- हादसों का खतरा लगातार बढ़ रहा, सड़क से गुजर रहे पैदल चलने वाले लोग
कविता.रोहतक: शहर में पैदल चलना अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है। जिन फुटपाथों का निर्माण लोगों की सुरक्षित आवाजाही के लिए किया गया था, वे अब कई स्थानों पर अतिक्रमण की चपेट में हैं। प्रमुख बाजारों और व्यस्त सड़कों पर फुटपाथों का उपयोग पैदल यात्रियों की बजाय व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अधिक होता दिखाई देता है। कहीं रेहड़ियां और फड़ लगे हैं तो कहीं दुकानों का सामान, डिस्प्ले स्टैंड, फर्नीचर और वाहन फुटपाथों पर खड़े मिलते हैं। ऐसे में राहगीरों को मजबूर होकर सड़क पर चलना पड़ता है, जिससे हादसों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
शहर के देवीलाल पार्क के साथ लगते फुटपाथ की बात हो या दिल्ली रोड, झज्जर रोड, रेलवे रोड, मॉडल टाउन सहित कई प्रमुख बाजारों की, सेक्टरों की मुख्य सड़कों पर यही स्थिति देखने को मिलती है। कई स्थानों पर फुटपाथ पूरी तरह अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं, जबकि कुछ जगह उनका अस्तित्व ही खत्म होता नजर आता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजारों में खरीदारी करने आने वाले लोगों को भी पैदल निकलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती।
फुटपाथों पर खाने की रेहडियां
शहर के कई बाजारों में दुकानों का दायरा अब दुकान की सीमा तक सीमित नहीं रह गया है। फुटपाथों पर सामान सजाकर ग्राहकों को आकर्षित किया जा रहा है। कहीं कपड़ों के स्टैंड लगे हैं तो कहीं फर्नीचर, घरेलू सामान और अन्य वस्तुएं रखी गई हैं। देवी लाल पार्क के साथ लगते फुटपाथ पर तो खाने पीने की रेहडियां लगी हुई हैं। इससे सार्वजनिक रास्ता धीरे-धीरे संकरा होता जा रहा है और पैदल यात्रियों के लिए निर्धारित स्थान खत्म होता जा रहा है।
अभियान चलते हैं, लेकिन असर नहीं टिकता
नगर निगम और प्रशासन समय-समय पर अतिक्रमण हटाने के अभियान चलाते हैं, लेकिन इनका असर लंबे समय तक दिखाई नहीं देता। कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद फुटपाथों पर फिर से कब्जा होने लगता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि नियमित निगरानी और सख्ती नहीं होगी तो अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
फुटपाथ पर कब्जे से बढ़ रहा हादसों का खतरा
फुटपाथ पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए बनाए जाते हैं। जब ये अतिक्रमण की वजह से उपयोग के लायक नहीं रहते तो लोगों को सड़क पर उतरना पड़ता है। इससे तेज रफ्तार वाहनों के बीच दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों को होती है, जिन्हें सुरक्षित रास्ता नहीं मिल पाता।
अतिक्रमण से शहर की व्यवस्था पर भी असर
फुटपाथों पर कब्जा केवल पैदल यात्रियों की समस्या नहीं है, बल्कि इससे पूरे यातायात तंत्र पर असर पड़ता है। सड़क किनारे भीड़ बढ़ने से वाहनों की गति धीमी होती है, जाम की स्थिति बनती है और आपातकालीन सेवाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा शहर की सुंदरता और व्यवस्थित शहरी विकास की तस्वीर भी प्रभावित होती है।
स्थायी समाधान के बिना नहीं बदलेगी तस्वीर
शहरी योजनाकारों का कहना है कि फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए केवल अभियान पर्याप्त नहीं हैं। नियमित निरीक्षण, जिम्मेदारी तय करना, दोबारा कब्जा करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई और वैकल्पिक व्यवस्था जैसे कदम जरूरी हैं। यदि फुटपाथों को वास्तव में पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रखना है तो नगर निगम, प्रशासन और आम नागरिकों को मिलकर इस दिशा में लगातार प्रयास करने होंगे। तभी शहर में पैदल चलने वालों को उनका सुरक्षित अधिकार मिल सकेगा।

