- रोहतक में चरस-हेरोइन ने बढ़ाई चिंता
- नशे का नेटवर्क तोड़ना चुनौती, गलियों तक पहुंचा जहर
कविता.रोहतक : हरि सिंह कॉलोनी और करतारपुरा से चरस और हेरोइन के साथ दो युवकों नीतिश और भीम की गिरफ्तारी ने एक बार फिर रोहतक में नशे के फैलते नेटवर्क पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पुलिस ने आरोपियों को पकड़कर नशा बरामद कर लिया, लेकिन असली चुनौती उन लोगों तक पहुंचने की है जो शहर में नशे की सप्लाई की पूरी चेन चला रहे हैं। सवाल सिर्फ दो युवकों की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि उस नेटवर्क का है जो लगातार रोहतक के युवाओं तक नशा पहुंचा रहा है।
हरि सिंह कॉलोनी और करतारपुरा से चरस और हेरोइन के साथ पकड़े गए नीतिश और भीम तक पुलिस पहुंच गई, लेकिन यह कार्रवाई नशे के पूरे कारोबार की सिर्फ एक कड़ी को पकड़ने जैसी है। ऐसे मामलों में अक्सर नशे की पुड़िया लेकर घूमने वाला व्यक्ति सबसे निचले स्तर पर होता है। उसके पीछे सप्लायर, डीलर और उससे भी ऊपर बैठे लोग हो सकते हैं। इसलिए जरूरत इस बात की है कि बरामद नशे की जांच से आगे बढ़कर उसकी सप्लाई कहां से हुई और किसके जरिए शहर तक पहुंची, इसका पूरा नेटवर्क खंगाला जाए।
युवाओं को बनाया जा रहा नशे का ग्राहक
रोहतक में नशे की सबसे बड़ी चिंता यह है कि इसकी चपेट में युवा तेजी से आते जा रहे हैं। शुरुआत कई बार शौक, दोस्तों की संगत या प्रयोग के तौर पर होती है, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत जिंदगी पर भारी पड़ने लगती है। चरस और हेरोइन जैसे नशीले पदार्थ युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं। नशे का कारोबार करने वालों के लिए युवा सिर्फ ग्राहक हैं, लेकिन परिवारों के लिए यही युवा उनका भविष्य हैं। यही वजह है कि नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
चरस-हेरोइन के साथ मेडिकल नशा भी चुनौती
शहर में चिंता सिर्फ चरस और हेरोइन को लेकर नहीं है। मेडिकल नशे का इस्तेमाल भी युवाओं के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। डॉक्टर की सलाह के बिना कुछ दवाओं का गलत इस्तेमाल नशे के तौर पर किया जाता है। ऐसे मामलों में मेडिकल स्टोर, सप्लाई चेन और अवैध बिक्री की निगरानी भी बेहद जरूरी है। एक तरफ पुलिस मादक पदार्थों के साथ युवकों को पकड़ रही है, तो दूसरी तरफ यह भी देखना होगा कि नशे की दूसरी राहों से युवाओं तक पहुंच रही दवाओं पर कितनी प्रभावी रोक लग रही है।
गिरफ्तारी से आगे बढ़कर नेटवर्क तोड़ने की जरूरत
नशे के खिलाफ कार्रवाई तब ज्यादा असरदार होगी, जब पुलिस छोटे सप्लायर तक रुकने के बजाय पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचे। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में सामने आने वाली जानकारी को आगे बढ़ाकर सप्लायर, पैडलर और मुख्य संचालकों तक पहुंचना जरूरी है। नशे की सप्लाई का पैसा कहां से आता है, माल कहां से आता है और किन इलाकों में इसकी खपत ज्यादा है कि इन सभी कड़ियों को जोड़कर कार्रवाई की जाए तो नशे के कारोबार की जड़ पर चोट की जा सकती है।
सवाल सिर्फ पुलिस का नहीं, पूरे शहर का
नशे का नेटवर्क सिर्फ कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, यह समाज और आने वाली पीढ़ी का सवाल है। अगर आज एक युवक नशे की गिरफ्त में जाता है तो कल उसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है। इसलिए पुलिस की कार्रवाई के साथ अभिभावकों, शिक्षण संस्थानों और समाज को भी सतर्क रहना होगा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि नशे के साथ पकड़े जाने वाले युवकों की संख्या कब घटेगी और उन्हें नशा पहुंचाने वाले असली चेहरे कब कानून के शिकंजे में आएंगे। रोहतक को अब सिर्फ पियादे पकड़ने वाली कार्रवाई नहीं, बल्कि नशे के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने वाली मुहिम की जरूरत है।


