Friday, July 10, 2026
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अंडरपास निर्माण से घिरे राहगीरों को मिली आंशिक राहत, यूनिवर्सिटी का गेट बना अस्थायी विकल्प

रोहतक : बाबा मस्तनाथ मठ के सामने बन रहे अंडरपास के निर्माण कार्य ने शहर और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही को प्रभावित कर दिया है। शहर की ओर आने-जाने वाले राहगीरों को अब लंबा चक्कर लगाकर ओमेक्स मार्ग या फिर गांव गढ़ी माजरा के रास्ते शहर पहुंचना पड़ रहा है।

हालांकि, इस परेशानी के बीच बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी ने अपने परिसर का एक गेट आम लोगों के लिए खोलकर कुछ राहत देने की पहल की है। इससे लोगों को पहले की तुलना में कम दूरी तय करनी पड़ रही है, लेकिन यह सुविधा पूरे दिन उपलब्ध नहीं होने के कारण राहत भी सीमित बनी हुई है।

यूनिवर्सिटी का गेट बना राहत का रास्ता

अंडरपास निर्माण स्थल से ठीक पहले बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी ने अपना एक गेट राहगीरों के लिए खोल दिया है। लोग इस गेट से यूनिवर्सिटी परिसर में प्रवेश कर दूसरे गेट से बाहर निकलकर मुख्य सड़क तक पहुंच रहे हैं। इससे उन्हें ओमेक्स या गढ़ी माजरा के लंबे रास्ते का चक्कर लगाने से काफी हद तक राहत मिली है और रोजाना का सफर आसान हुआ है।

पूरे दिन नहीं मिल रही सुविधा

राहत देने वाली यह व्यवस्था पूरे दिन लागू नहीं है। यूनिवर्सिटी की ओर से सुबह से दोपहर करीब दो बजे तक गेट खुला रखा जाता है। इसके बाद इसे बंद कर दिया जाता है और फिर शाम के समय करीब दो घंटे के लिए दोबारा खोला जाता है। ऐसे में जिन लोगों को निर्धारित समय के बाहर आना-जाना पड़ता है, उन्हें अब भी लंबे वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है।

ओमेक्स और गढ़ी माजरा से होकर पहुंच रहे लोग

गेट बंद रहने के दौरान राहगीरों के सामने दो ही विकल्प बचते हैं। एक रास्ता ओमेक्स की ओर से लंबा चक्कर लगाकर शहर पहुंचने का है, जबकि दूसरा गढ़ी माजरा गांव से होकर गुजरता है। दोनों ही मार्गों में समय और ईंधन अधिक खर्च हो रहा है, जिससे रोजाना आने-जाने वाले लोगों की परेशानी बढ़ी हुई है।

छह महीने में पूरा होना है अंडरपास

बाबा मस्तनाथ मठ के सामने बन रहे अंडरपास के निर्माण के लिए करीब छह महीने की समय सीमा तय की गई है। निर्माण कार्य शुरू हुए अभी लगभग एक महीना ही हुआ है। मौके पर मशीनों और श्रमिकों के साथ तेज गति से काम चल रहा है, ताकि निर्धारित अवधि के भीतर परियोजना पूरी की जा सके और लोगों को स्थायी राहत मिल सके।

राहत मिली, लेकिन स्थायी समाधान का इंतजार

राहगीरों का कहना है कि यूनिवर्सिटी की पहल से उन्हें कुछ हद तक राहत जरूर मिली है, लेकिन सीमित समय तक गेट खुलने के कारण सभी लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाता। लोगों का मानना है कि जब तक अंडरपास का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक आवाजाही को और अधिक सुगम बनाने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त वैकल्पिक व्यवस्था भी करनी चाहिए, ताकि रोजाना सफर करने वालों को कम से कम परेशानी उठानी पड़े।

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