- रोहतक में सड़कें बनीं पार्किंग, जाम में फंसा शहर
- पावर हाउस से नेकीराम कॉलेज तक हालात खराब
कविता.रोहतक : शहर में जाम की समस्या नई नहीं है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी वजहों में से एक ऐसी है, जिस पर लंबे समय से गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। शहर की सड़कें वाहनों के चलने के लिए हैं, लेकिन बड़ी संख्या में वाहन इन्हीं सड़कों पर खड़े रहते हैं।
नतीजा यह है कि सड़क की चौड़ाई लगातार कम होती जा रही है और व्यस्त इलाकों में दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। पावर हाउस के पास जाट कॉलेज से नेकीराम कॉलेज तक का मार्ग इसका बड़ा उदाहरण है। यहां सड़क के दोनों ओर खड़े वाहन राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं।

सड़क पर वाहन खड़े, चलने के लिए जगह कम
जाट कॉलेज से नेकीराम कॉलेज की तरफ जाने वाले मार्ग पर सड़क के किनारे बड़ी संख्या में वाहन खड़े रहते हैं। व्यस्त समय में स्थिति और बिगड़ जाती है। सड़क का एक हिस्सा पार्किंग में तब्दील होने के कारण वाहनों के गुजरने के लिए सीमित जगह बचती है।आमने-सामने से वाहन आने पर जाम की स्थिति बन जाती है। सवाल यह है कि जब सड़क पर पार्किंग की अनुमति नहीं है तो यहां रोजाना इतनी बड़ी संख्या में वाहन खड़े कैसे हो रहे हैं और इन्हें रोकने की व्यवस्था कहां है।
मेडिकल स्टोरों पर सबसे ज्यादा परेशानी
पीजीआई की तरफ से शहर में आते समय मेडिकल स्टोरों के आसपास हालात और भी खराब दिखाई देते हैं। दवा लेने के लिए आने वाले लोग अपने वाहन सड़क पर ही खड़े कर देते हैं और कुछ मिनट की खरीदारी के दौरान सड़क का बड़ा हिस्सा घिर जाता है। एक वाहन के पीछे दूसरा वाहन रुकता जाता है और देखते ही देखते लंबा जाम लग जाता है। मरीजों और उनके साथ आने वाले लोगों की संख्या अधिक होने के कारण यहां समस्या दिनभर बनी रहती है।
मरीजों के रास्ते में भी पार्किंग का कब्जा
पीजीआई जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान के आसपास सड़क पर बेतरतीब पार्किंग सिर्फ यातायात की समस्या नहीं है। यहां आने वाले मरीजों, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों को भी जाम में फंसना पड़ता है। एंबुलेंस और अन्य जरूरी वाहनों के लिए रास्ता खुला रखना बेहद जरूरी है, लेकिन सड़क किनारे खड़े वाहन कई जगह रास्ते को संकरा कर देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अस्पताल के आसपास पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई और यातायात को सुचारू रखने के लिए नियमित निगरानी क्यों नहीं होती।
पार्किंग व्यवस्था पर बड़ा सवाल
रोहतक में पार्किंग की समस्या वर्षों पुरानी है। बाजारों और प्रमुख संस्थानों के आसपास लोग मजबूरी में सड़क पर वाहन खड़े करते हैं, लेकिन व्यवस्था का सवाल यहीं से खड़ा होता है। अगर शहर में पर्याप्त और व्यवस्थित पार्किंग उपलब्ध नहीं है तो सड़क पर वाहन खड़े होने से रोकने की कार्रवाई कितनी कारगर होगी। प्रशासन को सिर्फ चालान काटने के बजाय यह भी देखना होगा कि लोगों को वाहन खड़ा करने के लिए विकल्प कहां दिया गया है।
जाम से निजात चाहिए तो सड़क को पार्किंग से मुक्त करना होगा
रोहतक में जाम से राहत के लिए केवल ट्रैफिक पुलिस की तैनाती या कुछ जगह बैरिकेड लगाने से काम नहीं चलेगा। पावर हाउस से नेकीराम कॉलेज और पीजीआई के आसपास जैसे व्यस्त मार्गों पर पार्किंग का स्थायी समाधान तलाशना होगा। सड़क किनारे खड़े वाहनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई के साथ वैकल्पिक पार्किंग स्थल विकसित करने होंगे। जब तक सड़क और पार्किंग की सीमा स्पष्ट नहीं होगी, तब तक शहर की सड़कें वाहन चलाने के बजाय वाहन खड़े करने की जगह बनी रहेंगी और लोग रोजाना जाम में फंसते रहेंगे।


