Monday, June 8, 2026
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ट्रांसपोर्टरों ने जताई चिंता : डीजल की मार से महंगाई की रफ्तार तेज, माल ढुलाई महंगी होने के संकेत

कविता.रोहतक: डीजल की कीमतों में हुई हालिया बढ़ोतरी का असर अब केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहने वाला। इसका प्रभाव धीरे-धीरे ट्रांसपोर्ट कारोबार और फिर आम लोगों की जेब पर भी दिखाई देने की संभावना है।

ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे आने वाले समय में भाड़ा दरों में संशोधन करना पड़ सकता है। यदि यही स्थिति बनी रही तो रोजमर्रा के सामान से लेकर निर्माण सामग्री तक की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

बढ़ती लागत ने बढ़ाई ट्रांसपोर्टरों की चिंता

ट्रांसपोर्टर सुमित का कहना है कि एक ट्रक प्रतिदिन सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करता है। ऐसे में डीजल के दाम में मामूली बढ़ोतरी भी महीने के खर्च पर बड़ा असर डालती है। पिछले कुछ समय से ईंधन की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि अधिकांश कंपनियां पुराने अनुबंधों पर ही काम कर रही हैं। इससे ट्रांसपोर्टरों का लाभ घटता जा रहा है और कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है।

बाजार तक पहुंचेगा बढ़े हुए खर्च का असर

व्यापारिक जानकारों का मानना है कि माल ढुलाई महंगी होने का सीधा असर बाजार पर पड़ता है। किसी भी उत्पाद को फैक्ट्री से गोदाम और फिर दुकानों तक पहुंचाने में परिवहन सबसे अहम कड़ी है। जब यह खर्च बढ़ता है तो कंपनियां बढ़ी हुई लागत को उत्पादों की कीमतों में जोड़ देती हैं। इसका असर उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है।

किराया बढ़ाने पर विचार कर रहे वाहन संचालक

डीजल के बढ़ते दामों के बीच निजी वाहनों और कमर्शियल गाड़ियों के संचालक भी अपनी दरों की समीक्षा कर रहे हैं। स्कूलों, फैक्ट्रियों और निजी संस्थानों में किराये पर चलने वाले वाहन संचालकों का कहना है कि रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और ईंधन सभी महंगे हो चुके हैं। ऐसे में पुराने किरायों पर लंबे समय तक काम करना संभव नहीं दिख रहा।

खाद्य पदार्थों से लेकर निर्माण सामग्री तक असर

सुमित भ्याना के अनुसार ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने का असर केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। फल-सब्जियों, राशन, कपड़ों, इलेक्ट्रॉनिक सामान और निर्माण सामग्री जैसी वस्तुओं की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। शहरों और गांवों तक सामान पहुंचाने की प्रक्रिया में ट्रांसपोर्ट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए इसकी लागत बढ़ने पर हर क्षेत्र प्रभावित होता है।

नए टेंडरों और अनुबंधों की होगी समीक्षा

कई ट्रांसपोर्ट कंपनियां अब अपने ग्राहकों के साथ हुए पुराने अनुबंधों की समीक्षा करने की तैयारी में हैं। कारोबारियों का कहना है कि जब ईंधन लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही हो तो वर्षों पुराने रेट पर काम करना व्यावहारिक नहीं रहता। इसलिए आने वाले दिनों में नए टेंडरों और परिवहन समझौतों में बढ़ी हुई लागत को शामिल किया जा सकता है।

पांच से आठ प्रतिशत तक बढ़ सकता है माल भाड़ा

ट्रांसपोर्ट क्षेत्र से जुड़े लोगों का अनुमान है कि यदि डीजल की कीमतों में राहत नहीं मिली तो माल ढुलाई दरों में पांच से आठ प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जा सकती है। कारोबारियों का कहना है कि यह फैसला किसी लाभ के लिए नहीं बल्कि बढ़ती परिचालन लागत को संतुलित करने के लिए लेना पड़ सकता है। आने वाले कुछ सप्ताह बाजार और ट्रांसपोर्ट सेक्टर दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई महंगाई की आशंका

डीजल को अर्थव्यवस्था की धुरी माना जाता है क्योंकि अधिकांश माल परिवहन सड़क मार्ग से होता है। ऐसे में इसकी कीमतों में हर बढ़ोतरी का प्रभाव कई क्षेत्रों पर एक साथ पड़ता है। ट्रांसपोर्टर और व्यापारी फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन यदि ईंधन महंगा होता रहा तो बाजार में महंगाई का नया दौर शुरू होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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