Saturday, July 18, 2026
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तस्करों ने बदला तरीका : लग्जरी कारों में दौड़ रहा नशे का काला कारोबार

कविता.रोहतक : नशा तस्करों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस लगातार अभियान चला रही है, लेकिन तस्कर भी हर दिन नए तरीके अपना रहे हैं। अब बाइक, बस या साधारण वाहनों की बजाय महंगी लग्जरी कारों का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि रास्ते में किसी को शक न हो।

रोहतक पुलिस ने पिछले दिनों एक वेन्यू और एक क्रेटा कार से लाखों रुपये की अफीम और चरस बरामद कर इस नए ट्रेंड का खुलासा किया है। इससे साफ है कि नशा तस्करी का नेटवर्क अब पहले से ज्यादा संगठित और हाईटेक होता जा रहा है।

शक से बचने के लिए चुनी जा रही महंगी कारें

पहले नशा तस्करी में पुराने या सामान्य वाहनों का ज्यादा इस्तेमाल होता था, लेकिन अब तस्कर वेन्यू, क्रेटा जैसी महंगी एसयूवी का सहारा ले रहे हैं। सड़क पर चलती ऐसी गाड़ियों को आमतौर पर लोग प्रतिष्ठित परिवार या कारोबारी की गाड़ी मानते हैं। इसी मानसिकता का फायदा उठाकर तस्कर आसानी से लंबी दूरी तक नशा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

हर नाके पर एक जैसी जांच नहीं बन रही चुनौती

पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हर वाहन की समान रूप से गहन जांच करना संभव नहीं होता। ट्रैफिक का दबाव और सीमित संसाधनों के बीच तस्कर इसी कमजोरी का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों को भी जांच की रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है।

गाड़ियों में बनाए जा रहे गुप्त ठिकाने

नशा तस्कर केवल डिक्की में सामान नहीं रखते, बल्कि कई मामलों में कारों के अंदर गुप्त चैम्बर या विशेष जगह तैयार कर लेते हैं। सीटों, डैशबोर्ड, दरवाजों या अन्य हिस्सों में नशा छिपाकर ले जाया जाता है, जिससे सामान्य जांच में पकड़ना आसान नहीं होता। यही वजह है कि अब तकनीकी जांच और खुफिया सूचना का महत्व बढ़ गया है।

युवाओं तक पहुंचाने के लिए बदल रही सप्लाई चेन

नशा तस्करी का नेटवर्क लगातार अपना तरीका बदल रहा है। बड़े शहरों से छोटे कस्बों और गांवों तक सप्लाई पहुंचाने के लिए अलग-अलग वाहनों और अलग-अलग रूट का इस्तेमाल किया जाता है। महंगी कारों के इस्तेमाल से तस्कर कम समय में ज्यादा दूरी तय कर रहे हैं और संदेह भी कम होता है।

केवल बरामदगी नहीं, पूरी चेन तोड़ना जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नशे की खेप पकड़ लेने से समस्या खत्म नहीं होगी। यह जानना जरूरी है कि नशा कहां से आया, किसके लिए लाया जा रहा था और इसके पीछे कौन-सा गिरोह सक्रिय है। जब तक पूरे नेटवर्क और आर्थिक स्रोतों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक तस्कर नए तरीके अपनाते रहेंगे।

आम लोगों की सतर्कता भी बनेगी बड़ी ताकत

नशा तस्करी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ आम नागरिकों की सतर्कता भी बेहद जरूरी है। यदि किसी वाहन की गतिविधियां संदिग्ध लगें या बार-बार एक ही रूट पर असामान्य तरीके से आवाजाही दिखाई दे तो इसकी सूचना पुलिस को देना प्रभावी साबित हो सकता है। नशे के कारोबार पर रोक तभी लगेगी जब कानून लागू करने वाली एजेंसियों और समाज, दोनों की साझी भागीदारी होगी।

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