Friday, April 4, 2025
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हरियाणा सरकार का आईआईटी मद्रास के साथ एमओयू , डेटा-संचालित सड़क सुरक्षा में मिलेगी मदत

चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार ने आईआईटी, मद्रास के साथ सहयोग बढ़ाते हुए, डेटा-संचालित सड़क सुरक्षा हस्तक्षेपों के लिए और दो साल के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

समझौते का अनावरण हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी और आईआईटी, मद्रास में सड़क सुरक्षा हेतु उत्कृष्टता केंद्र (सीओईआरएस) के प्रमुख, प्रोफेसर वेंकटेश बालासुब्रमण्यम की उपस्थिति में किया गया। यह साझेदारी दुर्घटना के आंकड़ों का अनुमान लगाने और लक्षित हस्तक्षेपों की योजना बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में पहले लॉन्च किए गए ‘संजय’ प्लेटफॉर्म जैसे उपकरणों का उपयोग करती है।

इस अवसर पर परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक खेमका, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल, परिवहन आयुक्त  दुष्मंता कुमार बेहरा और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सड़क सुरक्षा उपायों पर एक बैठक के दौरान, रस्तोगी ने सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की जान बचाने की आवश्यकता पर बल देते हुए व्यावहारिक रणनीतियां लागू करने के लिए एक कार्य समूह के गठन का आह्वान किया। उन्होंने परिवहन और स्वास्थ्य विभागों को आपातकालीन प्रतिक्रिया में सुधार के लिए विशेष रूप से राजमार्गों के पास ट्रॉमा सेंटरों को अपग्रेड करने के लिए एक विस्तृत रोडमैप विकसित करने के निर्देश दिए।

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2022 से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में कमी आई है और तेज गति से वाहन चलाना दुर्घटनाओं का प्राथमिक कारण पाया गया। इससे निपटने के लिए, सरकार प्रमुख राजमार्गों पर सीसीटीवी के माध्यम से निगरानी और ई-चालान बढ़ा रही है।

रस्तोगी ने दुर्घटना पीड़ितों को तेजी से अस्पताल स्थानांतरित करने तथा पुलिस, चिकित्सा और परिवहन विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। बैठक के दौरान चर्चा में सड़क सुरक्षा के ‘5 ई’- एजुकेशन, इंजीनियरिंग, इंफोर्समेंट, इमरजेंसी केयर और एम्पथी यानी सहानुभूति-को मृत्यु दर को कम करने के लिए महत्वपूर्ण स्तंभ बताया गया। प्रमुख रणनीतियों में व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देना, प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना और पुलिस प्रशिक्षण को बढ़ाना शामिल है।

उल्लेखनीय है कि दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर पुलिस को सूचित करने पर, सरकार ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए सात दिनों के लिए 1.5 लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की नीति लागू की है।

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