रोहतक : पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (PGIMS) का पांचवां दीक्षांत समारोह शनिवार को सुश्रुत सभागार में गरिमा, अनुशासन और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर हरियाणा के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. असीम कुमार घोष उपस्थित रहे। उनके साथ हरियाणा की प्रथम महिला मित्रा घोष भी समारोह में शामिल हुईं। समारोह की अध्यक्षता कुलपति प्रो. डॉ. एच.के. अग्रवाल ने की।
समारोह में हरियाणा के पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, मेडिकल कॉलेजों के निदेशक, कार्यकारिणी एवं अकादमिक परिषद के सदस्य उपस्थित थे।
राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने अपने दीक्षांत संबोधन में कहा कि यूएचएस रोहतक के पांचवें दीक्षांत समारोह के इस ऐतिहासिक अवसर पर मैं आप सभी का हार्दिक अभिनंदन करता हूं। आज जब मैं इस भव्य सुश्रुत सभागार में 950 स्नातकों को उनकी मेहनत से अर्जित उपाधियां और 68 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्राप्त करते देख रहा हूं, तो मेरे सामने केवल युवा डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और सशक्त भारत के भविष्य के निर्माता खड़े हैं। यह दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं है। यह ज्ञान, करुणा और सेवा को मानवता के लिए समर्पित करने की एक पवित्र प्रतिज्ञा है।
उन्होंने पंडित भगवत दयाल शर्मा को नमन करते हुए कहा कि वे स्वतंत्रता सेनानी, दूरदर्शी राजनेता और हरियाणा के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित भगवत दयाल शर्मा जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनकी पावन स्मृति में स्थापित यह विश्वविद्यालय ‘सेवा परमो धर्मः’ अर्थात सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है, के महान आदर्श को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।
युवा चिकित्सकों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि मेरे प्रिय युवा डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों, चिकित्सा केवल रोग ठीक करने का विज्ञान नहीं है, यह मानवता को स्वस्थ करने की कला है। आपका नैदानिक ज्ञान बीमारी का इलाज करेगा, लेकिन आपकी करुणा, विनम्रता और सहानुभूति जीवन को ठीक करेगी। उन्होंने कहा कि हर मरीज की सेवा समानता, गरिमा और करुणा के साथ ईलाज करें, जो हमारे संविधान और सभ्यतागत मूल्यों की सच्ची भावना है।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की प्रगति पर गर्व जताते हुए कहा कि मुझे इस विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा, शोध, स्वास्थ्य सेवा और जनसेवा में हासिल की गई उल्लेखनीय प्रगति पर अपार गर्व है।
अंगदान के क्षेत्र में सोटो हरियाणा के प्रयासों पर राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने अंगदान जागरूकता के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों की विशेष रूप से सराहना करते हुए कहा कि अंगदान वास्तव में जीवन का सबसे महान उपहार है।
कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष, मित्रा घोष, पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, सभी कुलपतियों, निदेशकों, अतिथियों, अभिभावकों और विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि आज का दिन हमारे विश्वविद्यालय परिवार के लिए गर्व, उत्सव और चिंतन का क्षण है। दीक्षांत समारोह केवल औपचारिक अवसर नहीं है, यह उपलब्धि, जिम्मेदारी और समाज के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह हमारे विद्यार्थियों का शिक्षार्थी से पेशेवर बनने का पड़ाव है, जो हमारे राज्य और राष्ट्र के स्वास्थ्य का भविष्य तय करेंगे।
डॉ अग्रवाल ने बताया कि आज हम चिकित्सा, दंत चिकित्सा, नर्सिंग, फिजियोथेरेपी, फार्मेसी और संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान सहित विभिन्न विषयों में 950 विद्यार्थियों की उपलब्धियों का उत्सव मना रहे हैं। इनमें से 68 मेधावी विद्यार्थी—17 स्नातक और 51 स्नातकोत्तर—को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धि के लिए पदक प्रदान किए जा रहे हैं।
अभिभावकों को बधाई देते हुए डॉ. अग्रवाल ने कहा कि उनके प्रोत्साहन, त्याग और विश्वास ने इन युवा पेशेवरों की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने युवा चिकित्सकों को याद दिलाया कि स्वास्थ्य सेवा केवल एक पेशा नहीं है, यह करुणा और सेवा का मिशन है। चिकित्सा विज्ञान बीमारियों को ठीक कर सकता है, लेकिन सहानुभूति इंसान को ठीक करती है। इस प्रतिष्ठित संस्थान के स्नातक के रूप में आप पर बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी है। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि समावेशी स्वास्थ्य सेवा में योगदान दें और समाज के सभी वर्गों, विशेषकर गरीब और वंचित लोगों के कल्याण के लिए काम करें।
अंगदान कार्यक्रम पर डॉ अग्रवाल ने बताया कि हम अंगदान कार्यक्रम में निरंतर प्रगति कर रहे हैं। हमने छह अंगदान सफलतापूर्वक किए हैं, जिनमें से चार पिछले दो महीनों में हुए और हम कई अनमोल जीवन बचा पाए। हम अंगदान जागरूकता कार्यक्रम को और तेज करेंगे।
किडनी ट्रांसप्लांट पर जानकारी देते हुए कहा कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि पीजीआईएमएस में 38 किडनी प्रत्यारोपण 100 प्रतिशत सफलता दर के साथ किए गए हैं। भविष्य में हम अन्य अंगों के प्रत्यारोपण कार्यक्रम का भी विस्तार करेंगे।
शोध के क्षेत्र में प्रगति पर डॉ अग्रवाल ने कहा कि हम शोध के प्रति जागरूक हैं। विश्वविद्यालय हर साल संकाय सदस्यों और छात्रों को शोध गतिविधियों के लिए आंतरिक अनुदान देता है। इस वित्तीय वर्ष में शोध के लिए 5 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। हमारे संकाय सदस्य हर साल करोड़ों रुपये के बाहरी अनुदान भी प्राप्त कर रहे हैं।
डॉ अग्रवाल ने बताया कि जल्द ही ई-ऑफिस सुविधा शुरू की जाएगी।
समारोह के अंत में कुलसचिव डॉ. रूप सिंह ने सभी अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का धन्यवाद व्यक्त किया।
विद्यार्थी खुशी से फूले नहीं समाए
जैसे ही मंच से नाम पुकारा गया और कुलाधिपति के साथ फोटो खिंचवाकर डिग्री मिली, विद्यार्थी खुशी से फूले नहीं समाए। वर्षों की मेहनत, रातों की जागी आंखें और क्लिनिकल ड्यूटी की थकान मानो एक पल में सार्थक हो गई। सफेद कोट पहनने युवा डॉक्टरों, नर्सिंग की आंखों में गर्व की चमक थी और चेहरों पर संतोष की मुस्कान। कई विद्यार्थी डिग्री हाथ में लेकर भावुक हो गए, तो कइयों ने आसमान की ओर देखकर तो कई ने अपने माता-पिता के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। सुश्रुत सभागार बार बार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज रहा था। बीडीएस की स्वर्ण पदक विजेता ने कहा कि आज लगा कि पापा का सपना पूरा हो गया। एमबीबीएस टॉपर ने डिग्री को माथे से लगाते हुए कहा कि यह सिर्फ कागज नहीं, जिम्मेदारी है। अभिभावक भी अपने बच्चों को गले लगाकर आशीर्वाद देते नजर आए। सेल्फी, ग्रुप फोटो और अपनों के साथ जश्न मनाते विद्यार्थियों के लिए यह पल जीवनभर की पूंजी बन गया।

