हिसार : वैश्विक पर्यावरण सुविधा-7 की फूड सिस्टम, लैंड यूज़ एंड रेस्टोरेशन परियोजना के अंतर्गत जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) बैंकॉक के साथ एक समझौता किया है।
इस समझौते का उद्देश्य जैविक बीज उपचार तकनीकों के माध्यम से प्रत्यक्ष बिजीत धान को बढ़ावा देना तथा किसानों को जलवायु-अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोडऩा है। प्रतिनिधि मण्डल के सदस्यों में एफएओ के एशिया एवं प्रशांत क्षेत्रीय कार्यालय बैंकॉक के लीड टेक्नीशियन ऑफिसर एवं उनकी टीम तथा एफएओ इंडिया के अधिकारी भी इस बैठक में उपस्थित रहे। इस टीम में बैंकॉक के लीड टेक्नीकल ऑफिसर ब्यू डेमन, सीनियर टेक्नीकल ऑफिसर जितेंद्र जायसवाल, टेक्नीकल ऑफिसर समीर कार्की, एग्रोनॉमिस्ट डॉ. मैथ्यू चैम्पनेस, नेशनल टेक्नीकल कॉर्डिनेटर विनय सिंह व एफएओ एग्रोनॉमिस्ट डॉ. अशोक कुमार शामिल हैं।
कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने बताया कि प्रत्यक्ष बिजीत धान तकनीक, परंपरागत धान रोपाई की तुलना में कम पानी, कम श्रम और कम लागत लेती है। उन्होंने बताया कि जैविक बीज उपचार अपनाने से बीजों की अंकुरण क्षमता में सुधार होगा, पौधों की प्रारंभिक वृद्धि बेहतर होगी तथा रासायनिक उपचारों पर निर्भरता कम होगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी। कुलपति ने बताया कि यह पहल जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और लचीला बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इस परियोजना के अंतर्गत किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन तथा प्रदर्शन कार्यक्रमों के माध्यम से आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।
उपरोक्त परियोजना के नोडल अधिकारी व मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजेश गेरा ने बताया कि जैविक बीज उपचार से मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता में वृद्धि तथा फसल की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही यह तकनीक कृषि में रसायनों के उपयोग को कम कर पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी सहायक सिद्ध होगी।
एफएओ और हकृवि के संयुक्त प्रयासों से इस परियोजना के तहत चयनित क्षेत्रों में प्रदर्शन प्लॉट स्थापित किए जाएंगे तथा किसानों को प्रत्यक्ष बिजीत धान की उन्नत तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस पहल से जल संरक्षण, भूमि की उत्पादकता में सुधार तथा टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के विकास को बढ़ावा मिलेगा। यह समझौता जलवायु-स्मार्ट कृषि को प्रोत्साहित करने तथा किसानों की आजीविका को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।
इन अधिकारियों ने किए हस्ताक्षर
कुलपति प्रो.बलदेव राज काम्बोज की उपस्थिति में विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ राजबीर गर्ग तथा एफएओ की तरफ से टाकायूकी हेगीवारा ने हस्ताक्षर किए। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय में एफएओ का छ: सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दो दिवसीय दौरे पर आया हुआ है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने समझौता ज्ञापन के साथ-साथ कुलपति प्रो काम्बोज के साथ विभिन्न विषयों पर विस्तार से बातचीत की।
इस अवसर पर परियोजना की प्रधान अन्वेषक सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सीमा सांगवान, ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा व मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. रमेश यादव भी उपस्थित रहे।

