साइबर अपराधियों द्वारा आमजन, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर, फर्जी पुलिस एवं सरकारी अधिकारी बनकर तथा मानसिक दबाव बनाकर ठगी की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। ऐसे मामलों में ठग पीड़ित से स्वयं ही ओटीपी साझा करवा लेते हैं, जिसके कारण बैंक खातों से धोखाधड़ी हो जाती है। इन साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए हरियाणा पुलिस द्वारा ‘अभेद्य’ ऐप एवं डबल ओटीपी प्रणाली लागू की गई है, जो वरिष्ठ नागरिकों सहित आमजन के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हो रही है।
पुलिस अधीक्षक चन्द्र मोहन ने बताया कि ‘अभेद्य’ ऐप एवं डबल ओटीपी प्रणाली डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाओं में अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है। यदि कोई साइबर ठग किसी वरिष्ठ नागरिक को धमकाकर या मानसिक दबाव बनाकर लेन-देन करवाने का प्रयास करता है, तो दूसरा ओटीपी अथवा पुष्टि संदेश उसके द्वारा नामित विश्वसनीय परिजन या मित्र के पास भी जाता है। इससे परिवार के सदस्य तुरंत सतर्क हो जाते हैं और समय रहते साइबर ठगी को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली सुरक्षा, विश्वास और जागरूकता का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है।
पुलिस अधीक्षक चन्द्र मोहन ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति को फोन पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती। यदि किसी विदेशी नंबर या अज्ञात व्यक्ति द्वारा धमकी, ब्लैकमेल या एक्सटॉर्शन संबंधी कॉल आए तो घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों से ‘अभेद्य’ ऐप का उपयोग करने तथा डबल ओटीपी सुविधा के लिए अपने किसी विश्वसनीय परिजन या मित्र को नामित करने का आग्रह किया।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि डबल ओटीपी प्रणाली के तहत पहला ओटीपी वरिष्ठ नागरिक के मोबाइल नंबर पर प्राप्त होता है, जबकि दूसरा ओटीपी अथवा पुष्टि कॉल उसके द्वारा नामित विश्वसनीय व्यक्ति के पास जाती है। दोनों स्तर पर सत्यापन होने के बाद ही लेन-देन पूरा होता है। इस व्यवस्था से साइबर ठगों द्वारा दबाव बनाकर की जाने वाली धोखाधड़ी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।

