- रोहतक की वोटर लिस्ट में बड़ा खुलासा
- एसआईआर-2026 के सत्यापन में सामने आई बड़ी गड़बड़ी
- 1.59 लाख मतदाता पते पर नहीं मिले
कविता.रोहतक : भारत निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)-2026 के तहत रोहतक जिले में मतदाता सूची के सत्यापन ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घर-घर सत्यापन के दौरान 31,237 ऐसे मतदाताओं की पहचान हुई जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जबकि 9,411 मतदाताओं के नाम डुप्लीकेट पाए गए। इसके अलावा 1,59,552 मतदाता अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिले और 61,741 मतदाता दूसरे स्थान पर स्थायी रूप से स्थानांतरित पाए गए।
इन आंकड़ों ने चुनावी व्यवस्था और मतदाता सूची की शुद्धता पर बहस तेज कर दी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मृत और डुप्लीकेट नाम पहले से मतदाता सूची में मौजूद थे तो क्या पिछले चुनावों में इन नामों का किसी तरह इस्तेमाल हुआ या नहीं? हालांकि, अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक दावा या प्रमाण सामने नहीं आया है कि इन नामों पर वोट डाले गए। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में गड़बड़ियां मिलने के बाद यह सवाल जरूर उठने लगा है कि मतदाता सूची कितनी सटीक थी।
निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया ही मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए चलाई जा रही है। अब 30 अगस्त तक दावे और आपत्तियां ली जाएंगी, जिसके बाद जांच पूरी कर अंतिम सूची 3 अक्टूबर को प्रकाशित होगी।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाला आंकड़ा मृत मतदाताओं का
सत्यापन में 31,237 ऐसे मतदाताओं की पुष्टि हुई जिनकी मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज मिले। यह संख्या बताती है कि समय-समय पर मतदाता सूची का अद्यतन नहीं होने से हजारों नाम वर्षों तक सूची में बने रह सकते हैं। ऐसे मामलों में अब संबंधित परिवार भी नाम हटवाने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
9 हजार से ज्यादा डुप्लीकेट नाम भी मिले
सत्यापन के दौरान 9,411 मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए। यदि किसी व्यक्ति का नाम दो जगह दर्ज है तो नियमानुसार उसे केवल एक स्थान पर ही मतदाता के रूप में रखा जा सकता है। जांच के बाद ऐसे डुप्लीकेट नाम हटाए जाएंगे।
1.59 लाख वोटर पते पर नहीं मिले
बीएलओ के घर-घर सत्यापन में 1,59,552 मतदाता अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिले। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हो सकते हैं जो दूसरे शहर या राज्य में चले गए, किरायेदार थे या लंबे समय से उस पते पर नहीं रह रहे हैं। अब इन्हें दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
क्या मृत और डुप्लीकेट नामों पर वोट पड़ते रहे
इतनी बड़ी संख्या में मृत और डुप्लीकेट नाम मिलने के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इन नामों का कभी मतदान में इस्तेमाल हुआ। फिलहाल निर्वाचन आयोग ने ऐसा कोई दावा नहीं किया है कि इन नामों पर वोट डाले गए थे। यह केवल एक महत्वपूर्ण सवाल है, जिसका उत्तर रिकॉर्ड की जांच और निर्वाचन प्रक्रिया के विश्लेषण से ही स्पष्ट हो सकता है।
इसलिए हो रहा है विशेष गहन पुनरीक्षण
निर्वाचन आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची से मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट नाम हटाकर केवल पात्र मतदाताओं को सूची में रखना है। इससे चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और फर्जी या त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों की संभावना कम होगी।
अब क्या होगा आगे
31 जुलाई से 30 अगस्त तक दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। इस दौरान नए नाम जुड़ेंगे, गलतियां सुधारी जाएंगी और आपत्तियों का निस्तारण होगा। इसके बाद जांच पूरी कर 3 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।


