कविता. रोहतक: मानसून की शुरुआत के साथ ही लोगों को भीषण गर्मी से राहत तो मिल गई है, लेकिन शहर की टूटी सड़कें और जगह-जगह बने गहरे गड्ढे अब नई आफत बनकर सामने आ गए हैं।
बारिश का पानी इन गड्ढों को पूरी तरह ढक देता है, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को उनका अंदाजा तक नहीं लग पाता। नतीजा यह है कि हर दिन दुर्घटना का खतरा बढ़ता जा रहा है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
शहर के सेक्टर-2 और सेक्टर-3 मार्केट के आसपास, सेक्टर-2 की आंतरिक सड़कों, रामगोपाल कॉलोनी, चिन्योट कॉलोनी, पीजीआईएमएस के पीछे, डीएलएफ कॉलोनी, दिल्ली रोड सहित कई प्रमुख मार्गों पर सड़कें जगह-जगह से उखड़ी हुई हैं। कहीं गहरे गड्ढे हैं तो कहीं सड़क पूरी तरह टूट चुकी है। पुराने शहर की गलियों और सड़कों की स्थिति इससे भी अधिक खराब है। बारिश के दौरान पानी भरने से यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि सड़क कहां खत्म हो रही है और गड्ढा कहां शुरू हो रहा है।

सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को झेलनी पड़ रही है। पानी से भरे गड्ढों में अचानक बाइक या स्कूटी का संतुलन बिगड़ जाता है और हादसे का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। रात के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि पानी और अंधेरे के कारण गड्ढे बिल्कुल दिखाई नहीं देते।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन सड़कों की खराब हालत कोई नई बात नहीं है। कई स्थानों पर लंबे समय से गड्ढे बने हुए हैं, लेकिन नगर निगम और संबंधित विभागों ने इन्हें भरने की गंभीर कोशिश नहीं की। बरसात शुरू होने के बाद अब ये गड्ढे जानलेवा साबित हो सकते हैं।
बारिश का मौसम अभी शुरू ही हुआ है। यदि समय रहते सड़कों की मरम्मत नहीं हुई तो आने वाले दिनों में हादसों की संख्या बढ़ सकती है। ऐसे में नगर निगम और प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वे तत्काल सर्वे कराकर सभी खतरनाक गड्ढों को भरें और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराएं, ताकि लोगों की जान जोखिम में न पड़े।
पानी में छिपे गड्ढे बन जाते हैं सबसे बड़ा खतरा
बारिश का पानी सड़क पर जमा होते ही गड्ढे दिखाई देना बंद हो जाते हैं। वाहन चालक सामान्य सड़क समझकर आगे बढ़ते हैं और अचानक गड्ढे में वाहन गिरने से दुर्घटना हो जाती है।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा
सेक्टर-2 और 3 मार्केट, सेक्टर-2 की सड़कें, रामगोपाल कॉलोनी, चिन्योट कॉलोनी, पीजीआईएमएस के पीछे, दिल्ली रोड और पुराने शहर के कई मार्गों पर सड़कें बदहाल हैं। यहां रोजाना हजारों लोग आवाजाही करते हैं।
दोपहिया चालकों को मुश्किल
बाइक और स्कूटी सवार सबसे अधिक जोखिम में हैं। हल्की सी चूक या पानी से भरे गड्ढे में पहिया फंसने पर गंभीर चोट लग सकती है। बुजुर्ग और महिलाएं भी लगातार परेशान हो रहे हैं।
बरसात में बढ़ेगा खतरा, जिम्मेदार कौन
मानसून अभी शुरू हुआ है। यदि शुरुआती दिनों में ही सड़कें ऐसी हैं तो लगातार बारिश के बाद हालात और खराब होंगे। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा।
सिर्फ पैचवर्क नहीं, स्थायी समाधान चाहिए
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश से पहले और बाद में केवल खानापूर्ति होती है। जरूरत इस बात की है कि क्षतिग्रस्त सड़कों का स्थायी निर्माण कराया जाए, ताकि हर मानसून में लोगों की जान जोखिम में न पड़े।

