Wednesday, June 17, 2026
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Petrol-Diesel Price: रोहतक में पेट्रोल ने लगाया शतक, अब महंगाई की रफ्तार तेज…

  • डीजल 92.96 और पेट्रोल 100.42 रुपये पहुंचा, ट्रांसपोर्ट से लेकर रसोई तक असर

 कविता.रोहतक 

लगातार बढ़ रही महंगाई के बीच पेट्रोल और डीजल के दामों ने आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। रोहतक में पेट्रोल पहली बार 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है। ताजा बढ़ोतरी में पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा हुआ है। इसके बाद शहर में पेट्रोल 100.42 रुपये और डीजल 92.96 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। चार दिन के भीतर दूसरी बार बढ़े तेल के दामों ने बाजार, कारोबार और घरेलू बजट पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है।

व्यापारियों का कहना है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हर वस्तु की लागत पर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सामान की ढुलाई का खर्च बढ़ जाता है और आखिरकार इसका बोझ आम ग्राहकों की जेब पर पड़ता है।

ट्रांसपोर्ट कारोबार पर बढ़ा दबाव

डीजल महंगा होने से सबसे ज्यादा असर ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर दिखाई देने लगा है। ट्रक ऑपरेटरों और माल ढुलाई से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि पहले ही कमाई सीमित थी, अब डीजल के दाम बढ़ने से खर्च और बढ़ गया है। ट्रांसपोर्टरों अनिल, सुमित भयाना, विकास रोहिला आदि का कहना है कि यदि लगातार ऐसे ही रेट बढ़ते रहे तो मालभाड़ा बढ़ाना मजबूरी बन जाएगा।

ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के अनुसार एक ट्रक रोजाना सैकड़ों किलोमीटर चलता है और डीजल में मामूली बढ़ोतरी भी महीने का हजारों रुपये अतिरिक्त खर्च बढ़ा देती है। इसका असर फल-सब्जी, राशन, निर्माण सामग्री और अन्य सामानों की कीमतों पर पड़ना तय माना जा रहा है।

सब्जी और किराना बाजार पर दिखेगा असर

सब्जी व्यापारियों का कहना है कि मंडियों तक माल पहुंचाने का खर्च बढ़ने से आने वाले दिनों में सब्जियों और फलों के दाम बढ़ सकते हैं। बाहर से आने वाले आलू, प्याज, टमाटर और हरी सब्जियों की ढुलाई डीजल आधारित वाहनों से होती है। ऐसे में किराया बढ़ने पर व्यापारी कीमतों में बढ़ोतरी कर सकते हैं।

किराना कारोबारियों का भी कहना है कि खाद्य पदार्थों की सप्लाई लागत बढ़ने से रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं। खासकर पैकिंग, ट्रांसपोर्ट और वितरण पर खर्च बढ़ने का असर उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा।

ऑटो और टैक्सी चालकों की कमाई पर चोट

ऑटो, टैक्सी और निजी वाहन चालकों के लिए भी बढ़ते तेल के दाम चिंता का कारण बन गए हैं। चालकों का कहना है कि किराया उतना नहीं बढ़ पा रहा जितनी तेजी से ईंधन महंगा हो रहा है। ऐसे में उनकी दैनिक बचत लगातार घट रही है। कई ऑटो चालकों राजेश, सुनील, जॉनी ने बताया कि दिनभर की कमाई का बड़ा हिस्सा अब सिर्फ पेट्रोल और डीजल में खर्च हो रहा है। यदि किराया बढ़ाते हैं तो यात्रियों की संख्या कम हो जाती है, जबकि पुराने किराए पर काम करना घाटे का सौदा बनता जा रहा है।

किसानों पर भी बढ़ेगा बोझ

डीजल महंगा होने का असर खेती पर भी पड़ सकता है। खेतों में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर, ट्यूबवेल और कृषि मशीनें बड़ी मात्रा में डीजल पर निर्भर हैं। ऐसे में खेती की लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। किसान महिपाल, विजय देवेंद्र आदि का कहना है कि पहले ही खाद, बीज और बिजली महंगी हो चुकी है, अब डीजल के दाम बढ़ने से खेती करना और महंगा पड़ सकता है। इसका असर आने वाले समय में फसलों की लागत और बाजार भाव दोनों पर दिखाई दे सकता है।

आम आदमी का बिगड़ा घरेलू बजट

तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ रहा है। नौकरीपेशा और मध्यम वर्गीय परिवारों का कहना है कि रोज ऑफिस आने-जाने का खर्च लगातार बढ़ रहा है। निजी वाहन इस्तेमाल करने वालों के लिए महीने का पेट्रोल खर्च पहले से काफी ज्यादा हो चुका है।

इसके अलावा ट्रांसपोर्ट महंगा होने से बाजार में रोजमर्रा की वस्तुएं भी धीरे-धीरे महंगी होती हैं। ऐसे में खाने-पीने के सामान से लेकर स्कूल, दफ्तर और घरेलू जरूरतों तक हर चीज का खर्च बढ़ने लगता है। लोगों का कहना है कि महंगाई पहले ही चरम पर है और अब तेल के बढ़ते दामों ने राहत की उम्मीद भी कम कर दी है।

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