कविता.रोहतक : शहर की सड़कों पर नालों के टूटे ढक्कन लोगों के लिए बड़ी परेशानी और खतरे का कारण बने हुए हैं। गोहाना रोड पर कई जगह नाले के ऊपर लगे ढक्कन टूटे पड़े हैं।
इसी तरह दिल्ली रोड पर भी नालों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सबसे ज्यादा परेशानी पैदल राहगीरों को हो रही है, क्योंकि सड़क किनारे चलते समय उन्हें हर कदम संभलकर रखना पड़ रहा है।
पानी भरते ही गायब हो जाते हैं खतरे के निशान
बरसात के दौरान जब सड़कों और नालियों के आसपास पानी जमा हो जाता है तो टूटे हुए ढक्कन दिखाई नहीं देते। ऐसे में पैदल चलने वाला व्यक्ति इसे सामान्य रास्ता समझकर आगे बढ़ सकता है और सीधे खुले नाले में गिर सकता है। पानी की गहराई और नाले की स्थिति दिखाई नहीं देने के कारण हादसा होने का खतरा और बढ़ जाता है।
गोहाना रोड पर नाले के ऊपर लगे कई ढक्कन टूटे हुए हैं। सड़क से गुजरने वाले वाहनों के साथ-साथ पैदल लोगों की आवाजाही भी यहां रहती है। टूटे ढक्कनों के कारण लोगों को नाले के किनारे से निकलने में भी दिक्कत होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन ढक्कनों को नहीं बदला गया तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
दिल्ली रोड पर भी नाले के टूटे ढक्कन लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। व्यस्त सड़क होने के कारण यहां दिनभर लोगों की आवाजाही रहती है। बरसात के समय सड़क पर पानी भरने के बाद स्थिति और गंभीर हो जाती है। ऐसे में खुले या टूटे नाले राहगीरों के लिए दिखाई न देने वाले खतरे में बदल जाते हैं।
पैदल राहगीरों के लिए सबसे बड़ा खतरा
टूटे नालों का सबसे ज्यादा खतरा पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन चालकों को है। रात के समय रोशनी कम होने पर खतरा और बढ़ जाता है। यदि कोई व्यक्ति पानी से भरी सड़क पर चलते हुए टूटे ढक्कन के ऊपर पैर रख देता है तो वह संतुलन खोकर नाले में गिर सकता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक है।
जिम्मेदार विभाग से जल्द कार्रवाई की मांग
शहर में बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या पहले ही लोगों के लिए परेशानी बनी हुई है। ऐसे में नालों के टूटे ढक्कन अतिरिक्त खतरा पैदा कर रहे हैं। जरूरत है कि संबंधित विभाग गोहाना रोड, दिल्ली रोड और अन्य संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण कर टूटे ढक्कनों को तत्काल बदले। साथ ही खुले नालों को सुरक्षित तरीके से ढकने की व्यवस्था की जाए, ताकि बरसात के दौरान कोई बड़ा हादसा न हो।


