कविता. रोहतक : शहर में नगर निगम का आवारा गोवंश पकड़ने का अभियान पिछले करीब छह माह से बंद पड़ा है। इसका असर अब शहर की प्रमुख सड़कों, बाजारों और बाईपास पर साफ दिखाई देने लगा है, जहां बड़ी संख्या में गोवंश खुलेआम घूम रहे हैं।
बरसात के मौसम में खेतों में पानी भरने और हरे चारे की कमी होने के कारण गोवंश शहर की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में सड़क हादसों की आशंका भी लगातार बढ़ रही है। नगर निगम की ओर से पहले नियमित अभियान चलाकर आवारा गोवंश को पकड़कर पथरावार स्थित गौशाला में भेजा जाता था, लेकिन अब गौशाला की क्षमता पूरी होने से यह अभियान ठप हो गया है। गौशाला में पहले से ही तीन हजार से अधिक गोवंश मौजूद हैं, जिसके चलते नए गोवंश रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है।
शहर के हिसार रोड, झज्जर रोड, जींद रोड बाईपास, दिल्ली बाईपास, नया बस अड्डा और आईएमटी क्षेत्र में दिनभर गोवंश सड़क के बीच बैठे या घूमते नजर आते हैं। कई बार वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने पड़ते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द अभियान दोबारा शुरू नहीं किया गया तो बरसात के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है।
गौशाला में जगह कम, इसलिए रुका अभियान
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार पकड़े गए आवारा गोवंश को पथरावार गौशाला में रखा जाता है। वर्तमान में गौशाला अपनी क्षमता से अधिक गोवंश का भार उठा रही है। नई जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण निगम फिलहाल गोवंश पकड़ने का अभियान शुरू नहीं कर पा रहा है। स्थायी समाधान के लिए गौशाला के विस्तार पर भी विचार किया जा रहा है।
बरसात में बढ़ जाती है सड़क पर गोवंश की संख्या
मानसून के दौरान खेतों में जलभराव होने और खुले क्षेत्रों में चारे की कमी के कारण गोवंश शहर की सड़कों और बाजारों की ओर आ जाते हैं। सड़क किनारे मिलने वाले कूड़े और सब्जियों के अवशेष इनके लिए भोजन का प्रमुख स्रोत बन जाते हैं। इसी वजह से बरसात के मौसम में आवारा गोवंश की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक दिखाई देती है।
कई इलाकों में रोजाना बन रही परेशानी
हिसार रोड, झज्जर रोड, जींद रोड बाईपास, दिल्ली बाईपास, नया बस अड्डा, आईएमटी और प्रमुख बाजारों में दिनभर गोवंश घूमते रहते हैं। सुबह और शाम के व्यस्त समय में ये सड़क के बीच बैठ जाते हैं, जिससे यातायात प्रभावित होता है। दोपहिया वाहन चालकों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति अधिक जोखिम भरी मानी जा रही है।
पहले नियमित चलती थी कार्रवाई
नगर निगम समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर आवारा गोवंश को पकड़ता था। शिकायत मिलने पर टीम मौके पर पहुंचकर गोवंश को गौशाला भेजती थी, जिससे मुख्य मार्गों पर राहत रहती थी। पिछले छह माह से अभियान बंद होने के बाद शहर में आवारा गोवंश की संख्या लगातार बढ़ती नजर आ रही है और लोगों की शिकायतें भी बढ़ी हैं।
क्षमता बढ़ाने और नया शेड बनाने की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि केवल अभियान चलाना पर्याप्त नहीं होगा। पथरावार गौशाला की क्षमता बढ़ाने, नए शेड तैयार करने और अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराने की जरूरत है, ताकि भविष्य में भी पकड़े गए गोवंश के रखरखाव में दिक्कत न आए। उनका कहना है कि स्थायी व्यवस्था बनने पर ही शहर की सड़कों को आवारा गोवंश से राहत मिल सकेगी।

