रोहतक। रोहतक में एक बार फिर सोमवार को आशा वर्करों ने विरोध प्रदर्शन किया और स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान आशा वर्करों ने कहा कि 73 दिन चले आंदोलन के बाद प्रदेश की भाजपा सरकार से मांगों पर सहमति बनी थी। लेकिन भाजपा ने सहमतियों को लागू नहीं किया। इसलिए भाजपा के खिलाफ आशा वर्करों का गुस्सा फूटा। आशा वर्कर मानसरोवर पार्क में इकट्ठा हुई और प्रदर्शन करते हुए स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन भेजा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ 19 मई को सीटू के आह्वान पर जिला स्तरीय मजदूर पंचायत होगी। जिसमें वे बढ़-चढ़़कर हिस्सा लेंगी।

इसकी अध्यक्षता यूनियन की जिला प्रधान अनीता भाली और संचालन सोनिया ने किया। सीटू जिला प्रधान कमलेश लाहली, यूनियन जिला प्रधान अनीता भाली, जिला कोषाध्यक्ष धर्मवीर हुड्डा ने कहा कि एनएचएम के काम का एनजीओ से करवाकर और सरकारी स्वास्थ्य के ढांचे का पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के नाम पर निजी हाथों में देकर बंद करने की तरफ सरकार बढ़ रही है। प्रदेश की भाजपा सरकार समस्याओं को सुनने की बजाय लगातार दमन एवं शोषण का रास्ता अपना रही है।
पिछले दो साल में आशा वर्कर्स के विधानसभा चलो कार्यक्रम को विफल करने के लिए पुलिस बल का भारी प्रयोग किया गया और महिलाओं के घरों पर गैरकानूनी ढंग से पुलिस का पहरा बिठाया गया। आशा वर्कर ने अपनी मांगों के लिए 73 दिन तक आंदोलन चलाया। राज्य सरकार द्वारा पुलिस बल का इस्तेमाल करके इसे कुचलने के प्रयास किए, लेकिन वर्कर्स ने जीत हासिल की है। हालांकि अभी कई मांगों का सहमति के बाद भी निपटारा नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 19 मई को सीटू के आह्वान पर जिला स्तरीय मजदूर पंचायत होगी। इसको सफल बनाने का आह्वान किया गया। उन्होंने कहा कि बच्चों और महिलाओं से जुड़ी तीनों परियोजनाओं में देशभर में 60 लाख से ज्यादा वर्कर काम करती हैं, जिनमें अधिकतर महिलाएं हैं। सरकार इन्हें वर्कर मानने की बजाय स्वयंसेवी कहती है और किसी प्रकार के सामाजिक सुरक्षा लाभ नहीं दे रही। 2018 के बाद भाजपा की केन्द्र सरकार ने मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की है।