कविता.रोहतक
भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच रोहतकवासियों को अभी चार दिन और पानी की किल्लत झेलनी पड़ेगी। शहर की पेयजल व्यवस्था की सबसे बड़ी लाइफलाइन मानी जाने वाली जवाहरलाल नेहरू (जेएलएन) नहर में 27 मई तक पानी पहुंचने की संभावना जताई गई है। ऐसे में तब तक शहर के कई इलाकों में जल संकट बने रहने के आसार हैं।
गर्मी अपने चरम पर है और तापमान 46 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। ऐसे में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन जलघरों तक पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पहुंचने से सप्लाई व्यवस्था पूरी तरह दबाव में आ गई है। कई इलाकों में लोगों को एक समय ही पानी मिल रहा है, जबकि कुछ कॉलोनियों में अनियमित सप्लाई से लोग परेशान हैं।
27 मई के बाद सुधर सकते हैं हालात
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल भिवानी सब ब्रांच और काहनौर डिस्ट्रिब्यूट्री में पानी छोड़ा गया है, लेकिन शहर की मुख्य पेयजल व्यवस्था जेएलएन नहर पर निर्भर है। विभाग का कहना है कि 27 मई तक जेएलएन में पानी पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद जलघरों में पर्याप्त स्टोरेज हो सकेगा और सप्लाई व्यवस्था धीरे-धीरे सामान्य होने लगेगी।
सुबह-शाम पानी देना बना चुनौती
जन स्वास्थ्य विभाग के लिए शहर में दोनों समय पानी की सप्लाई बनाए रखना मुश्किल हो गया है। कई क्षेत्रों में दबाव कम होने के कारण ऊंचाई वाले हिस्सों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। कुछ मोहल्लों में लोगों को देर रात तक पानी का इंतजार करना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारी लगातार वैकल्पिक व्यवस्था बनाने में जुटे हुए हैं, लेकिन बढ़ती गर्मी ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
टैंकरों के सहारे गुजर रहे दिन
जल संकट के कारण शहर के कई हिस्सों में लोग टैंकरों और निजी बोरवेल के सहारे काम चला रहे हैं। सार्वजनिक बूस्टरों पर भीड़ बढ़ गई है और कई परिवार जरूरत भर पानी जुटाने के लिए सुबह से ही इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं।
गर्मी ने बढ़ाई पानी की खपत
तेज धूप और लू के कारण पानी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ गई है। घरों में पीने के पानी के साथ-साथ कूलर और अन्य जरूरतों के लिए भी अधिक पानी इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में सीमित सप्लाई व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
पानी बचाने की अपील
विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि अगले कुछ दिनों तक पानी का बेहद सावधानी से इस्तेमाल करें। अधिकारियों का कहना है कि यदि लोग जरूरत के अनुसार ही पानी का उपयोग करें और बर्बादी रोकें तो संकट की स्थिति को काफी हद तक संभाला जा सकता है। विभाग का दावा है कि 27 मई के बाद हालात में तेजी से सुधार देखने को मिल सकता है।

