रोहतक : पीजीआईएमएस रोहतक के मनोरोग विभाग में विश्व अल्जाइमर दिवस जागरूकता कार्यक्रम के रूप में मनाया गया। यह दिवस सीनियर प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष डॉ. सुजाता सेठी के नेतृत्व में आयोजित किया गया। इस अवसर पर आज मनोरोग विभाग की ओपीडी में पोस्टर प्रदर्शनी लगाकर आमजन को अल्जाइमर व डिमेंशिया के प्रति जागरूक किया गया।
डॉ. सुजाता सेठी ने बताया कि विश्व भर में यह दिवस हर साल 21 सितंबर को मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1994 में हुई थी। इस वर्ष का विषय “जितना पहले आप जान लेते हैं, उतना अधिक आप कर सकते हैं; डिमेंशिया की पहचान महत्वपूर्ण है” रखा गया है। इसका उद्देश्य लोगों में अल्जाइमर व अन्य डिमेंशिया रोगों के लक्षण व देखभाल के प्रति जागरूक करना है।
डॉ. हितेश खुराना ने बताया कि यह रोग अक्सर वृद्धावस्था में पाया जाता है और पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में इसकी संभावना लगभग दो गुना अधिक होती है। रोजमर्रा के कामों को धीरे-धीरे भूल जाना, रास्ता भटक जाना, लोगों को पहचान न पाना, गुमसुम और अलग-थलग बैठना इस रोग के मुख्य लक्षण हैं। इसके अलावा नहाना, शौच, कपड़े बदलने जैसे दैनिक कार्यों में भी असमर्थता आने लगती है। शुरुआती लक्षणों से असमर्थता तक पहुंचने में 5 से 10 वर्ष का समय लग सकता है।
डॉ हितेश खुराना ने कहा कि डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, नशे का सेवन, शारीरिक निष्क्रियता और सामाजिक अलगाव इस समस्या के प्रमुख कारण हैं, लेकिन इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। नियमित टहलना, शुगर-बीपी की जांच, डॉक्टर के निर्देशों का पालन, तंबाकू व शराब से दूरी इस रोग की रोकथाम में बेहद अहम है। तंबाकू और शराब न केवल दिमाग पर सीधा प्रहार करते हैं, बल्कि हृदय रोगों के जरिए डिमेंशिया को जल्दी लाते हैं।
डॉ. जोगिन्दर कैरो ने बताया कि व्यायाम, सक्रिय जीवन शैली, हॉबी, कुछ नया सीखने का जज्बा जैसे संगीत, चित्रकला, साहित्य पढ़ना, कविता-कहानी लिखना, सुडोकू व वर्ग पहेली हल करना इस रोग से दूर रहने में लाभदायक है।
डॉ भूपेंद्र सिंह ने बताया कि 6 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद मस्तिष्क के लिए जरूरी है, जबकि अधिक सोना या अधिक जागना दोनों ही हानिकारक हैं। अत्यधिक मोबाइल के इस्तेमाल से भी बचना चाहिए।
इस अवसर पर विभाग के चिकित्सकों डॉ. हितेश खुराना, डॉ. प्रीति सिंह, डॉ मंजूनाथ बी सी, डॉ. योगेंद्र मलिक, डॉ. पूनम गुप्ता, डॉ. जोगेन्द्र कैरो, डॉ मंजू, डॉ सुधा, डॉ. अमित सोनी ने पोस्टर के माध्यम से लोगों को जागरूक किया। विभाग के विद्यार्थियों डॉ. साहिल शर्मा, साहिल पवार, अंजलि सोनी, आयुषी, नवनीत, हरलीन, अंकित, ईरा तथा क्लिनिकल मनोविज्ञान के इंटर्न कु. जीनत, कु. ऐशना, कु. भावना, श्री यमक और डॉ. भूपेंद्र सिंह ने पोस्टर प्रदर्शनी, मानसिक क्रियाओं व विचार-विमर्श के जरिए आमजन को जानकारी दी।
डॉ. भूपेंद्र ने बताया कि मनोरोग विभाग में वृद्धावस्था मनोरोग व डिमेंशिया क्लीनिक संगठित रूप से चलाया जाता है, जहां हर सप्ताह 20 से 30 मरीज लाभान्वित होते हैं।
इस अवसर पर स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल और पीजीआईएमएस के निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने विश्व अल्जाइमर दिवस पर विभाग द्वारा ओपीडी में लगाई गई पोस्टर प्रदर्शनी व जागरूकता प्रयासों की सराहना की और कहा कि समय पर पहचान और रोकथाम ही इस गंभीर रोग से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।


