कविता.रोहतक: दीपावली की आतिशबाजी का उत्साह अभी पूरी तरह परवान भी नहीं चढ़ा है कि पटाखों से झुलसने के मामले सामने आने लगे हैं। बाजारों से लेकर शहर की गलियों तक सामान्य पटाखों की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। बच्चे भी पटाखे खरीदकर आतिशबाजी करने में जुट गए हैं, लेकिन जरा सी लापरवाही उनके लिए भारी पड़ रही है। रोहतक के सेक्टर-1 में पटाखा लगने से एक बच्चा झुलस गया। इसी तरह अन्य स्थानों से भी पटाखों से हादसों की सूचनाएं मिल रही हैं।
हालांकि पीजीआईएमएस और नागरिक अस्पताल ने पटाखों से होने वाली चोटों और जलने के मामलों से निपटने के लिए तैयारियां की हैं, लेकिन सबसे बड़ी जरूरत अभिभावकों की सतर्कता की है। त्योहार की खुशियां कहीं बच्चों के लिए दर्द और परिवार के लिए परेशानी न बन जाएं, इसके लिए बच्चों को खतरनाक पटाखों से दूर रखना और अपनी निगरानी में ही आतिशबाजी करवाना जरूरी है।
गली-गली में पटाखों की बिक्री, नियमों के बीच सामान्य पटाखे भी उपलब्ध
शहर के मुख्य बाजारों में ही नहीं, बल्कि कॉलोनियों और गलियों में भी पटाखों की बिक्री होती दिखाई दे रही है। सामान्य पटाखे भी आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। ऐसे में बच्चों तक पटाखों की पहुंच आसान हो गई है। कई बच्चे अभिभावकों की निगरानी के बिना ही पटाखे जलाने लगते हैं। तेज आवाज वाले पटाखे, रॉकेट और अनार जैसे आतिशबाजी के सामान से हादसे का खतरा बना रहता है। थोड़ी सी असावधानी आंखों, चेहरे और हाथों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
सेक्टर-1 में पटाखा लगने से बच्चा झुलसा
पटाखों से होने वाले हादसों का असर अब सामने आने लगा है। सेक्टर-1 में एक बच्चा पटाखा लगने से झुलस गया। इसके अलावा अन्य स्थानों पर भी आतिशबाजी के दौरान हादसे होने की सूचनाएं मिल रही हैं। त्योहार से पहले ही इस तरह के मामले सामने आना चिंता बढ़ाने वाला है। अक्सर बच्चे पटाखे जलाने के बाद उनके पास चले जाते हैं या नहीं जलने वाले पटाखों को दोबारा जलाने की कोशिश करते हैं। ऐसी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।
पीजीआई और नागरिक अस्पताल में उपचार की तैयारी
पटाखों से जलने और चोट लगने के मामलों को देखते हुए पीजीआईएमएस और नागरिक अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी की गई है। अस्पतालों में ऐसे मरीजों को उपचार देने के लिए जरूरी इंतजाम किए गए हैं। हालांकि डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों के बावजूद पटाखों से होने वाली चोटों से बचाव सबसे जरूरी है। गंभीर रूप से झुलसने के मामलों में समय पर उपचार मिलना बेहद अहम होता है, इसलिए हादसा होने पर देरी करने की बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।
बच्चों को अकेले न छोड़ें, अभिभावकों की निगरानी में ही हो आतिशबाजी
दीपावली पर बच्चों का पटाखे चलाने का उत्साह स्वाभाविक है, लेकिन उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अभिभावकों की है। बच्चों को खतरनाक और तेज आवाज वाले पटाखों से दूर रखें। आतिशबाजी के दौरान उन्हें अकेला न छोड़ें और पटाखे हमेशा खुली जगह पर सुरक्षित दूरी बनाकर जलवाएं। ढीले और सिंथेटिक कपड़ों की बजाय सूती कपड़े पहनाएं। जलते या फुस्स हो चुके पटाखों को दोबारा जलाने की कोशिश न करने दें। थोड़ी सी सावधानी त्योहार की खुशियों को हादसे में बदलने से बचा सकती है।

