Tuesday, June 16, 2026
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पीजीआईडीएस के डॉक्टरों को ऐतिहासिक सफलता : 4 साल की बच्ची के जबड़े के दोनों जोड़ों का दुर्लभ ऑपरेशन सफल

रोहतक : पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय रोहतक के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज (पीजीआईडीएस) ने चिकित्सा जगत में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। संस्थान के ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने मात्र चार वर्ष की बच्ची के जबड़े के दोनों टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट (टीएमजे) के एक साथ खिसकने की दुर्लभ बीमारी का सफल ऑपरेशन कर हरियाणा में अपनी तरह का पहला कीर्तिमान स्थापित किया है।

डेंटल कालेज के ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभागाध्यक्ष डाॅ. विरेंद्र सिंह ने बताया कि चिकित्सा साहित्य के अनुसार इतनी कम उम्र में चोट के कारण दोनों जोड़ों का एक साथ डिस्लोकेट होना बेहद दुर्लभ है और प्रदेश में अब तक इसका सफल इलाज सामने नहीं आया था।

ऐसे पहुंची बच्ची अस्पताल

डाॅ. वीरेंद्र ने बताया कि कुछ दिन पहले ट्रॉमा सेंटर में एक परिवार अपनी करीब चार साल की बेटी को लेकर बदहवास हालत में पहुंचा। परिजनों ने बताया कि घर में खेलते समय बच्ची गिर गई थी, जिसके बाद से वह अपना मुंह बंद नहीं कर पा रही थी। मुंह खुला रहने के कारण लगातार लार टपक रही थी, बच्ची न कुछ खा पा रही थी और न ही ठीक से बोल पा रही थी। दर्द के कारण बच्ची हर समय रोती रहती थी। कई जगह दिखाने के बाद जब आराम नहीं मिला तो परिजन उसे पीजीआईडीएस लेकर आए। ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग में तैनात डॉक्टरों ने तुरंत बच्ची की जांच की। क्लिनिकल जांच और सीटी स्कैन की रिपोर्ट ने डॉक्टरों को भी चैंका दिया। रिपोर्ट में सामने आया कि दुर्घटना के कारण बच्ची के जबड़े के दोनों जोड़ अपनी जगह से पूरी तरह खिसक चुके थे। इतना ही नहीं, जबड़े की हड्डी में भी फ्रैक्चर था। बच्चों में एक जोड़ का खिसकना तो कभी-कभार देखा जाता है, लेकिन दोनों जोड़ों का एक साथ डिस्लोकेट होना अत्यंत दुर्लभ स्थिति मानी जाती है।

रातों-रात बनी विशेषज्ञों की टीम

मामले की जटिलता को देखते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. वीरेंद्र सिंह ने तुरंत वरिष्ठ सर्जन डॉ. अमरीश भगोल के साथ चर्चा कर एक विशेष टीम का गठन किया। टीम में डॉ. अंकिता दहिया, डॉ. दिव्या, डॉ. आनंद मिश्रा, डॉ. शुभोदीप और डॉ. सुनेना राठी को शामिल किया गया। चुनौती सिर्फ सर्जरी की नहीं थी, बल्कि चार साल की बच्ची को सुरक्षित बेहोश करना भी बड़ी जिम्मेदारी थी। इसके लिए एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. निधि और डॉ. रितिका ने मोर्चा संभाला। पूरी तैयारी के बाद बच्ची को ऑपरेशन थियेटर ले जाया गया। जनरल एनेस्थीसिया के बाद डॉक्टरों की टीम ने लगभग तीन घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन में बड़ी सावधानी से खिसके हुए दोनों जोड़ों को उनकी मूल जगह पर स्थापित किया। साथ ही टूटी हुई जबड़े की हड्डी को भी विशेष प्लेट्स के जरिए फिक्स किया गया। ऑपरेशन के दौरान हर मिनट अहम था, क्योंकि छोटे बच्चों में जबड़े के जोड़ों के आसपास कई नाजुक नसें और रक्त वाहिकाएं होती हैं।

ऑपरेशन थियेटर में ही दिखा चमत्कार

ऑपरेशन पूरा होते ही वह पल आया जिसका सभी को इंतजार था। जैसे ही एनेस्थीसिया का असर कम हुआ, बच्ची ने अपना मुंह बंद कर लिया। पिछले कई दिनों से खुला हुआ मुंह बंद होते देख ऑपरेशन थियेटर में मौजूद पूरी टीम के चेहरों पर मुस्कान आ गई। बाहर इंतजार कर रहे परिजनों को जब यह खबर दी गई तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। बच्ची की मां ने भावुक होते हुए कहा कि हमें लगा था कि हमारी बेटी अब कभी ठीक से खा नहीं पाएगी। पीजीआई के डॉक्टर हमारे लिए भगवान बनकर आए हैं। उन्होंने हमारी बेटी को नया जीवन दिया है। हम उम्र भर इनके एहसानमंद रहेंगे।

अब पूरी तरह स्वस्थ है बच्ची

डाॅ. अमरीश ने बताया कि ऑपरेशन के बाद बच्ची को पोस्ट-ऑपरेटिव केयर डेंटल वार्ड में रखा गया, जहां उसकी लगातार निगरानी की गई। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की रिकवरी उम्मीद से भी बेहतर रही है। अब वह लिक्विड डाइट ले रही है और अगले कुछ दिनों में सामान्य खाना शुरू कर देगी। किसी भी तरह की जटिलता नहीं आई है। बच्ची को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ 

विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि बच्चों में हड्डियां लचीली होती हैं, इसलिए फ्रैक्चर कम होते हैं, लेकिन जोड़ खिसकने के मामले बेहद गंभीर होते हैं। समय पर इलाज न मिले तो जबड़ा टेढ़ा हो सकता है, चेहरे की बनावट बिगड़ सकती है और स्थायी रूप से मुंह खोलने-बंद करने में दिक्कत आ सकती है। इस बच्ची के मामले में परिजन समय पर हमारे पास आ गए, यह बहुत अच्छी बात रही। उन्होंने आम जनता से अपील की कि बच्चों के चेहरे या जबड़े पर चोट लगने के बाद यदि बच्चा मुंह बंद न कर पाए, लार टपकती रहे, ठोड़ी आगे की तरफ निकल आए या खाना खाने में असमर्थ हो तो तुरंत मैक्सिलोफेशियल सर्जन से संपर्क करें। यह टीएमजे डिस्लोकेशन का संकेत हो सकता है और पहले 24 घंटे में इलाज मिल जाए तो बिना ऑपरेशन के भी जोड़ बैठाया जा सकता है।

कुलपति ने पूरी टीम को दी बधाई

कुलपति डाॅ.एच.के. अग्रवाल ने पीजीआईडीएस की इस सफलता पर पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन साबित करता है कि संस्थान में विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। जटिल से जटिल सर्जरी के लिए अब मरीजों को बड़े निजी अस्पतालों या महानगरों की तरफ भागने की जरूरत नहीं है। डाॅ. अग्रवाल ने कहा कि यूएचएसआर का यह प्रयास प्रदेश को स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इस उपलब्धि से न केवल पीजीआईडीएस रोहतक का नाम रोशन हुआ है, बल्कि हरियाणा का नाम भी राष्ट्रीय चिकित्सा मानचित्र पर मजबूती से उभरा है।

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