कविता. रोहतक : शहर की सड़कों पर बेसहारा गोवंश का आतंक एक बार फिर लौट आया है। कुछ दिन पहले नगर निगम की ओर से गोवंश पकड़ने का अभियान चलाया गया था तो लोगों को लगा था कि अब सड़कों पर मंडराता खतरा कम होगा, लेकिन तीन-चार दिन से हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आए हैं। दिन में सड़क किनारे और रात में अंधेरे में बीच सड़क खड़े गोवंश वाहन चालकों के लिए अचानक सामने आने वाली मुसीबत बन गए हैं। दिल्ली रोड, सोनीपत रोड, झज्जर रोड, शीला बाईपास, दिल्ली बाईपास से मेडिकल मोड़ की ओर जाने वाली सड़क समेत शहर के कई हिस्सों में गोवंश सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं।
रात के समय इनकी मौजूदगी ज्यादा खतरनाक हो जाती है। अंधेरे में सड़क के रंग में घुला काला या गहरे रंग का पशु अचानक वाहन की हेडलाइट में सामने आता है और वाहन चालक को संभलने तक का मौका नहीं मिलता। सबसे ज्यादा जोखिम दोपहिया वाहन चालकों पर है।
अभियान चला तो सड़कें खाली, अब फिर वही कहानी
कुछ दिन पहले गोवंश पकड़ने का अभियान चलने के बाद सड़कों पर इनकी संख्या कम हुई थी। लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन अभियान रुकते ही गोवंश फिर सड़कों पर लौट आए। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर कार्रवाई कुछ दिनों तक ही क्यों दिखाई देती है। यदि पकड़े गए गोवंश को सुरक्षित स्थान पर रखा जा रहा है तो नए गोवंश सड़कों पर कहां से आ रहे हैं और इनकी रोकथाम की स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं हो पा रही।
रात में अचानक सामने आ जाए तो ब्रेक लगाने का भी वक्त नहीं मिलता
राजेश कुमार, दोपहिया वाहन चालक ने बताया कि रात के समय सबसे ज्यादा परेशानी होती है। उनका कहना है कि सड़क पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण कई बार गोवंश दिखाई ही नहीं देते। अचानक सामने आने पर ब्रेक लगाने की कोशिश में बाइक फिसलने का खतरा रहता है।
सड़क है या गोवंश का ठिकाना, समझ नहीं आता
संदीप मलिक के अनुसार बाईपास और मुख्य सड़कों पर कई जगह गोवंश झुंड में खड़े रहते हैं। वाहन चालकों को उन्हें बचाकर निकलना पड़ता है। उनका कहना है कि अभियान के दौरान कुछ राहत मिली थी, लेकिन अब फिर वही स्थिति बन गई है।
एक तरफ तेज रफ्तार वाहन, दूसरी तरफ सड़क पर पशु
पूजा, स्कूटी चालक ने बताया कि महिलाओं और परिवार के साथ दोपहिया वाहन पर चलने वालों के लिए स्थिति और भी चिंताजनक है। सड़क पर अचानक पशु आ जाने पर संतुलन बिगड़ सकता है। उनका कहना है कि प्रशासन को सिर्फ गोवंश पकड़ने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इन्हें दोबारा सड़कों पर आने से रोकने की व्यवस्था करनी चाहिए।
बच्चों को लेकर निकलते समय डर लगता है
विनोद शर्मा, अभिभावक ने कहा कि शाम और रात के समय बच्चों के साथ बाइक या स्कूटी पर निकलना मुश्किल हो गया है। खासकर बाईपास और मेडिकल मोड़ की तरफ जाते समय सड़क पर खड़े गोवंश को देखकर वाहन की गति कम करनी पड़ती है। पीछे से आने वाले तेज वाहन इस स्थिति को और खतरनाक बना देते हैं।
अंधेरे में सफेद-काले पशु भी देर से दिखाई देते हैं
अमित, कार चालक, ने बताया कि कार चालकों के पास कुछ हद तक बचाव का विकल्प रहता है, लेकिन अचानक सामने आए पशु से टक्कर का खतरा फिर भी बना रहता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा कई गुना ज्यादा है। उन्होंने सड़कों पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और नियमित निगरानी की मांग की।
कार्रवाई लगातार होनी चाहिए, तभी समस्या खत्म होगी
मुकेश, दुकानदार, का कहना है कि गोवंश को पकड़ने की कार्रवाई बीच-बीच में करने से समस्या खत्म नहीं होगी। अभियान लगातार चलाना होगा और यह भी देखना होगा कि पकड़े गए पशु दोबारा शहर की सड़कों तक न पहुंचें। उनका कहना है कि सड़क पर बेसहारा पशु केवल यातायात की समस्या नहीं, बल्कि सीधे लोगों की जान का खतरा हैं।
रात में सड़क पर हर मोड़ बन रहा खतरे का मोड़
रोहतक की सड़कों पर बेसहारा गोवंश का लौटना महज यातायात व्यवस्था का सवाल नहीं है। यह सीधे सड़क सुरक्षा से जुड़ा मामला है। खासकर उन रास्तों पर जहां स्ट्रीट लाइट कमजोर है, वहां सड़क पर बैठे या खड़े गोवंश रात में दिखाई नहीं देते। वाहन चालक जब तक उन्हें देखता है, तब तक दूरी बेहद कम रह जाती है। लोगों का कहना है कि कुछ दिन अभियान चलाकर फिर ढील देने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे गोवंश सड़कों पर पहुंचें ही नहीं।


