Monday, February 2, 2026
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Rohtak PGIMS के तीन चिकित्सकों ने लुधियाना में अवार्ड जीतकर संस्थान का नाम रोशन किया

Rohtak News : पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय रोहतक के मेडिकल एजुकेशन विभाग के तीन चिकित्सकों को गत क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, लुधियाना में आयोजित 16 वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यवसाय शिक्षा सम्मेलन में आयोजित प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त करके अवार्ड जीता है।

डॉ. सुजाता सेठी, डॉ. राकेश मित्तल और डॉ. आशिमा सचदेवा की इस इस उपलब्धि पर कुलपति डाॅ.एच.के. अग्रवाल ने बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में दूसरा अवार्ड प्राप्त करके संस्थान का नाम रोशन किया है।
डाॅ.एच.के. अग्रवाल ने कहा कि यह उपलब्धि पीजीआईएमएस के लिए गर्व की बात है और यह दर्शाता है कि हमारे डॉक्टर चिकित्सा शिक्षा में उच्चतम स्तर की प्रतिभा और ज्ञान का प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें इनसे प्रेरणा लेते हुए विद्यार्थियों को नवीनतम तकनीक से शिक्षा प्रदान करनी करना चाहिए।

अपने इस अवार्ड के बारे में जानकारी देते हुए डाॅ. सुजाता सेठी ने बताया कि उनके मेडिकल एजुकेशन विभाग के चिकित्सकों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और कठिन प्रतियोगिता के बीच यह अवार्ड जीता। उन्होंने बताया कि सम्मेलन का विषय डायनामिक लैंडस्केप ऑफ हेल्थ प्रोफेशन्स एजुकेशन इन कॉम्पिटेंसी बेस्ड एजुकेशन था, जिसमें स्वास्थ्य व्यवसाय शिक्षा में नवाचारों और प्रतियोगिताओं पर जोर दिया गया। यह आयोजन अकेडमी ऑफ हेल्थ प्रोफेशनल्स एजुकेटर के तहत हुआ, जिसमें देश भर के सैकड़ों प्रतिभागियों ने भाग लिया।

डाॅ. सुजाता सेठी ने बताया कि सम्मेलन में डॉ. जेयराज डी. पांडियन (प्रिंसिपल, सीएमसी लुधियाना), डॉ. पायल क्वात्रा बंसल (प्रेसिडेंट) और डॉ. दिनेश के. बद्यल (ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी) शामिल थे। डॉ सुजाता सेठी ने बताया कि इस प्रतियोगिता के अंतिम राउंड में सिर्फ चार टीमें पहुंची थी जिसमें पीजीआईएमएस के डॉक्टरों ने अपनी प्रतिभा और ज्ञान का प्रदर्शन किया।

डॉ आशुमा सचदेवा ने बताया कि संस्थान का मेडिकल एजुकेशन विभाग प्रदेश के मेडिकल कालेजों के आचार्यां को नवीनतम तकनीकों से प्रशिक्षित कर रहा है ताकि वें रोचक तरीके से मेडिकल छात्रों को पढ़ा सकें और एमबीबीएस छात्र भी जल्दी सीख सकें।

डॉ राकेश मित्तल ने कहा कि इस प्रतियोगिता में भाग लेने से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला और यह अनुभव उनके लिए बहुत मूल्यवान है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए एक बड़ी प्रेरणा है और वह आगे भी चिकित्सा शिक्षा में अपना योगदान देते रहेंगे।

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