रोहतक : आगामी मानसून के दौरान जलभराव की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने एवं वर्षा जल निकासी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से उपायुक्त सचिन गुप्ता ने जिला स्तरीय व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सभी ड्रेनों, पंपिंग क्षमता, मशीनरी की तैनाती, विद्युत उपलब्धता तथा कार्यों की समयसीमा की विस्तार से समीक्षा की गई।
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए, जहां पूर्व में भारी वर्षा के दौरान जलभराव की समस्या सामने आई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस तैयारियां सुनिश्चित की जाएं। इसके अलावा संवेदनशील स्थानों की मैपिंग एवं अग्रिम तैयारी करने के भी निर्देश दिये। बैठक में उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि वे पूर्व मानसून अनुभव के आधार पर गांव एवं क्षेत्रवार जलभराव संभावित स्थलों की मैपिंग की जाये। चिन्हित स्थानों पर मानसून से पूर्व पंपिंग व्यवस्थाएं स्थापित की जाये। नीचले स्थानों की बस्तियों, सडक़ क्रॉसिंग, कृषि क्षेत्रों एवं आंतरिक निकासी बिंदुओं की माइक्रो-मैपिंग पूर्ण की जाये। उन्होंने यह भी कहा कि जलभराव रोकथाम की रणनीति अपनाकर समय पर सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
ड्रेनेज नेटवर्क का भौतिक निरीक्षण एवं सुदृढ़ीकरण
बैठक में सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यमुना जल सेवाएं सर्कल रोहतक के तहत 108 मुख्य एवं लिंक ड्रेन स्थापित हैं, जिनमें 92 रोहतक डिवीजन तथा 16 सांपला डिवीजन के अंतर्गत आती हैं। समीक्षा में प्रमुख ड्रेनों में ड्रेन नंबर 8 (रोहतक लिंक ड्रेन), हुमायूंपुर ड्रेन, लाखन माजरा लिंक ड्रेन, पाक्समा ड्रेन, गांधरा ड्रेन, मकडोली लिंक ड्रेन, समर गोपालपुर लिंक ड्रेन, अस्सन लिंक ड्रेन तथा जसिया ड्रेन शामिल रही।
उपायुक्त ने निर्देश दिये कि सभी ड्रेनों, पुलियों एवं तटबंधों का अनिवार्य भौतिक निरीक्षण किया जाए। सिल्ट, झाड़-झंखाड़ एवं अवरोधों को हटाकर जल प्रवाह सुचारू किया जाए। कमजोर हिस्सों एवं तटबंधों की मरम्मत शीघ्र की जाए। मुख्य ड्रेनों से जुड़े आवासीय क्षेत्रों की आंतरिक नालियों की सफाई समय पर पूर्ण की जाए।
मशीनरी एवं पंपिंग क्षमता की व्यापक व्यवस्था
बैठक में सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जिला में 4 चेन-टाइप पोकलेन मशीनें (गहरी सफाई हेतु), 3 जेसीबी मशीनें (सिल्ट हटाने व मरम्मत हेतु), 11 ट्रैक्टर एवं 2 पिकअप वाहन (आंतरिक निकासी एवं आपात कार्यों हेतु) तैनात किए गए हैं। मशीनरी की तैनाती जोनवार योजना के अनुसार की जाएगी तथा प्रत्येक अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
जिला में बाढ़ एवं जलभराव प्रबंधन हेतु
बैठक में बताया गया कि जल निकासी प्रबंधों को लेकर जिला में 49 स्थायी पंप हाउस, 165 स्थायी पंप (कुल निकासी क्षमता 1670 क्यूसेक), उपलब्ध हैं, जो लगभग सभी गांवों को कवर करते हैं। इसके अलावा आपात स्थितियों से निपटने के लिए 203 चलित विद्युत पंप सेट (670 क्यूसेक क्षमता), 89 चलित डीजल पंप सेट (178 क्यूसेक क्षमता) उपलब्ध हैं, जिन्हें आवश्यकता अनुसार त्वरित प्रयोग किया जा सकता है। विद्युत आपूर्ति एवं समन्वय पर विशेष बल देते हुए उपायुक्त सचिन गुप्ता ने निर्देश दिए कि पंपिंग स्थलों के लिए अग्रिम रूप से बिजली कनेक्शन हेतु आवेदन पूर्ण किए जाएं। वर्षा के दौरान विद्युत विभाग के साथ रियल-टाइम समन्वय रखा जाए। संभावित बिजली बाधाओं की पूर्व पहचान कर समाधान सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में बताया गया कि ड्रेनेज क्षमता सुदृढ़ करने के लिए 11,300 एचडीपीई पाइप (कुल लंबाई 67,800 मीटर) उपलब्ध हैं। अतिरिक्त 3,000 एचडीपीई पाइप (18,000 मीटर) स्वीकृत किए गए हैं। जिला में 20 बाढ़ शमन योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने निर्देश दिए कि सामग्री का उपयोग आवश्यकता एवं स्थल-विशिष्ट मानकों के अनुसार किया जाए, ताकि स्थायी समाधान सुनिश्चित हो सके।
समयसीमा एवं जवाबदेही तय
उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी ड्रेनेज संबंधी टेंडर 5 मार्च 2026 तक जारी किए जाएं। कार्यों का आवंटन 31 मार्च 2026 तक पूर्ण किया जाए। प्रगति की नियमित जिला स्तरीय समीक्षा की जाए। विलंब या लापरवाही की स्थिति में जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए। बैठक के अंत में उपायुक्त ने कहा कि अग्रिम तैयारी, समन्वित क्रियान्वयन एवं समयबद्ध कार्यवाही से ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि मानसून के दौरान नागरिकों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। बैठक में सिंचाई विभाग, विद्युत विभाग, पंचायती राज संस्थाओं एवं राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

