Wednesday, August 19, 2026
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कूड़े से पटा रोहतक, ऊपर से बारिश की मार, लंबी चली हड़ताल तो शहर का क्या होगा

कविता.रोहतक : नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल ने शहर की सफाई व्यवस्था की पोल खोल दी है। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं और पिछले दिनों हुई जोरदार बरसात ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। कूड़ा नालों और सीवरों तक पहुंच रहा है, जिससे जलनिकासी व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

सड़कों पर गंदा पानी, कीचड़ और कचरे के बीच से निकलना लोगों के लिए मुश्किल हो गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर सफाई कर्मचारियों की हड़ताल लंबी चली और इसी बीच एक-दो तेज बारिश और हो गई तो रोहतक के हालात कितने भयावह होंगे।

कूड़े के ढेरों में तब्दील होता शहर

हड़ताल के चलते कई इलाकों में कूड़ा उठाने की व्यवस्था ठप पड़ी है। घरों और बाजारों से निकलने वाला कचरा सड़कों के किनारे जमा होता जा रहा है। दिन बीतने के साथ कूड़े के ढेर बढ़ रहे हैं और बारिश के बाद यही कचरा सड़कों पर फैलकर लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। बदबू और गंदगी के बीच लोगों का रहना मुश्किल हो रहा है।

कूड़ा नालों में पहुंचा, पानी की निकासी पर संकट

कूड़ा केवल सड़कों तक सीमित नहीं है। बारिश के पानी के साथ यह नालों और सीवरों तक पहुंच रहा है। पहले से जाम जलनिकासी व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। तेज बारिश के बाद कई जगह पानी जमा हुआ और लोगों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी। अगर समय रहते सफाई नहीं हुई तो अगली बारिश में यही कूड़ा जलभराव की बड़ी वजह बन सकता है।

एक और तेज बारिश हुई तो शहर डूबेगा

पिछली बारिश ने शहर की व्यवस्था की परीक्षा ले ली, लेकिन अब खतरा और बड़ा है। सड़क किनारे जमा कूड़ा, जाम नाले और सीवर तथा जगह-जगह जमा गंदा पानी बता रहा है कि अगली तेज बारिश आसान नहीं होगी। अगर बारिश के साथ सफाई व्यवस्था भी ठप रही तो जलभराव लंबे समय तक बना रह सकता है। सवाल है कि नगर निगम ने ऐसी स्थिति से निपटने के लिए क्या वैकल्पिक इंतजाम किए हैं।

कन्हेली रोड पर पड़ा कूड़ा।

हड़ताल लंबी चली तो क्या होगा रोहतक का

सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर सफाई कर्मचारियों की हड़ताल कुछ और दिन लंबी चली तो शहर में कूड़े का अंबार कितना बढ़ेगा। रोजाना निकलने वाला कचरा जमा होता रहेगा और बरसात उसे गलियों, सड़कों और नालों तक पहुंचाती रहेगी। इससे केवल जलभराव ही नहीं, बल्कि गंदगी और मच्छरों से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में निगम को हड़ताल के बीच वैकल्पिक सफाई व्यवस्था खड़ी करनी होगी।

निगम के दावों की बारिश में खुली पोल

बरसात के दौरान सफाई और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर नगर निगम के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अगर नाले साफ हैं और जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त है तो कूड़े के कारण जगह-जगह पानी जमा क्यों हो रहा है। हड़ताल ने व्यवस्था की निर्भरता भी सामने ला दी है। अब निगम के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का समाधान और दूसरी तरफ शहर को कूड़े व जलभराव से बचाना। क्योंकि हड़ताल जितनी लंबी चलेगी, रोहतक की मुश्किल उतनी ही बड़ी होती जाएगी।

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