसी देरी के डॉक्टरी सलाह लेने का आग्रह किया गया है।

रोकथाम के उपायों पर जोर देते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि नागरिक बुनियादी सावधानियां अपनाकर इस संक्रमण से सुरक्षित रह सकते हैं। उन्होंने भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनने, साबुन और पानी या सैनिटाइज़र से बार-बार हाथ धोने, आंख, नाक और मुंह को छूने से बचने तथा खांसते या छींकते समय मुंह को रुमाल या टिश्यू से ढकने की सलाह दी है।

इसके अलावा, सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से परहेज करने, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ व पौष्टिक आहार लेने और बीमार होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखने की सिफारिश की गई है। उन्होंने यह भी सख्त चेतावनी दी कि लोग बिना डॉक्टरी सलाह के खुद से एंटीबायोटिक दवाएं न लें, क्योंकि वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता नहीं होती है। राज्य भर के अस्पतालों को पर्याप्त बेड, दवाओं और आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था के साथ सतर्क रहने के निर्देश दे दिए गए हैं।

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