कविता.रोहतक : लोगों को पीने के लिए पानी मिल रहा है या बीमारियों को न्योता, यह सवाल अब शहर की कई कॉलोनियों में उठने लगा है। कुछ दिन पहले सेक्टर-1 हाउसिंग बोर्ड में बदबूदार पानी की सप्लाई ने लोगों की परेशानी बढ़ाई थी, अब भारत कॉलोनी से नलों में नाले जैसा काला और बदबूदार पानी आने की शिकायत सामने आई है।
हालात ऐसे हैं कि पानी को देखकर ही लोगों की प्यास बुझने के बजाय डर सताने लगे कि कहीं इसे इस्तेमाल करना परिवार की सेहत पर भारी न पड़ जाए। घरों में रोजमर्रा के काम से लेकर पीने के पानी तक के लिए लोग परेशान हैं। सवाल यह है कि आखिर शहर की पेयजल व्यवस्था में ऐसा क्या हो रहा है कि नलों से साफ पानी के बजाय गंदगी जैसी सप्लाई पहुंच रही है। अगर समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो दूषित पानी से बीमारियां फैलने की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
नल खोला तो निकला काला पानी, बदबू ने उड़ाए होश
भारत कॉलोनी में पेयजल सप्लाई को लेकर सामने आई शिकायत ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। यहां सप्लाई में आने वाला पानी काले रंग का और नाले जैसी दुर्गंध वाला बताया जा रहा है। जिस पानी का इस्तेमाल परिवारों को पीने, खाना बनाने और दूसरे घरेलू कामों के लिए करना पड़ता है, उसकी ऐसी हालत लोगों को परेशान कर रही है। पानी की जगह नलों से गंदगी जैसी सप्लाई आने की शिकायत ने पेयजल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि पानी की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही उसमें मौजूद दूषित तत्वों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी, लेकिन मौजूदा शिकायत को हल्के में लेना लोगों की सेहत के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है।
पहले सेक्टर-1 हाउसिंग बोर्ड, अब भारत कॉलोनी की बारी
शहर में दूषित पेयजल की शिकायतें किसी एक इलाके तक सीमित नजर नहीं आ रहीं। कुछ दिन पहले सेक्टर-1 हाउसिंग बोर्ड में सप्लाई के दौरान बदबूदार पानी आने की शिकायत सामने आई थी। अब भारत कॉलोनी में काले और नाले जैसी दुर्गंध वाले पानी की शिकायत ने चिंता और बढ़ा दी है। लगातार अलग-अलग इलाकों से इस तरह की शिकायतें सामने आने के बाद सवाल उठना लाजिमी है कि पेयजल सप्लाई की निगरानी किस स्तर पर हो रही है। क्या पाइपलाइनों में कहीं लीकेज है, सीवर का गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल रहा है या समस्या की कोई दूसरी वजह है। इसकी पुष्टि तकनीकी जांच से ही हो सकती है। लेकिन जब घरों तक पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगें तो संबंधित विभाग की जिम्मेदारी और जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
पानी पीना तो दूर, घरेलू इस्तेमाल से भी डर रहे लोग
पानी की सप्लाई में काला रंग और तेज दुर्गंध होने की शिकायत अपने आप में गंभीर है। ऐसे पानी को पीना तो दूर, खाना बनाने और दूसरे घरेलू कामों में इस्तेमाल करने से पहले भी सावधानी बरतना जरूरी है। दूषित पानी में बीमारी फैलाने वाले सूक्ष्मजीव मौजूद हों तो इससे दस्त, उल्टी और पेट से जुड़ी दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि भारत कॉलोनी में सप्लाई हो रहे पानी से किसी बीमारी के फैलने की अभी पुष्टि नहीं है, लेकिन आशंका को देखते हुए पानी के नमूने लेकर जांच कराना जरूरी है। जब तक पानी की गुणवत्ता स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक लोग इसे पीने और खाना बनाने में इस्तेमाल करने से बचें तथा सुरक्षित पानी का उपयोग करें। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों के मामले में विशेष सावधानी जरूरी है।
विभाग बताए, साफ पानी की जिम्मेदारी किसकी
शहरवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना संबंधित विभाग की बुनियादी जिम्मेदारी है। ऐसे में भारत कॉलोनी में सामने आई शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेकर पानी के नमूनों की जांच, सप्लाई लाइन का निरीक्षण और गंदगी के संभावित स्रोत का पता लगाना जरूरी है। यदि पाइपलाइन में लीकेज या सीवर का पानी मिलने जैसी कोई समस्या है तो उसे प्राथमिकता से ठीक किया जाना चाहिए। साथ ही प्रभावित क्षेत्र के लोगों को स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए कि सप्लाई का पानी सुरक्षित है या नहीं। सेक्टर-1 हाउसिंग बोर्ड के बाद भारत कॉलोनी से आई शिकायत ने शहर की पेयजल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी लोगों की परेशानी दूर करने के लिए कितनी जल्दी कदम उठाते हैं या फिर शहरवासी बदबूदार पानी की शिकायत लेकर ही भटकते रहेंगे।

