चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश में हर घर तक स्वच्छ पेयजल व सीवरेज सुविधा पहुंचाना प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। जनस्वास्थ्य विभाग नागरिकों को विकसित देशों की तर्ज पर पेयजल व सीवरेज सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए अगले 5 साल का लक्ष्य तैयार करे और इसकी कार्ययोजना को टाइमलाइन सहित इसे अगली बैठक में प्रस्तुत करें।
यह निर्देश मुख्यमंत्री सैनी ने शनिवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में हरियाणा विजन-2047 के अंतर्गत जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की 5 वर्षों की कार्ययोजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए। उन्होंने प्रदेश के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा सरकार द्वारा अलॉट किए गए 100-100 वर्ग गज प्लाटों तथा नई अप्रूव्ड कालोनियों में पेयजल व सीवरेज सुविधाओं की जानकारी लेते हुए इनकी उपलब्धता के संबंध में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए।
जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के आयुक्त एवं सचिव जे गणेशन ने विभाग के अगले 5 वर्षों के विजन के तहत जलापूर्ति कनेक्शन आधारभूत ढांचे, सीवरेज कनेक्शन, उपचारित अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग, सेंट्रलाइज्ड एसटीपी मॉनिटरिंग, तथा एआई सक्षम शिकायत विश्लेषण के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए अगले 5 वर्ष का रोडमैप प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि पीने का पानी जीवन की पहली जरूरत है और केंद्र सरकार की तहर प्रदेश सरकार भी हर नागरिक को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने को अपनी जिम्मेदारी मानती है। उन्होंने कहा कि हर 5000 की आबादी पर एक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की कार्ययोजना तैयार की जाए और सभी जलघरों को नहरी पानी से आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। सरकार द्वारा जहां-जहां पात्र परिवारों को 100-100 वर्ग गज के प्लाट उपलब्ध करवाए गए हैं और जो कालोनियां वैध की गई हैं उन सभी में प्राथमिकता के आधार पर पेयजल, सीवरेज, बिजली सुविधा दी जाए और सड़क बनवाई जाए।
उन्होंने कहा कि हमें भविष्य के स्मार्ट शहर बनाने होंगे जहां 24 घंटे पेयजल आपूर्ति हो सके। इसके पायलट प्रोजेक्ट के लिए उन्होंने गुरुग्राम जैसे किसी एक या दो शहरों का चयन करके प्रयोग करने को कहा जिसके शत-प्रतिशत घरों में पानी के कनेक्शनों पर मीटर लगे हों। उन्होंने कहा कि जहां तक संभव हो नहरों से जलघरों तक पानी पाइपों के माध्यम से लाया जाए ताकि इसकी वाष्पीकरण से होने वाली बर्बादी को रोका जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पेयजल की तरह हर गांव, शहर व कालोनी के प्रत्येक घर तक सीवरेज सुविधा भी पहुंचानी सुनिश्चित की जाए। जहां बहुत पुरानी सीवरेज प्रणाली है उसकी मरम्मत करने अथवा नई लाइन डालने की भी कार्ययोजना तैयार की जाए। इसके लिए मशीनों की मदद लेकर यह कार्य जल्द पूरे करवाए जाएं ताकि सड़क की खुदाई के कारण आमजन को परेशानियों का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि सीवरेज लाइन 50-60 सालों के लिए डाली जाती है, इसलिए भविष्य की बढ़ती जरूरतों का अनुमान लगाकर पर्याप्त क्षमता की सीवरेज लाइन डाली जाएं। उन्होंने कहा कि सीवरेज के संशोधित जल का उद्योगों और कृषि के क्षेत्र में उपयोग करने की योजना भी बनाई जाए।
नायब सिंह सैनी ने कहा कि जमीन में सीवरेज, पेयजल, इंटरनेट, गैस व तेल की लाइनें डली होती हैं। किसी एक विभाग द्वारा अपने काम के लिए सड़क की खुदाई करने के चलते दूसरी सेवाएं प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसके साथ ही ऐसा भी होता है कि सड़क बनने के बाद उसे सीवरेज या पेयजल लाइनें डालने के लिए फिर से खोद दिया जाता है। इससे सरकारी धन की हानि तो होती ही है, साथ ही आमजन को भी परेशानी होती है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए अलग से एक विभाग या संस्था का गठन किया जाए जिसकी अनुमति के बाद ही सड़क की खुदाई का कार्य करवाया जा सके।
बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव आरके खुल्लर, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर की प्रधान सचिव अमनीत पी कुमार, आशिमा बराड़, मुख्यमंत्री के ओएसडी व स्वर्ण जयंती हरियाणा राजकोषीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू तथा मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव यशपाल यादव सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

