गरिमा टाइम्स न्यूज. रोहतक : रोहतक के सेक्टर-1 में चमचमाती कोठियों के बीच टूटी सड़कों की सच्चाई किसी बड़े सिस्टम फेलियर की कहानी बयां कर रही है। यहां हर सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। हालत ये है कि करोड़ों अरबों की प्रॉपर्टी वाले इस इलाके में बुनियादी सुविधा सड़क पूरी तरह दम तोड़ चुकी है। यहां करोड़ों अरबों रुपये की आलीशान कोठियां तो खड़ी हैं, लेकिन उनके सामने की सड़कें बदहाली की ऐसी कहानी बयां कर रही हैं, जो किसी गांव की टूटी पगडंडी से भी बदतर नजर आती हैं।
सेक्टर की शायद ही कोई सड़क ऐसी बची हो, जहां गड्ढे न हों। बड़े-बड़े गड्ढों ने पूरे इलाके को जख्मी कर दिया है और इन रास्तों से गुजरना रोजाना जोखिम उठाने जैसा हो गया है। स्थिति सिर्फ सेक्टर-1 तक सीमित नहीं है। सेक्टर-2 और सेक्टर-3 की सड़कों का हाल भी कुछ ऐसा ही है। हर तरफ टूट-फूट, धूल और गड्ढों का कब्जा है। बारिश के दिनों में ये गड्ढे पानी से भर जाते हैं, जिससे हादसों का खतरा और भी बढ़ जाता है।
वहीं विधायक भारत भूषण बतरा बोल भी चुके हैं कि जब से रोहतक में कांग्रेस का विधायक बना है, तभी से यहां की जनता के साथ भेदभाव हो रहा है। विकास नहीं करवाया जा रहा।

करीब 6 साल से जस की तस हालत
स्थानीय लोगों के मुताबिक ये समस्या पिछले करीब 6 साल से जस की तस बनी हुई है। कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई, नेताओं से गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार सिर्फ वादे ही मिले। हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते चले गए। राजनीतिक एंगल भी इस बदहाली को और गहरा करता नजर आ रहा है। पहले यहां भाजपा के विधायक थे, अब कांग्रेस का प्रतिनिधित्व है। लोगों का आरोप है कि इसी सत्ता बदलाव के बीच विकास कार्य फंसकर रह गए और सड़कों की सुध लेने वाला कोई नहीं बचा। लोग साफ कह रहे हैं सड़कें राजनीति की भेंट चढ़ गई हैं।
सड़क खोदी और बीच में छोड़ दी
कई जगह सड़कों को बनाने के नाम पर खोद दिया गया, कुछ दिन तक काम चला, फिर अचानक सब ठप पड़ गया। अब ये अधूरी खुदाई ही लोगों की सबसे बड़ी मुसीबत बन चुकी है। हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में भी निर्माण शुरू हुआ, लेकिन रफ्तार इतनी धीमी है कि लोगों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही। बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण के लिए बजट भी जारी हो चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। लोगों का सवाल सीधा है, जब पैसा आ चुका है तो सड़कें अब तक क्यों नहीं बनीं।
गड्ढों में दबी विकास की कहानी
सेक्टर-1, 2 और 3 की सड़कें पिछले कई सालों से बदहाली की मार झेल रही हैं। हर गुजरते साल के साथ हालात और खराब होते गए, लेकिन सुधार के नाम पर कुछ नहीं हुआ। यह सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि सिस्टम की अनदेखी का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। निर्माण के नाम पर सड़कों को उखाड़ दिया गया, मशीनें आईं और कुछ दिन बाद गायब हो गईं। अधूरा काम अब लोगों के लिए नई मुसीबत बन गया है।
हर दिन खतरे का सफर, हर दिन नई परेशानी
इन टूटी सड़कों से गुजरना अब लोगों की मजबूरी है। हर दिन वाहन चालकों को गड्ढों से जूझना पड़ता है, हादसों का डर बना रहता है और गाड़ियों को भी नुकसान झेलना पड़ रहा है। यह रोजमर्रा की परेशानी अब लोगों के गुस्से में बदल चुकी है।

