कविता. रोहतक: नगर निगम की हाउस बैठक नहीं होने का असर अब शहर के विकास कार्यों पर साफ दिखाई देने लगा है। कई महीनों से सामान्य सदन की बैठक आयोजित नहीं होने के कारण वार्डों से जुड़े अनेक प्रस्ताव मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।
पार्षदों का कहना है कि बजट बैठक के अलावा इस वर्ष कोई नियमित हाउस मीटिंग नहीं हुई, जिससे विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ गई है। नई सड़कें, पेयजल व्यवस्था, सीवर सुधार और अन्य जनसुविधाओं से जुड़े मामलों पर निर्णय नहीं हो पा रहे हैं। नए नगर निगम आयुक्त सत्येंद्र दूहन के कार्यभार संभालने के बाद अब पार्षदों और शहरवासियों को उम्मीद है कि जल्द बैठक बुलाकर लंबित मामलों पर फैसला लिया जाएगा।
बैठक नहीं, इसलिए फैसले भी अटके
नगर निगम के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि हाउस की बैठक ही वह मंच है, जहां वार्डों की समस्याओं पर चर्चा होती है और विकास कार्यों को प्रशासनिक मंजूरी मिलती है। लंबे समय से बैठक नहीं होने के कारण कई जरूरी प्रस्ताव फाइलों में ही अटके हुए हैं। इससे विकास योजनाओं की गति प्रभावित हो रही है और लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
पानी, सीवर और सड़कों के काम सबसे ज्यादा प्रभावित
कई वार्डों में नई पेयजल पाइपलाइन बिछाने, जर्जर गलियों के पुनर्निर्माण, सीवर लाइन सुधारने और स्ट्रीट लाइट लगाने जैसे कार्य स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं। दूषित पेयजल की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन बैठक नहीं होने से इन समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में निर्णय नहीं हो पा रहे हैं। कई विकास परियोजनाओं के नए टेंडर भी लंबित बताए जा रहे हैं।
अधिकारियों तक पहुंचना आसान नहीं
पार्षदों का कहना है कि व्यक्तिगत रूप से अधिकारियों से समय लेकर मुलाकात करना हमेशा संभव नहीं हो पाता। ऐसे में हाउस की बैठक ही वह अवसर होता है, जब सभी विभागों के अधिकारी एक साथ मौजूद रहते हैं और जनप्रतिनिधि सीधे अपने वार्डों की समस्याएं रख सकते हैं। नियमित बैठकें नहीं होने से जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच संवाद भी प्रभावित हुआ है।
आयुक्त बदलते रहे, बैठकें पीछे छूटती गईं
पिछले कुछ महीनों में नगर निगम में आयुक्त स्तर पर लगातार बदलाव हुए। पहले अनिता यादव का तबादला हुआ, फिर कुछ समय तक जिला उपायुक्त के पास अतिरिक्त जिम्मेदारी रही। इसके बाद आनंद कुमार को आयुक्त बनाया गया, लेकिन उनका भी जल्द स्थानांतरण हो गया। अब सत्येंद्र दूहन ने कार्यभार संभाला है और निगम के कामकाज की समीक्षा शुरू कर दी है। ऐसे में पार्षदों को उम्मीद है कि अब जल्द सदन की बैठक होगी।
नई टीम से विकास को रफ्तार मिलने की उम्मीद
नए निगम आयुक्त के आने के बाद पार्षद अपने-अपने वार्डों से जुड़े लंबित प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं ताकि बैठक होते ही उन्हें सदन में रखा जा सके। उनका मानना है कि नियमित हाउस बैठकें होने से विकास कार्यों की निगरानी बेहतर होगी और जनता से जुड़े मामलों का समय पर समाधान निकल सकेगा। शहरवासियों की भी अपेक्षा है कि अब नगर निगम में निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और रुके हुए कार्य दोबारा शुरू होंगे।


