- रात का डर, घर के बाहर खड़े वाहनों को तोड़ रहे बदमाश
कविता.रोहतक : शहर में हाल ही में अलग-अलग इलाकों में घरों के बाहर खड़े वाहनों को निशाना बनाकर की गई तोड़फोड़ की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। गांधी कैंप और कुआं मोहल्ले की घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब अधिकांश कॉलोनियों में वाहन सड़क या घर के बाहर ही खड़े किए जाते हैं, तो उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।
लोगों का कहना है कि रात के समय कुछ मिनटों में होने वाली ऐसी वारदातें न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि पूरे मोहल्ले में असुरक्षा का माहौल भी बना देती हैं। शहर की कई कॉलोनियों में पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में लोगों के पास अपने वाहन घर के बाहर खड़े करने के अलावा दूसरा विकल्प भी नहीं बचता। यदि असामाजिक तत्व रात के अंधेरे में वाहनों को नुकसान पहुंचाकर आसानी से निकल जाते हैं तो यह केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल है। इसलिए अब जरूरत केवल आरोपियों को पकड़ने की नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाने की भी है।
कॉलोनियों में पार्किंग बना सबसे बड़ा संकट
रोहतक की अधिकांश पुरानी और घनी आबादी वाली कॉलोनियों में निजी पार्किंग की सुविधा नहीं है। कई मकानों में वाहन अंदर रखने की जगह नहीं होने से कार, बाइक और ई-रिक्शा रातभर सड़क किनारे खड़े रहते हैं। यही वजह है कि बदमाशों के लिए इन्हें निशाना बनाना आसान हो जाता है। शहरी विकास योजनाओं में सामुदायिक पार्किंग और सुरक्षित पार्किंग स्थलों पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
पुलिस गश्त और निगरानी बढ़ाना होगा सबसे बड़ा कदम
रात के समय नियमित पुलिस गश्त, संवेदनशील इलाकों की विशेष निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोक सकती है। जिन क्षेत्रों में पहले पुलिस चौकी थी या जहां अपराध की घटनाएं अधिक होती हैं, वहां अतिरिक्त पुलिस उपस्थिति लोगों में सुरक्षा का भरोसा भी बढ़ाएगी। इसके साथ ही बीट सिस्टम को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।
कॉलोनी स्तर पर भी बन सकता है सुरक्षा तंत्र
सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। कॉलोनी के लोग भी मिलकर रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन या मोहल्ला सुरक्षा समिति के माध्यम से रात में निगरानी की व्यवस्था बना सकते हैं। मुख्य गलियों में पर्याप्त रोशनी, खराब स्ट्रीट लाइटों की समय पर मरम्मत और पड़ोसियों के बीच सतर्कता का नेटवर्क तैयार होने से संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो सकता है।
तकनीक से भी बढ़ सकती है वाहनों की सुरक्षा
आज कम लागत में हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे, मोशन सेंसर लाइट, व्हीकल अलार्म सिस्टम और जीपीएस आधारित सुरक्षा उपकरण उपलब्ध हैं। यदि कॉलोनी के मुख्य प्रवेश और निकास मार्गों पर कैमरे लगाए जाएं तो बदमाशों की पहचान आसान हो सकती है। वहीं वाहन मालिक भी अपने घर के बाहर कैमरा या सेंसर लाइट लगाकर सुरक्षा का एक अतिरिक्त घेरा तैयार कर सकते हैं।
वाहन मालिक बरतें ये जरूरी सावधानियां
- वाहन हमेशा ऐसी जगह पार्क करें, जहां पर्याप्त रोशनी हो।
- संभव हो तो वाहन को सीसीटीवी कैमरे की निगरानी वाले स्थान पर खड़ा करें।
- घर के बाहर मोशन सेंसर लाइट या अतिरिक्त एलईडी लाइट लगाएं।
- वाहन में सुरक्षा अलार्म या एंटी-थेफ्ट सिस्टम का इस्तेमाल करें।
- रात में किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत पुलिस और आसपास के लोगों को सूचना दें।
- लंबे समय तक वाहन को सुनसान या एकांत स्थान पर खड़ा न छोड़ें।
- कॉलोनी में सामूहिक निगरानी और पड़ोसियों के साथ सतर्कता बनाए रखें।
- वाहन के आसपास कोई संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दे तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
लोग बोले, पुलिस की गश्त बढ़नी चाहिए
ज्यादातर लोगों के पास गाड़ी घर के बाहर खड़ी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। जब रात में इस तरह की तोड़फोड़ होती है तो हर परिवार के मन में डर बैठ जाता है कि अगला नंबर कहीं उनकी गाड़ी का न हो। पुलिस की रात की गश्त बढ़नी चाहिए और संवेदनशील इलाकों में दोबारा चौकी खोलने पर भी विचार होना चाहिए। –राजेश, गांधी कैंप निवासी
नियमित निगरानी की जरूरत
हमारी कॉलोनी में ज्यादातर लोगों के वाहन घर के बाहर ही खड़े रहते हैं। हाल की घटनाओं के बाद हर रात यह डर बना रहता है कि कहीं सुबह उठकर अपनी गाड़ी टूटी हुई न मिले। पुलिस गश्त बढ़ाने और संवेदनशील इलाकों में नियमित निगरानी की जरूरत है। –राजीव शर्मा, गांधी कैंप निवासी
सुरक्षा समिति जैसी व्यवस्था हो
वाहनों की सुरक्षा अब सिर्फ मालिक की जिम्मेदारी नहीं रह गई है। कॉलोनियों में सीसीटीवी कैमरे, बेहतर स्ट्रीट लाइट और मोहल्ला स्तर पर सुरक्षा समिति जैसी व्यवस्था बनाई जाए तो इस तरह की घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। –अनीता, समाजसेवी

